By अभिनय आकाश | Sep 25, 2026
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी कि यूएनजीए के 81वें सत्र की है। जहां पर एक साथ कई सारे डेलीगेट्स अचानक से उठकर सभा से बाहर जाने लगते हैं। आपको बता दें कि यह डेलीगेट्स किसी ब्रेक पर नहीं जा रहे हैं। बल्कि ये वहां से वॉकआउट कर रहे हैं। जैसे ही इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भाषण देने के लिए मंच पर पहुंचते हैं। हॉल में जोरदार हंगामा शुरू हो जाता है। कई सारे देशों के डिप्लोमेट्स ने विरोध जताते हुए वॉकआउट कर दिया। एक-एक करके दर्जनों राजनीयक अपनी सीटों से उठकर बाहर निकल गए और देखते ही देखते हॉल की कई सारी सीटें खाली हो गई। लेकिन नेतन्याहू ने भी इस विरोध पर अपना अलग रुख दिखाया और मंच संभालते ही और वर्कआउट करने वाले डिप्लोमेट्स पर उन्होंने सीधा तंज कसा और सरेआम उन्हें मोरल कायर कह दिया। यानी कि नैतिक डरपोक। नेतन्याहू ने तंज कसते हुए कहा कि अगर कोई और भी कायर इस हॉल में बचा है तो वह भी बाहर चला जाए। मन से बोलते हुए बेंजामिन नेतन्याहू ने दुनिया भर में यहूदी विरोधी माहौल पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में यहूदी समुदाय से सिर उठाकर जीने और बिना डरे खड़ा रहने की अपील करते हैं।
नेतन्याहू स्पीच में आगे कहते हैं कि हमास के इन दरिंदों ने होलोकस से बचे हुए बुजुर्गों तक को नहीं छोड़ा। उन्हें भी मार डाला। उन्होंने माता-पिता के सामने उनके मासूम बच्चों को जिंदा जला दिया। उस दिन उन्होंने कुल मिलाकर 1200 इजराइलियों का कत्लेआम किया। 1 करोड़ की आबादी वाले देश के लिए इसका क्या मतलब है। अगर रेश्यो देखें तो यह 24 घंटे से भी कम समय में 4000 बेगुनाह अमेरिकियों के मारे जाने के बराबर है। यानी यह 91 के हमले से 16 गुना बड़ा हमला था। ऐसा नेतन्याहू ने अपनी स्पीच में कहा है। इसी दिन यूएनजीए में पेस्तीनियन अथॉरिटी के प्रेसिडेंट महमूद अब्बास का भी संबोधन होता है। वो यूएनजीए में मौजूद नहीं थे। फिलिस्तीनी अथॉरिटी को वीजा ही नहीं दिया गया था। उनका वीजा रिजेक्ट कर दिया था। इसी बात का विरोध फिलिस्तीन ने किया। फिलिस्तीनी अथॉरिटी के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने यूएनजीए की बैठक को संबोधित किया।