Rahul Gandhi-Tejashwi पर Giriraj Singh का तीखा हमला, बोले- LOP पद संभालने के अयोग्य

By अंकित सिंह | Mar 17, 2026

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस सांसद को पहले अपने घर का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने एएनआई से कहा कि कुछ कांग्रेस विधायकों ने राहुल गांधी के नेतृत्व को नकार दिया है। राहुल गांधी को पहले अपने घर का ध्यान रखना चाहिए। पार्टी को संभालने में नाकाम रहने के लिए राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए। तेजस्वी यादव एक वोट से हार गए, और आज वे विपक्ष के नेता का पद संभालने के लायक नहीं हैं। हमारे नेतृत्व पर आरोप लगाना बहुत आसान है। वे अब विपक्ष के नेता का पद संभालने के लायक नहीं हैं; उन्हें स्वेच्छा से इस्तीफा दे देना चाहिए।

बिहार की पांच राज्यसभा सीट के लिए सोमवार को हुए चुनाव में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को मिली शत प्रतिशत जीत के बाद विपक्ष ने मंगलवार को विधायकों की ‘खरीद-फरोख्त’ का आरोप लगाया और दलबदल विरोधी कानून की समीक्षा की मांग की। भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने हालांकि विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि विरोधी पक्ष अपने विधायकों को संभालने में विफल रहा और मतदान के दौरान व्हिप जारी करने की मानक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजनीतिक नैतिकता निम्नतम स्तर पर पहुंच गई है। लोग अब उन राजनीतिक दलों का सम्मान नहीं करते जो उन्हें सदन में लाए हैं। दलबदल विरोधी कानून पर गंभीरता से पुनर्विचार करने का समय आ गया है, क्योंकि हर चुनाव में विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले सामने आते हैं। जो कभी एक छिटपुट घटना होती थी अब यह व्यापक समस्या बन गई है।

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लालू प्रसाद यादव नीत राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि राजग ने ‘धनबल’ का इस्तेमाल करके जीत हासिल की। उन्होंने कहा कि न केवल तेजस्वी यादव, बल्कि पूरे देश ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए हैं। उन्होंने हरियाणा, ओडिशा, बिहार और अन्य राज्यों में भी ऐसा किया है।’’ सिंह ने कहा, ‘‘चुनाव बिना बहुमत के, धन बल का इस्तेमाल करके लड़े जा रहे हैं। विधायकों को तोड़ा जा रहा है। लोकतंत्र को इस तरह काम नहीं करना चाहिए। दल-बदल विरोधी कानून ठीक इसी तरह की कार्रवाइयों को रोकने के लिए बनाया गया है। इसके तहत कोई पार्टी तभी टूट सकती है जब उसके पास दो-तिहाई बहुमत हो।

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