Gangaur Puja 2026: आज है गणगौर पूजा, अखंड सौभाग्य का मिलेगा वरदान, इस Special Puja Vidhi से करें शिव-गौरी को प्रसन्न

By दिव्यांशी भदौरिया | Mar 21, 2026

हिंदू धर्म में गणगौर का पर्व बेहद ही खास माना जाता है। हर साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य और कुंवारी कन्याओं के लिए मनचाहे वर की प्राप्ति का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस कठिन व्रत के रखने से शिव-शक्ति की कृपा मिलती है, तो इस व्रत से जुड़ी मुख्य बातें आपको बताते हैं।

यह त्योहार राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। गण का मतलब है भगवान शंकर और गौर का मतलब है माता गौरी यानी पार्वती। यह पर शिव और शक्ति के अटूट प्रेम का प्रतीक है। माना जाता है कि देवी पार्वती ने भारी तपस्या के बाद भगवान शिव को पति के रूप में पाया था। चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन आने वाली यह पूजा महिलाओं के लिए बेहद खास होती है।

गणगौर पूजा विधि

 - सबसे पहले एक वेदी पर शिव-पार्वती की मिट्टी की बनी प्रतिमा स्थापित करें।

 - माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री जैसे कि मेहंदी, चूड़ियां, सिंदूर और बिंदी अर्पित करें।

 - अब भगवान शिव को पीले वस्त्र और अक्षत चढ़ाएं।

 - नवरात्र के समय बोए गए जवारे इस पूजा में विशेष रुप से उपयोग किया जाता है।

 - इसके बाद फल, मिठाई और घेवर का भोग लगाएं।

 - पूजा के दौरान गणगौर व्रत की पौराणिक कथा जरुर सुनें या पढ़ें।

 - आखिर में आरती करें।

 - पूजा में हुई सभी गलती की क्षमा मांगे।

पूजन मंत्र

-ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः॥

-ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

-हे गौरी शंकरार्धांगी। यथा त्वं शंकर प्रिया। तथा मां कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम्॥

प्रमुख खबरें

RD Burman Birth Anniversary: R.D. Burman के Classic Songs आज भी दिलों पर करते हैं राज, जानें दिलचस्प किस्से

Asian Games में Gold बचाने उतरेंगे Neeraj Chopra, Pakistani खिलाड़ी Arshad Nadeem से होगा महामुकाबला!

US विदेश मंत्री Marco Rubio का ऐलान, Israel-Lebanon ने ऐतिहासिक शांति समझौते पर किए साइन।

Shani Pradosh Vrat 2026: शनि प्रदोष व्रत पर होती है भगवान शिव की भी पूजा