वादे और दावे तो बहुत होते हैं पर भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होना नहीं रोक पाईं सरकारें

By डॉ. रमेश ठाकुर | Dec 06, 2021

क्या अभ्यर्थियों की किस्मत में यही सब है। भर्ती परीक्षाओं में उनके साथ यूं ही खिलवाड़ होता रहेगा? महीनों मेहनत करेंगे और ऐन वक्त पर जालसाज पानी फेर देंगे? दरअसल यही तो होता आया है बीते कई वर्षों से। व्यवस्थाएं भी बदलीं, सत्ता परिवर्तन भी हुए, लेकिन कल और आज में कुछ खास नहीं बदला? उत्तर प्रदेश में मायावती, मुलायम सिंह, अखिलेश यादव की हुकूमतों से लेकर योगी आदित्यनाथ युग में भी स्थितियां कमोबेश एक जैसे ही रहीं, प्रश्नपत्रों में तब भी लीकेज होता था और अब भी है। कहावत है ‘नौ दिन चले ढाई कोस’, परिणाम वही ‘ढाक के तीन पात’! प्रश्नपत्रों को लीक करवाने में उत्तर प्रदेश में वर्षों से पनपा कुख्यात सिंडिकेट गिरोह एक्टिव मोड में है। बड़ी-छोटी शायद ही कोई ऐसी परीक्षाएं बचती हों, जिनमें ये सेंध न लगाते हों।

गौरतलब है कि प्रश्नपत्र लीक होने का ये पहला मामला नहीं है और अंतिम भी नहीं? शासन-प्रशासन के पास इस लीकेज पर लगाम का कोई अखिल भारतीय तरीका भी नहीं। घटनाओं के बाद ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां होना, आरोपियों को जेलों में डालना और कुछ समय बाद जमानत मिल जाना, ये तरीका इस बीमारी का विकल्प नहीं हो सकता? कुछ और मुकम्मल तरीका खोजना होगा। प्रश्नपत्रों को लीक करवाना जालसाजों का पुराना और खानदानी धंधा है। टीईटी परीक्षा लीक प्रकरण में अभी तक जितनी भी गिरफ्तारियां हुईं हैं, वह मोहरे मात्र हैं, बड़ी मछलियां अब भी जाल में नहीं फंसीं। उन तक पहुंचना आसान भी नहीं? दरअसल, इस गोरखधंधे में सफेदपोशों से लेकर और सिस्टम के भेड़िए भी जुड़े होते हैं। जाहिर है बिना उनके सहयोग से इतना बड़ा कांड करना संभव नहीं, सरकारी तंत्र के भीतरखाने एक बड़ा सिंडिकेट पनपा हुआ है जिसे भेदना जरूरी है। गिरफ्तार किए गए बदमाशों से एसटीएफ बहुत कुछ उगलवा चुकी है, अपने आकाओं के नाम भी खोल चुके हैं, लेकिन वह नाम शायद ही उजागर हों, अगर हो गए तो भयंकर सियासी तबाही मच जाएगी।  

परीक्षा रद्द होने के बाद अभ्यर्थियों से 26 दिसंबर को दोबारा परीक्षा ली जाएगी, जिसके लिए उनसे कोई अतिरिक्त शुल्क व बसों का किराया नहीं लिया जाएगा। पर, क्या ऐसा करने से अभ्यर्थियों ने जो खोया है उसकी भरपाई हो पाएगी? क्या कोई अंदाजा भी लगा सकता है कि कोरोना संकट के बीच उन्होंने किस कड़ी मेहनत से परीक्षा की तैयारियां की होंगी, कोचिंग में धन खर्च के अलावा अपना बहुमुल्य समय भी खपाया, उसका क्या होगा? उत्तर प्रदेश आबादी के लिहाज से बड़ा सूबा है। समूचे प्रदेश भर में 2554 केंद्रों पर टीईटी परीक्षाएं होनी थीं। सेंटरों के बाहर दूर-दूर से आए अभ्यर्थियों का जमावड़ा था। भविष्य को संवारने के लिए कितने अरमान लेकर घरों से निकले होंगे, परिजन भी अपने बच्चों की परीक्षा पास की ऊपर वाले से दुआएं मांग रहे थे। लेकिन किसी को क्या पता था कि परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा की जगह उनके साथ मजाक होने वाला है। टीईटी प्राथमिक स्तर की परीक्षा के लिए करीब साढ़े तेरह लाख और टीईटी उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा के लिए 8.93 लाख अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। समझ में नहीं आता इस अपराध को रोकना हुकूमतों के लिए क्यों चुनौती बना हुआ है?

देखा जाए तो प्रश्न पत्र बनाने का तरीका बेहद गुप्त होता है, परीक्षा की अंतिम रात तक प्रश्नों पत्रों को संरक्षित रखने की जिम्मेदारी परीक्षा नियामक प्राधिकारियों व सुरक्षाबलों के अधीन होती है। ये जिम्मेदारी चंद विश्वसनीय लोगों के कंधों पर होती है जिसमें कौन-कौन शामिल होते हैं उनकी जानकारियां विभागीय मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक को भी दी जाती हैं। इस दरम्यान कौन सेंध लगा सकता है, उसे दबोचना बहुत आसान होता है। बहरहाल, इस तंत्र में बड़ी मिलीभगत होती है। प्रश्नपत्र लीक प्रकरण की सफलता से कई लोग रातों-रात मालामाल हो जाते हैं। पेपर लीक कांड देश के विभिन्न हिस्सों में समय-समय पर होते रहते हैं। पर उत्तर प्रदेश में ये खेल सबसे ज्यादा खेला जाता है।

बदमाशों का ये खेल कितनी परीक्षाओं में सफल हुआ, जिसका हम-आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते। इनका तंत्र बड़ा जबरदस्त होता है, लेकिन जालसाज टीईटी परीक्षा में गच्चा खा गए। इससे पहले भी एकाध परीक्षाओं में ये लोग नाकाम रहे, जैसे 2017 में सब-इंस्पेक्टर पेपर लीक हुआ, 2018 में यूपीपीसीएल प्रश्नपत्र लीक हुआ, इसी वर्ष पुलिस भर्ती का भी पेपर आउट हुआ। कड़ी लंबी है। 2018 में ही अधीनस्थ सेवा पेपर, स्वास्थ्य विभाग प्रोन्नत पेपर, नलकूप आपरेटर पेपर, 41520 सिपाही भर्ती पेपर लीक हुआ। पिछले साल 69000 शिक्षक भर्ती पेपर लीक हुआ और अब यूपी टीईटी परीक्षा लीक हो गई। ये सिलसिला कब रुकेगा, किसी को नहीं पता? पर, इससे अभिभावकों और परीक्षार्थियों का मनोबल जरूर टूटता जा रहा है। इससे अच्छा तो पूर्व की असंवैधानिक व्यवस्था ही ठीक थी, जब घूस देकर आदमी नौकरी पा लेता था। हालांकि ऐसी व्यवस्थाओं का लोकतंत्र मान्यता नहीं देता और देनी भी नहीं चाहिए। कुल मिलाकर लीकेज के ये आंकड़े सामान्य नहीं हैं, इन्हें कतई नजरंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सिर्फ यूपी सरकार को ही नहीं, केंद्र सरकार से लेकर समूचे भारत के राज्यों को मिलकर ऐसा प्रयास करना चाहिए जिससे प्रतियोगी परीक्षा लीकेज प्रूफ हो सके। सतर्कता नहीं बरती गई तो लीकेज की घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रहेगी।

-डॉ. रमेश ठाकुर

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