By रेनू तिवारी | Feb 18, 2026
राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' (16-20 फरवरी) में एक 'रोबोटिक डॉग' को लेकर उठा विवाद अब एक नया मोड़ ले चुका है। जहाँ एक ओर गलगोटियास विश्वविद्यालय पर आयातित तकनीक को स्वदेशी बताकर पेश करने के गंभीर आरोप लगे हैं, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे 'प्रेरणा' का जरिया बताकर अपना बचाव किया है।
इसमें प्रदर्शित प्रौद्योगिकी की उत्पत्ति और स्वामित्व पर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय से तुरंत प्रदर्शनी स्थल छोड़ने को कहा गया। हालांकि विश्वविद्यालय की प्रोफेसर ने इस निर्देश के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही है। विवाद उस समय शुरू हुआ जब गलगोटियास विश्वविद्यालय ने प्रदर्शनी में ‘ओरायन’ नाम का ‘रोबोट डॉग’ प्रदर्शित किया।
आलोचकों का कहना था कि यह विश्वविद्यालय का स्वदेशी नवाचार नहीं है बल्कि चीन में बना एक रोबोट है। इसके बाद विश्वविद्यालय को सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा। सूत्रों ने बताया कि विश्वविद्यालय पर आयातित प्रौद्योगिकी को अपनी बताकर पेश करने के आरोप लगे हैं। इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए गलगोटियास विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नेहा सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ यह विवाद इसलिए खड़ा हुआ क्योंकि शायद बातों को स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं किया गया और इसके पीछे की मंशा को ठीक से समझा नहीं गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ ‘रोबोट डॉग’ के बारे में हम यह दावा नहीं कर सकते कि हमने इसे बनाया है। मैंने सभी को बताया है कि हमने इसे अपने छात्रों के समक्ष इसलिए पेश किया ताकि वे खुद कुछ बेहतर बनाने के लिए प्रेरित हों। हमारा विश्वविद्यालय कृत्रिम मेधा (एआई) के क्षेत्र में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी प्रदान करके भविष्य के दिग्गज बनाने में योगदान देता है और आगे भी ऐसा करना जारी रखेगा।’’
सरकार द्वारा विश्वविद्यालय को प्रदर्शनी क्षेत्र खाली करने के लिए कहे जाने के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। मुझे बस इतना पता है कि आज हम सभी यहां मौजूद हैं।’’ ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ का आयोजन 16 से 20 फरवरी तक राष्ट्रीय राजधानी में किया जा रहा है।