By रेनू तिवारी | Oct 16, 2026
वैश्विक प्रौद्योगिकी दिग्गज गूगल (Google) ने भारत में एआई-आधारित नवाचार (AI Innovation) को बढ़ावा देने के लिए एक साथ कई बड़ी और महत्वाकांक्षी पहलों की घोषणा की है। कंपनी का उद्देश्य भारतीय कृषि, शिक्षा और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के जरिए नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। गूगल इंडिया द्वारा शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में इन बहुआयामी योजनाओं और साझेदारियों की जानकारी दी गई।
इक्रिसैट के जीन बैंक में मौजूद 90 से अधिक देशों की 44,000 से ज्यादा ज्वार किस्मों के संग्रह से नमूने लिए जाएंगे। बयान के मुताबिक, गूगल की एआई इकाई गूगल डीपमाइंड इक्रिसैट में तीन साल की पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप भी देगी। इसके तहत ज्वार के अलावा चना, मूंगफली और अरहर के जीनोम का विश्लेषण करने वाले उपकरण विकसित करने पर काम होगा। कृषि क्षेत्र में गूगल की प्रौद्योगिकी को गुजरात सरकार के कृषि प्रगति फसल सूचना मंच में शामिल किया गया है।
इसके जरिये पिछले एक साल में राज्य के छह लाख से अधिक किसानों को 90 करोड़ से अधिक सलाह मोबाइल एसएमएस के जरिए दी गईं। इसके साथ ही, गूगल ने कहा कि मई से अब तक 80,000 से अधिक शिक्षकों को एआई के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया गया है। अब बिहार, मध्य प्रदेश, सिक्किम और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के साथ साझेदारी के जरिये गूगल एआई एडुकेटर कार्यक्रम का विस्तार किया जाएगा।
कंपनी शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 के अनुरूप मुफ्त ऑनलाइन प्रशिक्षण भी उपलब्ध करा रही है। यह फिलहाल अंग्रेजी में उपलब्ध है और हिंदी, मराठी, तेलुगु, असमिया, ओड़िया तथा पंजाबी संस्करण इसी महीने जारी किए जाने हैं। गूगल ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) की पढ़ाई में मदद के लिए 100 अटल टिंकरिंग लैब में ‘एटीएल साथी’ नामक जेमिनी आधारित डेस्कटॉप ऐप के जरिये सहयोग देने की भी घोषणा की है।
गूगल डॉट ओआरजी ने छोटे कारोबारों के लिए गैर-लाभकारी संगठन द/नज को 1.5 करोड़ डॉलर की वित्तीय मदद देने की भी घोषणा की। इससे सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को औपचारिक ऋण लेने, नए बाजार तलाशने और नियामकीय प्रक्रियाओं का पालन करने में मदद देने वाले एआई उपकरण विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा, छोटे शहरों में स्थानीय प्रतिभाओं को कौशल प्रशिक्षण देने और उन्हें छोटे कारोबारों से जोड़ने के लिए बहुभाषी, आवाज आधारित मंच भी विकसित किया जाएगा।