Lord Ganesha का स्त्री स्वरूप हैं Devi Vinayaki, इस वजह से प्रकट हुआ था यह दिव्य रूप

By अनन्या मिश्रा | Sep 18, 2026

हिंदू धर्म में गणेश भगवान को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। वहीं किसी भी शुभ व मांगलिक कार्य की शुरूआत से पहले भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि, समृद्धि और शुभता का देवता माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में भगवान गणेश के कई स्वरूपों का वर्णन मिलता है। ऐसा ही एक अनोखा स्वरूप देवी विनायकी का है। जिनको भगवान गणेश का स्त्री स्वरूप माना जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको देवी विनायकी से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में बताने जा रहे हैं और साथ ही यह भी जानेंगे कि श्री गणेश के इस स्‍वरूप की प्रतिमाएं और चित्र कहां-कहां पाए जाते हैं।

देवी विनायकी से जुड़ी मान्यताओं में इनको गणेश और शक्ति का मिलाजुला स्वरूप माना जाता है। वहीं भारत के कुछ प्राचीन मंदिरों में देवी के इस अनोखे स्वरूप की प्रतिमाएं भी हैं।

राजस्थान से लेकर दक्षिण भारत तक हैं प्रमाण

राजस्थान के खेड़ में देवी विनायकी की प्राचीन मूर्ति को काफी पुराना माना जाता है। वहीं ओडिशा के हीरापुर में 64 योगिनी मंदिर में भी आपको देवी विनायकी का स्वरूप देखने को मिलता है। यह मंदिर अपनी प्राचीन योगिनी सिद्धियों के लिए जाना जाता है।

इसके अलावा दक्षिण भारत में देवी विनायकी की पूजा-अर्चना होती है। तमिलनाडु के कन्याकुमारी क्षेत्र में स्थित थानुमालयन मंदिर में देवी विनायकी का प्राचीन रूप है। यह मंदिर करीब 1300 साल पुराना बताया जाता है।

देवी विनायकी की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा में अंधक नामक राक्षस का वर्णन मिलता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक अंधक मां पार्वती को अपनी पत्नी बनाना चाहता था। मां पार्वती की रक्षा के लिए महादेव ने अंधक राक्षस पर प्रहार किया।

लेकिन जब अंधक की रक्त की बूंदे धरती पर गिरती थीं, तो उनसे नए राक्षस उत्पन्न होने लगते थे। जिससे अंधक की शक्ति बढ़ती जा रही थी। इस स्थिति को देखते हुए देवी-देवताओं ने अपनी शक्तियों का आह्वान किया।

कैसे प्रकट हुआ विनायकी स्वरूप

बता दें कि देवी-देवताओं की शक्तियों से तमाम मातृ शक्तियां प्रकट हुईं। जिसके बाद महादेव ने अंधक से युद्ध किया और गणपति ने भी अपने मातृ शक्ति स्वरूप में अंधक का सामना किया। पौराणिक कथा में बताया जाता है गणपति ने अंधक का वध किया और उसके रक्त की बूंदों को धरती पर गिरने से रोक दिया।

इसी के बाद से देवी विनायकी का स्वरूप लोकप्रिय हुआ। उनको भगवान गणेश की स्त्री शक्ति या स्त्री का स्वरूप माना जाता है। यही कारण है कि कुछ स्थानों पर विशेष रूप से देवी विनायकी की पूजा होती है।

देवी विनायकी का स्वरूप

देवी विनायकी की प्रतिमा में भगवान गणेश से मिलते-जुलते कई प्रतीक दिखाई देते हैं। हाथी के मुख और स्त्री के शरीर की वजह से यह स्वरूप बेहद अनोखा माना जाता है। देवी विनायक से जुड़ी मान्यताएं भारत की प्राचीन धार्मिक और शाक्त परंपराओं की विविधता को दिखाता है।

प्रमुख खबरें

तमिलनाडु के मंत्री निर्मल कुमार ने मीनाक्षी मंदिर कुंभाभिषेकम व्यवस्था का बचाव किया, टीटीवी दिनाकरन की आलोचना की

Devendra Fadnavis ने किया UWA Mumbai Campus का जिक्र, 3 छात्रों को मिलेगी 100% Scholarship

Love Horoscope For 18 September 2026 | आज का प्रेम राशिफल 18 सितंबर 2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन

राजस्थान में कुचेरा निकाय चुनाव से पहले Congress पार्षदों पर दबाव बनाने का आरोप, Dotasra ने साधा निशाना