Ishwar Chandra Vidyasagar Death Anniversary: बंगाल की कुरीतियों को मिटाने वाले महान Social Reformer, जिनकी विरासत आज भी है प्रेरणा

By अनन्या मिश्रा | Jul 29, 2026

19वीं सदी के महान दार्शनिक, समाज सुधारक, शिक्षाविद और लेखक ईश्वर चंद्र विद्यासागर का 29 जुलाई को निधन हो गया था। उन्होंने भारत में विधवा विवाह कानून बनवाने में अहम योगदान दिया था। उनको सामाजिक योगदान के लिए भारत के महान समाज सुधारकों में गिना जाता है। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर ईश्वर चंद्र विद्यासागर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में... 

इसे भी पढ़ें: Chandrashekhar Azad Birth Anniversary: 'आजाद' रहे और 'आजाद' ही मरे, वो वीर जिसे जीते जी कोई नहीं पकड़ सका

कुरीतियों के खिलाफ उठाई आवाज

वैसे तो पूरे भारत में 19वीं सदी में महिलाओं की स्थिति बेहद बुरी थी। लेकिन बंगाल में हालात काफी ज्यादा खराब थे। यहां पर काफी धार्मिक कुरीतियां थीं, जो हिंदू समाज में कलंक की तरह थीं। सती प्रथा पर कानून बन चुका था, लेकिन बाल विवाह और विधवाओं पर होने वाले अत्याचार बदस्तूर जारी थी।

विधवा विवाह के लिए प्रस्ताव

विधवा विवाह के लिए किए गए विद्यासागर के प्रयासों को आज भी सराहा जाता है। उन्होंने तत्कालीन सरकार को एक याचिका दी, जिसमें विधवाओं के पुनर्विवाह के लिए कानून बनाने की मांग की। साल 1856 में उनकी कोशिशें रंग लाईं और विधवा पुनर्विवाह कानून पारित हुआ। लेकिन इसके बाद भी लोगों में इस कानून के प्रति जागरुकता नहीं दिखी, तो उन्होंने दोस्त की शादी 10 साल की विधवा से कराई। इसके बाद अपने बेटे की शादी भी विधवा से करा दी।

नारी उत्थान के लिए प्रयास

ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा और समाज में स्थान दिलाने के लिए लगातार कोशिशें की। नारी शिक्षा के लिए की गई उनकी कोशिशों को आज भी याद किया जाता है।

मृत्यु

वहीं 29 जुलाई 1891 को ईश्वर चंद्र विद्यासागर का निधन हो गया था।

प्रमुख खबरें

RSS शिक्षा प्रकोष्ठ Vidya Bharati पश्चिम बंगाल के सभी 345 प्रखंडों में खोलेगी स्कूल

Madhya Pradesh में 30 करोड़ के विवाह सहायता घोटाले में पूर्व CEO Shobhit Tripathi गिरफ्तार

Bengal में नदी कटाव रोकने को IIT Kanpur की मदद से बनेगी योजना

US में भारतीय राजदूत Vinay Mohan Kwatra ने सांसदों से Ukraine संकट और द्विपक्षीय ऊर्जा सहयोग पर की चर्चा