By अंकित सिंह | Jun 26, 2023
कर्नाटक हाई कोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अपने फैसले में हाई कोर्ट ने कहा कि लड़ाई-झगड़े के दौरान किसी के अंडकोष को दबाना 'हत्या का प्रयास' नहीं माना जा सकता है। यह निर्णय ट्रायल कोर्ट के फैसले के विपरीत है, जिसने ऐसी घटना के संबंध में गंभीर चोट पहुंचाने के लिए 38 वर्षीय व्यक्ति को दोषी ठहराया था। साथ ही हाई कोर्ट ने आरोपी की सजा को सात साल कैद से घटाकर तीन साल कर दिया है। 38-वर्षीय आरोपी को निचली अदालत द्वारा सात साल कैद की सज़ा सुनाई गई थी।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ तौर पर कहा कि आरोपी का पीड़ित की हत्या करने का कोई इरादा नहीं था और पीड़ित को चोट झगड़े के दौरान लगी थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच मौके पर झगड़ा हुआ था। उस झगड़े के दौरान, आरोपी ने शिकायतकर्ता का अंडकोष दबोचने का चयन किया। इसलिए, यह नहीं कहा जा सकता है कि आरोपी हत्या करने के इरादे से या तैयारी के साथ आया था। अगर उसने (आरोपी ने) हत्या की तैयारी की होती या हत्या का प्रयास किया होता तो वह इसके लिए अपने साथ कुछ घातक हथियार ला सकता था। अदालत ने कहा कि आरोपी ने पीड़ित को गंभीर चोट पहुंचाई है और इसके कारण पीड़ित की मृत्यु हो सकती थी, लेकिन आरोपी का इरादा ऐसा कतई नहीं था।
न्यायमूर्ति के नटराजन ने अपने हालिया फैसले में कहा है, यद्यपि आरोपी ने शरीर के महत्वपूर्ण अंग ‘अंडकोष’ को दबोचने का निर्णय लिया, जो मौत का कारण बन सकता है। (इस घटना के बाद) घायल को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी सर्जरी भी की गई और अंडकोष को हटा दिया गया, जो एक गंभीर जख्म है। इसलिए, मेरी नजर में, यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी ने कुत्सित इरादे या तैयारी के साथ हत्या का प्रयास किया था। आरोपी द्वारा पहुंचाई गई चोट भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 324 के तहत अपराध की श्रेणी में आएगी, जो शरीर के महत्वपूर्ण ‘गुप्तांग’ को चोटपहुंचाने से संबंधित है।’’