By कमल सिंघी | Dec 15, 2018
गीता जयंती, यह दिन श्रीमद् भगवद्गीता की प्रतीकात्मक जयंती के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन भगवद्गीता के दर्शन मात्र का बड़ा लाभ होता है। यदि इस दिन गीता के श्लोकों का वाचन किया जाए तो मनुष्य के पूर्व जन्म के दोषों का नाश होता है। सनातन धर्म में इसका अत्यधिक महत्व है। कहा जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में उस वक्त गीता का ज्ञान दिया था जब वह अपने कर्म पथ से भटकने लगे थे। हिंदू पंचांग के अनुसार इसे मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी पर मनाया जाता है। इसे गीता का प्रतीकात्मक जन्म दिन माना जाता है। यहां हम आपको गीता जयंती से जुड़े कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं, जिन्हें करने से मनुष्य कभी भी कर्म पथ से नहीं भटकता साथ ही उसके पास धन, ऐश्वर्य, समृद्धि, बुद्धि, साहित्य एवं संस्कारों का बसेरा रहता है। वह सदा ही अभिमान, अहंकार, लालच, काम, क्रोध, द्वेष से दूर रहता है।
गीता जयंती के दिन श्रीमद भगवद्गीता के दर्शन करें, इसके पश्चात् भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर उनसे सदा ही सद्बुद्धि देने के लिए प्रार्थना करें। संभव हो तो गीता कुछ श्लोकों को भी पढ़कर उनका अर्थ समझने का प्रयास करें।
नैनं छिदंति शस्त्राणी, नैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयंतेयापो न शोषयति मारुतः ।।
सहित ऐसे अनेक श्लोक हैं जिन्हें पढ़ने और उनका अर्थ समझने से मनुष्य को जीवन के कष्टों से ना सिर्फ मुक्ति मिलती है, बल्कि वह जीवन के उस पथ को प्राप्त करता है जिसका ज्ञान स्वयं जगतज्ञानी परमेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को दिया है।
-इस दिन शंख का पूजन करना भी लाभकारी बताया गया है। पूजन के उपरांत शंख की ध्वनि से बुरी शक्तियां दूर होती हैं और लक्ष्मी का आगमन होता है। इस पूजन से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
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-इस दिन भगवान कृष्ण के विराट स्वरूप का पूजन भी अत्यंत ही उत्तम माना गया है। कहा जाता है कि इससे समस्त बिगड़े हुए काम बनते हैं एवं मनुष्य के जीवन में शांति का आगमन होता है।
-यदि परिवार में कलह, क्लेश या झगड़े से संबंधित समस्याएं हैं तो गीता जयंती से ही भगवद्गीता के दर्शन करना प्रारंभ करना चाहिए, माना जाता है कि इससे मनुष्य में सही निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है।
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-जिनके घर पर श्रीमद्भगवद्गीता नही है उनके लिए इस दिन इस पवित्र धार्मिक ग्रंथ को अपने घर लाना अत्यंत ही शुभ एवं लाभकारी माना गया है। कहा जाता है कि इससे मां लक्ष्मी सालभर के लिए घर में विराजमान होती हैं तथा कठिन परिस्थितियों में भी मनुष्य पथभ्रष्ट नहीं होता।
-कमल सिंघी