गुकेश का कठिन साल: लंबी यात्राएं, लगातार हार और 2026 विश्व शतरंज खिताब बचाने की चुनौती

By Ankit Jaiswal | Nov 09, 2025

भारतीय शतरंज के मौजूदा विश्व चैंपियन गुकेश इन दिनों एक बेहद कठिन दौर से गुजर रहे हैं। महज 22 साल की उम्र में विश्व शिखर पर पहुंचने वाले इस युवा खिलाड़ी का 2025 का साल उम्मीदों के मुताबिक नहीं बीत रहा है। ग्रीस के रोड्स में यूरोपियन क्लब चैम्पियनशिप में दोहरा स्वर्ण जीतने के बाद उन्होंने अमेरिका के सेंट लुइस में क्लच चैम्पियनशिप में हिस्सा लिया, जहां उनका सामना मैग्नस कार्लसन, हिकारू नाकामुरा और फबियानो करूआना जैसे दिग्गजों से हुआ। हालांकि गुकेश ने कई शानदार चालें चलीं, लेकिन वे एक भी जीत दर्ज नहीं कर पाए और आखिरी स्थान पर रहे हैं।

गौरतलब है कि गुकेश का यह फैसला महज प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं, बल्कि खुद को निरंतर परखने की मानसिकता का नतीजा है। वे पिछले चैंपियन डिंग लिरेन से बिल्कुल अलग राह पर चल रहे हैं। 2022 में विश्व खिताब जीतने के बाद डिंग के प्रदर्शन पर कई सवाल उठे थे, वहीं गुकेश लगातार खेलकर अपनी तैयारी और जज़्बे को साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इसी लगन ने कभी-कभी उन्हें नुकसान भी पहुंचाया है और 2025 में मिले निराशाजनक नतीजों ने उनके खिताब बचाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, गुकेश ने इस साल की शुरुआत टाटा स्टील शतरंज टूर्नामेंट से की थी, जहां वे लगभग खिताब जीतने के करीब थे। लेकिन आखिरी दिन अर्जुन एरिगैसी से मिली हार ने उनकी उम्मीदें तोड़ दीं और टाईब्रेक में प्रज्ञानानंदा ने खिताब अपने नाम कर लिया। इस हार ने गुकेश को गहराई से झकझोर दिया। इसके बाद खेले गए "फ्रीस्टाइल" टूर्नामेंटों में भी उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। सोशल मीडिया पर आलोचनाएं बढ़ीं और कुछ दिग्गजों ने उनकी विश्व चैंपियन की हैसियत पर सवाल उठाए। मैग्नस कार्लसन के तंज भरे बयान ने माहौल और गर्म कर दिया।

हालांकि नॉर्वे शतरंज 2025 में गुकेश ने शानदार वापसी की थी। उन्होंने हिकारू नाकामुरा और खुद मैग्नस कार्लसन को हराया। कार्लसन के अपने घर स्टावेंगर में मिली यह हार उनके लिए चुभने वाली रही। यह जीत भारतीय प्रशंसकों के लिए एक गर्व का पल थी, लेकिन गुकेश तीसरे स्थान पर रहकर टूर्नामेंट जीतने से चूक गए।

इसके बाद उनके खराब प्रदर्शन का सिलसिला फिर जारी रहा। ग्रैंड स्विस 2025 में वे 41वें स्थान पर रहे, जबकि विश्व कप के तीसरे राउंड में फ्रेडरिक स्वाने से हारकर बाहर हो गए। बताया जाता है कि उस मैच में वे तीन बार की दोहराव से ड्रॉ ले सकते थे, मगर जीत की कोशिश में उन्होंने गलत कदम उठा लिया। यह दौर गुकेश के लिए सबक साबित हो सकता है। आक्रामकता और अति-आत्मविश्वास के बीच की रेखा बहुत पतली होती है, और जब खिलाड़ी लय से बाहर हो, तो यही संतुलन सबसे पहले टूटता है।

बता दें कि अब तक इतिहास में केवल 18 विश्व शतरंज चैंपियन हुए हैं, जिनमें से केवल 10 ने अपना खिताब बचाया है। 21वीं सदी में यह कारनामा सिर्फ विश्वनाथन आनंद और मैग्नस कार्लसन ने किया है। आने वाला साल गुकेश के करियर की सबसे बड़ी परीक्षा होने जा रहा है। अगर वे 2026 में अपने खिताब की रक्षा कर पाए, तो यह भारतीय खेल इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाएगी। लेकिन फिलहाल की स्थिति को देखते हुए यह सफर बेहद चुनौतीपूर्ण नज़र आ रहा है।

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