सहयोगियों के सहारे 'सरकार', फिर से लौटने वाली है गठबंधन के दौर वाली राजनीति, 2024 के चुनावी बैटल को 10 प्वाइंट में समझें

By अभिनय आकाश | Jun 04, 2024

साल 1998 से पहले एनडीए बना। इस गठबंधन में 13 पार्टियां शामिल थीं। वहीं 2004 के चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए अस्तित्व में आया। यूपीए के दलों को 222 सीटें थी, इसके बावजूद वामपंथी दलों और सपा का बाहर से उसे समर्थन प्राप्त था। ये भारतीय राजनीति के गठबंधन का दौर था। कमोबेश यही स्थिति 2009 के चुनाव में भी देखने को मिली। लेकिन 2014 के चुनाव में मोदी लहर पर सवार बीजेपी की पतवार अपने बल पर 272 के जादुई आंकड़े को पार करने में कामयाब हो गई। 2019 में तो उसने अपने पिछले प्रदर्शन को पीछे छोड़ते हुए 300 के निशान को भी क्रॉस कर दिया। लेकिन 2024 के चुनाव में एनडीए के 300 के आंकड़े के आसपास मंडराने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीसरा कार्यकाल तय लग रहा है। इसके साथ ही ये दिन पुनर्जीवित विपक्ष का है, जिसने एग्जिट पोल द्वारा जताई गई मामूली उम्मीदों से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया। इसके साथ ही देश में एक बार फिर से गठबंधन के आसरे टिकी सरकार का दौर फिर से जीवंत होने वाला है। 

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1.) भाजपा अपने बूते पर 370 सीटों का लक्ष्य लेकर चल रही थी और एनडीए को 400 से अधिक सीटों का लक्ष्य दिया था। उत्तर प्रदेश में बीजेपी को काफी नुकसान उठाना पड़ा है, जहां से लोकसभा की 80 सीटें आती हैं। शाम 5 बजे के आसपास, बीजेपी 241 सीटों पर आगे है, एनडीए 296 सीटों पर आगे है। इंडिया ब्लॉक 228 सीटों पर आगे है, कांग्रेस 100 सीटों पर आगे है।

2.) बीजेपी के पावर गेम को उत्तर प्रदेश ने बिगाड़ कर रख दिया। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के दो लड़कों की जोड़ी ने यूपी की आधी सीटों पर अपनी बढ़त को मजबूत किया। बीजेपी का आंकड़ा पिछले बार की अपेक्षा करीब-करीब आधा का रह गया। बीजेपी गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में साल 2014 में 73 सीटें हासिल की थी। 2019 में भी सीटें पिछले बार के मुकाबले कुछ कम तो हुई लेकिन स्थिति नियंत्रण में ही रही। इस बार भी अधिकांश एग्जिट पोल ने पार्टी को बढ़त मिलने की भविष्यवाणी की थी। 

3.) चुनावी बैटल के अन्य दो राज्य भी बीजेपी के लिए मुफीद नहीं रहे। पार्टी की बड़ी उम्मीद बंगाल में 2019 से भी खराब प्रदर्शन होता नजर आया। 2019 के चुनाव में 18 सीटें जीतने वाली बीजेपी सिर्फ 11 सीटों पर बीजेपी लीड लेती देखी गई। । ऐसा प्रतीत होता है कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने अपनी खोई हुई ज़मीन वापस पा ली है और 31 सीटों पर आगे है।

4.) महाराष्ट्र ने शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में राजनीतिक पैंतरेबाजी के प्रति अपनी अस्वीकृति स्पष्ट कर दी है। उद्धव ठाकरे गुट 11 सीटों पर आगे है और शिंदे सेना 5 सीटों पर आगे है। एनसीपी का अजीत पवार गुट सिर्फ एक सीट पर आगे है और उनके चाचा शरद पवार 7 सीटों पर आगे हैं। भाजपा और कांग्रेस 12 और 11 सीटों के साथ आमने-सामने हैं।

5.) जैसी कि उम्मीद थी, भाजपा के नुकसान की भरपाई ओडिशा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और कुछ हद तक तेलंगाना से हो रही है।

6.) आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू 175 निर्वाचन क्षेत्रों में से 158 पर स्पष्ट बढ़त के साथ भारी जीत की ओर बढ़ रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि शपथ समारोह 9 जून को होगा। ओडिशा में बीजेपी नवीन पटनायक की बीजू जनता दल के 25 साल के शासन को खत्म करने की उम्मीद कर रही है।

7.) इस चुनाव में अभियान तीव्र और लंबा रहा है और मतदाताओं के मूड को समझना मुश्किल है। तीन एग्जिट पोल में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को 400 से ज्यादा का स्कोर मिलने की भविष्यवाणी की गई है। बाकी केवल एनडीए की जीत के अंतर में अंतर है।  विपक्ष ने निष्कर्षों को खारिज कर दिया है। देश में एग्जिट पोल को हमेशा मिश्रित सफलता मिली है।

8.) हर चुनाव की तरह, भाजपा ने अपनी दुर्जेय चुनाव मशीनरी को जल्दी ही सक्रिय कर दिया और एक स्टार-स्टडेड अभियान शुरू किया जो विकास, अर्थव्यवस्था और स्वतंत्रता की 100 वीं वर्षगांठ के दृष्टिकोण पर केंद्रित था। इसका समर्थन करने अनुच्छेद 370 को खत्म करना और अयोध्या राम मंदिर का निर्माण जैसे वादे पूरे किए गए थे।

9.) बड़ा अंतर सत्ताधारी गठबंधन के खिलाफ विपक्ष का आक्रामक रुख था, जो 2019 की एकजुटता की कमी से काफी दूर था। जबकि शुरुआत अस्थिर और कुछ हिस्सों में खराब थी। जैसे बंगाल में कांग्रेस बनाम तृणमूल और पंजाब में कांग्रेस बनाम आप - - संविधान में बदलाव और आरक्षण खत्म करने की कहानी ने प्रभाव डाला।

10.) सात चरणों में 543 लोकसभा सीटों के लिए मतदान हुआ, जो शनिवार को समाप्त हो गया। बहुमत का आंकड़ा 272 है। 

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