By Ankit Jaiswal | Sep 21, 2026
सोमवार को सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिका के केंद्रीय बैंक की आगे की ब्याज दर नीति को लेकर बढ़ती उम्मीदों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना नीचे आया। निवेशक अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों का रुख किस तरफ जा सकता है।
गौरतलब है कि सोने की कीमतों पर ब्याज दरों का सीधा असर पड़ता है। सोने से नियमित ब्याज या आय नहीं मिलती है, इसलिए जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो निवेशकों के लिए ब्याज देने वाली दूसरी संपत्तियां ज्यादा आकर्षक हो सकती हैं। इसी वजह से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद से सोने की कीमतों पर दबाव बन सकता है।
पिछले सप्ताह अमेरिका के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की थी। इसके साथ ही अधिकारियों के संकेतों से यह उम्मीद भी बढ़ी कि इस साल के अंत से पहले दरों में और बढ़ोतरी की जा सकती है। केंद्रीय बैंक का ध्यान ऊर्जा की कीमतों से पैदा हो रही महंगाई को काबू में रखने पर है। हालांकि ब्याज दर बढ़ने की चिंता के बावजूद पिछले सप्ताह सोने में तेजी रही थी। इसमें कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट की भी भूमिका रही।
सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला आगे भी जारी रहा। ईरान से जुड़े युद्ध के बीच कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीद और इस सप्ताह होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक को लेकर बनी संभावनाओं ने तेल बाजार पर असर डाला है। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति में सुधार की खबरों ने भी कच्चे तेल की कीमतों को नीचे खींचा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, बाजार की नजर अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के बयानों पर भी है। आईएनजी के विश्लेषकों ने कहा है कि अधिकारियों की टिप्पणियों से यह चिंता बढ़ी है कि महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। इससे ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की उम्मीद मजबूत हुई है।
बाजार के मौजूदा अनुमान के अनुसार दिसंबर में अमेरिका के केंद्रीय बैंक की ओर से एक और ब्याज दर बढ़ोतरी की करीब 88 प्रतिशत संभावना मानी जा रही है। यह अनुमान सीएमई फेडवॉच के आंकड़ों पर आधारित है। हालांकि ब्याज दर को लेकर अंतिम फैसला आर्थिक आंकड़ों और महंगाई की स्थिति समेत कई बातों पर निर्भर करेगा।
इस बीच अमेरिकी डॉलर भी मजबूत हुआ है। सोमवार को दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर को मापने वाला सूचकांक 0.1 प्रतिशत बढ़कर 100.30 पर पहुंच गया। डॉलर मजबूत होने पर दूसरे देशों के खरीदारों के लिए डॉलर में मिलने वाला सोना महंगा हो जाता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग पर दबाव पड़ सकता है।
बता दें कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी महंगाई, केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के बयानों और ब्याज दरों को लेकर संकेतों पर रहेगी। इन कारकों के साथ कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी सोने की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।