By नीरज कुमार दुबे | Jun 10, 2026
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानि पीओके में बिगड़ते हालात, पाकिस्तानी फौज की बर्बर कार्रवाई और लगातार सुलगते जनाक्रोश के बीच भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी का जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले स्थित उत्तरी कमान मुख्यालय पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आम लोगों पर गोलियां बरसाई जा रही हैं, दूसरी तरफ भारतीय सेना अपनी तैयारी, तकनीकी क्षमता और युद्धक दक्षता को और मजबूत करने में जुटी दिखाई दे रही है। यही वजह है कि सेनाध्यक्ष का यह दौरा बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच भारत की सख्त रणनीतिक चेतावनी के तौर पर भी देखा जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक सेनाध्यक्ष को इस बात की जानकारी दी गई कि तेजी से बदलते सुरक्षा माहौल में सेना किस तरह डेटा आधारित युद्ध क्षमता, नेटवर्क आधारित संचालन और आधुनिक तकनीकों के सहारे अपनी ताकत को नई धार दे रही है। जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट कहा कि आने वाले समय की चुनौतियां पारंपरिक नहीं होंगी, इसलिए सेना को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम तथा लचीला बनाना जरूरी है। उन्होंने नवाचार, आधुनिक युद्ध प्रणाली और तकनीकी अंगीकरण पर विशेष जोर दिया।
सेनाध्यक्ष ने अभियानगत क्षमताओं को और मजबूत करने के उपायों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों और जवानों की अटूट प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि हर परिस्थिति में युद्ध के लिए तैयार रहना भारतीय सेना की सबसे बड़ी ताकत है। यही कारण है कि उत्तरी सीमाओं पर तैनात सेना लगातार अपनी तैयारी को नए स्तर तक ले जाने में जुटी है।
देखा जाये तो भारतीय सेना की यह सक्रियता ऐसे समय में सामने आई है जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हालात विस्फोटक बने हुए हैं। वहां पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की बर्बर कार्रवाई ने पूरे इलाके को दहला दिया है। खुफिया दस्तावेजों के अनुसार पांच जून से नौ जून के बीच पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने आम नागरिकों के खिलाफ सुनियोजित हिंसा चलाई। बताया गया है कि बारमंग पुल गोलीकांड के बाद हालात तेजी से बिगड़े और आर्थिक सुधारों की मांग कर रही संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के नेता शहजैब हबीब की हत्या के बाद लोगों का गुस्सा और भड़क उठा। हम आपको बता दें कि आधिकारिक आंकड़ों में जहां मरने वालों की संख्या ग्यारह बताई जा रही है, वहीं खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मरने वालों में 19 बच्चे और सात गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। यह आरोप भी लगाया गया है कि पाकिस्तान ने मुख्य भूमि से करीब चौदह हजार अतिरिक्त सैनिक पीओके में उतार दिए हैं।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने निहत्थे शोक जुलूसों और आम नागरिकों के काफिलों पर सीधे गोलियां चलाईं। पूरे इलाके में संचार सेवाएं ठप कर दी गईं। इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क बंद कर दिए गए, जबकि शहरों, कस्बों और गांवों में पूर्ण बंद जैसा माहौल बना रहा। कई इलाकों में बैंक, दवा दुकानें और जरूरी सेवाएं तक बंद रहीं। मीरपुर डिवीजन में हालात सबसे ज्यादा तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं, जहां भीमबर और कोटली समेत कई इलाकों से लोग मुजफ्फराबाद मार्च के लिए निकले थे।
मीरपुर के कायदे आजम स्टेडियम के आसपास भारी भीड़ जमा हुई, जिसके बाद पूरे इलाके में प्रदर्शन और हड़ताल तेज हो गई। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर प्रशासन ने संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के दो नेताओं के खिलाफ राजद्रोह की कार्रवाई शुरू कर दी है। इससे लोगों में और ज्यादा गुस्सा फैल गया है।
इस तरह, एक तरफ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में अपनी ही जनता के खिलाफ दमनचक्र चलाया जा रहा है, दूसरी तरफ भारतीय सेना सीमाओं पर चौकन्नी और पूरी तरह तैयार दिखाई दे रही है। उधमपुर में सेनाध्यक्ष की समीक्षा बैठक ने यह साफ कर दिया है कि भारत केवल सीमाओं की रक्षा ही नहीं कर रहा, बल्कि बदलते युद्धक माहौल में हर मोर्चे पर अपनी ताकत को नई धार देने में जुटा हुआ है। वहीं पीओके में उबलता जनाक्रोश पाकिस्तान के उस चेहरे को बेनकाब कर रहा है, जो दुनिया के सामने लोकतंत्र की बात करता है, लेकिन अपने कब्जे वाले इलाकों में जनता की आवाज को गोलियों से कुचलने में लगा हुआ है।