Gen Z revolution in Nepal: नेपाली संसद के सामने सरकार VS GenZ, फेसबुक-X-यूट्यूब को लेकर युवाओं ने क्यों बवाल काट दिया?

By अभिनय आकाश | Sep 08, 2025

हमारे पड़ोसी मुल्क नेपाल ने हाल ही में कुछ ऐसा काम कर दिया है कि दुनिया की निगाहें उसकी ओर खुद प खुद चली गई है। दुनिया में एक ओर जहां चीन, अमेरिका, रूस के बीच रस्साकस्सी चल रही है और सभी अपनी ताकत की आजमाइश में लगे हैं। भारत अमेरिका के साथ, भारत रूस के साथ, भारत चीन के साथ नए रिश्तों के आयाम तलाश रहा है। ऐसे में हमारे पड़ोसी मुल्क नेपाल ने एक कारनामा कर दिया। कारनामा ये कि उसने 26 सोशल मीडिया साइट्स को बैन कर दिया। इसमें फेसबुक, लिंकडइन, एक्स, यूट्यूब, व्हाट्सएप सब शामिल हैं। अब इतना बड़ा कदम उठा लिया गया। अब इतना बड़ा कदम उठाया गया तो इसकी प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है। नेपाल की राजधानी काठमांडू की सड़कों पर आज जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिली। हजारों की संख्या में जेन-जी लड़के और लड़कियां सड़कों पर उतर आए। आपको सिलसिलेवार ढंग से बताते हैं कि नेपाल में सरकार ने सोशल मीडिया को लेकर क्या फैसला लिया। फैसला लेने के पीछे की वजह क्या है, युवाओँ की नाराजगी की वजह क्या है? 

क्यों किए गए बैन ? 

दो हफ्ते पहले ही नेपाल के कोर्ट ने कहा था कि सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म को रजिस्टर होना ही चाहिए। सरकार का कहना है कि इसी फैसले के चलते दो दर्जन से ज्यादा प्लैटफॉर्म को कई बार रजिस्टर कराने के लिए कहा, उन्होंने नहीं किया, इसलिए ब्लॉक करना पड़ा। रजिस्ट्रेशन के बाद इन प्लैटफॉर्म के ऑपरेशन को बहाल कर दिया जाएगा।

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सरकार ने नोटिस जारी कर क्या कहा

नेपाल के सूचना एवं संचार मंत्रालय ने 2082.05.12 (नेपाली कैलेंडर के अनुसार) को एक पब्लिक नोटिस जारी कर सोशल मीडिया कंपनियों को सात दिन का समय दिया था। इस दौरान कंपनियों को मंत्रालय में रजिस्टर होना थ. उन्हें एक लोकल कॉन्टैक्ट पर्सन और कंप्लायंस ऑफिसर नियुक्त करना था और लोकल शिकायतों को संभालने के लिए मैकेनिज्म बनाना था। लेकिन तय समय में कंपनियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद नेपाल टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी को आदेश दिया गया कि ऐसे सभी प्लेटफॉर्म को नेपाल में ब्लॉक कर दिया जाए। हालांकि, अगर कोई कंपनी नियमों के अनुसार रजिस्ट्रेशन पूरा कर लेती है तो उसकी सेवाएं तुरंत बहाल कर दी जाएंगी।

अब सोशल मीडिया बैन के खिलाफ सड़कों पर युवा

केपी शर्मा ओली सरकार में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने के उनके हालिया कदम के खिलाफ नेपाल में जेन जेड एक बड़े विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहा है। ऑनलाइन शुरू हुआ यह विरोध सोमवार को सड़कों पर भी फैल गया, जहाँ प्रदर्शनकारियों की संसद के पास पुलिस से झड़प हो गई। सुरक्षा बलों ने जवाबी गोलीबारी की, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए। हज़ारों युवा प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू में 'जेन जेड क्रांति' नाम से एक प्रदर्शन किया। कई प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसकर पुलिस बैरिकेड्स तोड़ दिए। जैसे-जैसे झड़पें बढ़ती गईं, पुलिस ने कई जगहों पर गोलीबारी की, जिसके बाद अधिकारियों को राजधानी में कर्फ्यू लगाना पड़ा। प्रतिक्रियास्वरूप, प्रशासन ने संसद क्षेत्र तथा राजधानी के अन्य प्रमुख स्थानों पर कर्फ्यू लगा दिया, क्योंकि दिन के शुरुआती घंटों से ही स्थिति काफी अस्थिर हो गई थी। युवाओं के नेतृत्व में यह आंदोलन 4 सितंबर को सरकार द्वारा फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप और यूट्यूब सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ पंजीकरण न कराने के कारण ब्लॉक करने के निर्णय के बाद शुरू हुआ।  हालाँकि सरकार का दावा है कि यह प्रतिबंध नियामक अनुपालन का मामला है, लेकिन प्रदर्शनकारी इसे आलोचनात्मक आवाज़ों और संगठित असहमति को दबाने के उद्देश्य से की गई सीधी सेंसरशिप कार्रवाई मानते हैं।

नेपाल की संसद में घुसे प्रदर्शनकारी

सरकार द्वारा लगाए गए फ़ोन और इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद, जेनरेशन ज़ेड के कार्यकर्ताओं ने टिकटॉक और रेडिट जैसे वैकल्पिक प्लेटफ़ॉर्म का सहारा लिया। हज़ारों युवा प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए और सरकार और उसकी नीतियों के ख़िलाफ़ नारे लगाए। मार्च मैतीघर मंडला से शुरू हुआ और संसद भवन की ओर बढ़ा। जैसे ही प्रदर्शनकारी संसद के पास पहुँचे, पुलिस ने बैरिकेड लगा दिए, लेकिन गुस्साई भीड़ ने बैरिकेड तोड़ दिए, जिसके बाद अधिकारियों को आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और पानी की बौछारें करनी पड़ीं। अफरा-तफरी के बीच, कुछ प्रदर्शनकारी संसद परिसर में घुसने में कामयाब हो गए। ऑनलाइन प्रसारित हो रहे वीडियो और तस्वीरों में आँसू गैस के गोले हवा में लहराते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि प्रदर्शनकारी पुलिस पर टहनियाँ और पानी की बोतलें फेंक रहे हैं। विश्लेषकों का तर्क है कि 'जेन ज़ेड क्रांति' नाम का यह आंदोलन भ्रष्टाचार और आर्थिक असमानता के खिलाफ बढ़ते गुस्से से उपजा है। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के कदम ने अंतिम चिंगारी का काम किया, जिसने नेपाल के डिजिटल-प्रेमी युवाओं को ऑनलाइन जगहों से सड़कों पर उतरकर एक साहसिक और समन्वित प्रतिरोध प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।

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