By अनन्या मिश्रा | Jul 20, 2026
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के कई फेमस गानों को अपनी सुरीली आवाज से सजाने वाली गीता दत्त का 20 जुलाई को निधन हो गया था। आज भी गीता दत्त की आवाज संगीत जगत में महका करती है। गीता दत्त की गायिकी में वह जादू था कि उनके संगीत में प्यार, दर्द और तकलीफ जैसे जज्बात उभरकर आते थे। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर गीता दत्त के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
गीता दत्त को साल 1946 में पहला ब्रेक मिला था, तब वह 16 साल की थीं। फिल्म 'भक्त प्रह्लाद' के एक गाने में गीता ने दो लाइनें गाई थीं। इसके बाद फिल्म 'दो भाई' के गाने में अपनी आवाज दी। उन्होंने अपने सिंगिंग करियर में 'आंखों ही आंखों', 'चिन चिन चू', 'जाने कहां मेरा जिगर गया जी', 'बाबू जी धीरे चलना', 'पिया ऐसो जिया में समाय गयो रे', 'मुझे जान न कहो मेरी जान', 'वक्त ने किया क्या हसीं सितम' और 'ये लो मैं हारी पिया' जैसे तमाम हिट गाने दिए। लोग आज भी इन गानों को सुनना पसंद करते थे। गीता दत्त ने अपने सिंगिंग करियर में ओ.पी. नैय्यर, स.डी. बर्मन और हेमंत कुमार जैसे बड़े संगीतकारों के साथ काम किया।
गीता दत्त की शादी मशहूर फिल्म निर्माता गुरुदत्त से हुई थी। गुरु और गीता की पहली मुलाकात फिल्म 'बाजी' के सेट पर हुई थी। दोनों का प्यार परवान चढ़ा और दोनों ने शादी का फैसला किया। लेकिन गीता का परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था। लेकिन 26 जुलाई 1953 को गीता और गुरु ने शादी कर ली। शादी के बाद उनके बच्चे अरुण दत्त, तरुण दत्त और नीना दत्त हुए।
शादी के बाद गुरु दत्त ने गीता पर बंदिशें लगा दीं कि वह सिर्फ उनकी फिल्मों में गाना गाएंगी। शादी के बाद गुरु दत्त और वहीदा रहमान के अफेयर की खबर आने लगी। ऐसे में गीता दत्त अपने बच्चों के साथ माता-पिता के घर चली गईं। इस दौरान गीता दत्त को नशे की लत लग गई और वह शराब की आदी हो गईं।
वहीं लिवर की बीमारी के कारण 20 जुलाई 1972 में 42 साल की उम्र में गीता दत्त ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।