Indian Economy के लिए Good News, सरकार ने समय से पहले हासिल किया Fiscal Deficit का Target

By Ankit Jaiswal | Jun 01, 2026

देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित वित्तीय घाटे के लक्ष्य को हासिल कर लिया है। महालेखा नियंत्रक द्वारा जारी अस्थायी आंकड़ों के अनुसार सरकार का वित्तीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 4.4 प्रतिशत पर रहा है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में बेहतर स्थिति को दिखाता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्रीय बजट में वित्तीय घाटे का अनुमान 15 लाख 68 हजार 936 करोड़ रुपये रखा गया था। बाद में फरवरी में संसद में पेश संशोधित अनुमानों में इसे घटाकर 15 लाख 58 हजार 492 करोड़ रुपये कर दिया गया था। महालेखा नियंत्रक के ताजा आंकड़ों के अनुसार सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने में सफल रही है।

आंकड़ों के मुताबिक केंद्र सरकार ने पूरे वित्त वर्ष के दौरान 33.42 लाख करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया, जो संशोधित अनुमान का लगभग 98.8 प्रतिशत है। वहीं सरकार का कुल खर्च 49.64 लाख करोड़ रुपये रहा, जो संशोधित लक्ष्य के करीब 98.8 प्रतिशत के बराबर है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार ने आय और व्यय दोनों के मोर्चे पर संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है।

गौरतलब है कि वित्तीय घाटे को कम करने का लक्ष्य ऐसे समय में हासिल किया गया है जब सरकार ने कर प्रणाली में कई सुधार किए हैं। व्यक्तिगत आयकर और वस्तु एवं सेवा कर से जुड़े बदलावों के बावजूद सरकार राजस्व संग्रह को स्थिर बनाए रखने में सफल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वित्तीय प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

अर्थव्यवस्था विशेषज्ञ और एक प्रमुख परामर्श संस्था के मुख्य नीति सलाहकार डी. के. श्रीवास्तव ने कहा है कि सरकार की यह सफलता इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि वित्तीय घाटा केवल जीडीपी के अनुपात में ही नहीं बल्कि वास्तविक राशि के रूप में भी कम हुआ है। उनके अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में वित्तीय घाटा लगभग 15.8 लाख करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में घटकर करीब 15.2 लाख करोड़ रुपये रह गया है।

हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित 4.3 प्रतिशत के लक्ष्य को हासिल करना आसान नहीं होगा। इसके लिए कर संग्रह में तेजी लानी होगी और पूंजीगत व्यय की गति को भी बढ़ाना होगा। साथ ही वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर भी सरकार की नजर बनी रहेगी क्योंकि इसका असर राजस्व और कर संग्रह दोनों पर पड़ सकता है।

कुल मिलाकर वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और विकास कार्यों के लिए संसाधनों का संतुलित उपयोग करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा और देश की आर्थिक स्थिरता को भी बल मिलेगा।

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