GST के आठ साल पूरे, राहुल गांधी बोले- यह आर्थिक अन्याय और कॉर्पोरेट भाईचारे का क्रूर हथियार

By अंकित सिंह | Jul 01, 2025

भारत सरकार द्वारा हर साल 1 जुलाई को मनाया जाने वाला जीएसटी दिवस, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के औपचारिक रूप से लागू होने की आठवीं वर्षगांठ का प्रतीक है। देश के सबसे बड़े कर सुधारों में से एक, जीएसटी की शुरूआत ने भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को एक सुव्यवस्थित कर संरचना में एकीकृत करने में मदद की। जीएसटी के शुभारंभ के दिन का उपयोग जीएसटी ढांचे के बारे में जागरूकता और अनुपालन को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि एक “अच्छा और सरल कर” का वादा किया गया था। इसके बजाय, भारत को अनुपालन का दुःस्वप्न और पाँच-स्लैब कर व्यवस्था मिली, जिसमें 900 से अधिक बार संशोधन किया गया है। यहाँ तक कि कारमेल पॉपकॉर्न और क्रीम बन भी इसके भ्रम के जाल में फँस गए हैं। उन्होंने आगे लिखा कि नौकरशाही की भूलभुलैया बड़े कॉरपोरेट्स के पक्ष में है, जो एकाउंटेंट की सेना के साथ इसकी खामियों को दूर कर सकते हैं, जबकि छोटे दुकानदार, एमएसएमई और आम व्यापारी लालफीताशाही में डूबे हुए हैं। जीएसटी पोर्टल दैनिक उत्पीड़न का स्रोत बना हुआ है।

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राहुल ने कहा कि भारत के सबसे बड़े रोजगार सृजक एमएसएमई को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। आठ साल पहले जीएसटी लागू होने के बाद से 18 लाख से अधिक उद्यम बंद हो गए हैं। नागरिक अब चाय से लेकर स्वास्थ्य बीमा तक हर चीज़ पर जीएसटी का भुगतान करते हैं, जबकि कॉरपोरेट सालाना 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक कर छूट का आनंद लेते हैं।

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