Heart Attack: Heart Attack का 'Golden Hour' है सबसे अहम, Experts की ये 3 Life Saving Tips बचा सकती हैं जान

By अनन्या मिश्रा | Mar 03, 2026

आजकल दुनियाभर में दिल की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक-कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ रहा है। यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं पर एक्स्ट्रा दबाव को बढ़ाती जा रही है। दिल की बीमारियां भारत सहित दुनियाभर में मौत का सबसे बड़ा कारण बन चुकी हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हर साल करीब 1.79 करोड़ लोगों की मौत हृदय संबंधी रोगों के कारण होती है, जिसमें हार्ट अटैक प्रमुख है।

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सीपीआर देने से बच सकती है जान

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक हार्ट अटैक तब होता है, जब दिल की मांसपेशियों तक खून पहुंचाने वाली कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉक हो जाता है। इससे दिल को सही तरीके से ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है। इस स्थिति में सही समय पर सही कदम उठाने से जीवन को बचाया जा सकता है।

एक्सपर्ट के मुताबिक हार्ट अटैक के बाद पहले के 60 मिनट को 'गोल्डन आवर' कहा जाता है। सही इलाज मिलने पर मृत्यु का खतरा कम किया जा सकता है। इन लक्षणों की पहचान करके सही इलाज देना जरूरी है।

अगर किसी को हार्ट अटैक आ जाए और मरीज बेहोश हो जाता है या सांस या नाड़ी न मिले। तो फौरन कार्डियो-पल्मोनरी रिससिटेशन शुरूकर देना चाहिए।

छाती के बीच प्रति मिनट 100-120 बार दबाव देने से दिन और दिमाग तक ब्लड सर्कुलेशन बनाए रखने में मदद मिलती है। इससे जीवन बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

हार्ट अटैक आने पर क्या करें

हार्ट अटैक अपने आप में डरावना होता है, वहीं यह डर तब ज्यादा बढ़ सकता है, जब आप घर में अकेले हों और हार्ट अटैक आ जाए, लेकिन कोई मदद करने वाला कोई न हो। इस स्थिति में धैर्य और थोड़ी सी जागरुकता से आपकी जान बच सकती है।

अगर सीने में जकड़न या दबाव महसूस हो रहा है औऱ यह दर्द आमतौर पर चुभन की तरह नहीं होता है। बल्कि भारीपन महसूस होता है, जैसे कोई सीने को निचोड़ रहा है।

यह दर्द बाएं हाथ, पीठ के ऊपरी हिस्से, गर्दन और जबड़े तक फैल सकता है।

आपको बिना वजह ज्यादा थकान महसूस हो रहा है। आपको ऐसा महसूस होगा कि शरीर का पूरा सिस्टम बंद हो गया और कोई भी काम करने की हिम्मत नहीं है।

ठंडा पसीना और सांस फूलना भी हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है।

उल्टी या चक्कर आना जैसा महसूस होना भी अलार्मिंग का संकेत माना जाता है।

फौरन करें ये उपाय

फौरन बैठ जाएं और अगर कोई काम कर रहे हैं, तो वह फौरन बंद कर दें। किसी कुर्सी या सोफा पर पीठ को सहारा देकर बैठ जाएं।

इसके बाद 75 से 100 मिलीग्राम एस्पिरिन की टैबलेट को चबाकर पानी से निगलें। इससे यह जल्दी असर करेगा। एस्पिरिन नसों को खोलने में सहायता करता है।

ऐसी स्थिति में इमरजेंसी सर्विस या एंबुलेंस को कॉल करें। अपना एड्रेस साफ-साफ बताएं। वहीं घर पर भी किसी सदस्य या दोस्त को सूचना दें।

घर का दरवाजा खुला छोड़ दें। इससे मदद करने वाला जल्द से जल्द आप तक पहुंच जाएगा।

वहीं सही पोस्चर में बैठें और 45 डिग्री के एंगल पर बैठें और अपने पैरों को थोड़ा ऊपर उठाकर रखें।

इस दौरान गहरी और लंबी सांस लें। नाक से 4 सेकेंड तक अंदर की ओर सांस लें और मुंह से 6 सेकेंड तक धीरे-धीरे सांस बाहर की ओर छोड़ें।

घर पर रखें राम-किट

हेल्क एक्सपर्ट के मुताबिक हार्ट अटैक के समय राम किट 'संजीवनी' साबित हो सकती है।

हार्ट अटैक के लक्षण दिखने पर आपको फौरन दो इकोस्प्रिन और एक रोसुवास्टेटिन खानी चाहिए। इसके बाद सोबिट्रेट की टेबलेट को जीभ पर रखकर इसको चूसना चाहिए। इससे मरीज की जान बचाई जा सकती है।

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