जानें क्यों गुरु दत्त ने 39 वर्ष की उम्र में लगाया था मौत को गले

By रितिका कमठान | Oct 10, 2022

हिंदी फिल्म सिनेमा को नई पहचान के साथ मजबूत आधार देने वाले दिग्गज कलाकार गुरु दत्त की फिल्मों को वर्षों बाद आज भी सिनेमा के स्कूल के तौर पर देखा जाता है। फिल्मों की पढ़ाई करने वाले कई छात्र उनकी फिल्मों से कई बातें सीखते है। गुरु दत्त सिर्फ फिल्म अभिनेता नहीं बल्कि लेखक, निर्देशक और फिल्म निर्माता के साथ पूरा पैकेज थे। गुरु दत्त ने 'कागज के फूल', 'प्यासा', 'मिस्टर एंड मिसेज 55', 'बाज', 'जाल', 'साहिब बीबी और गुलाम' जैसी शानदार फिल्मों को बनाया, जो आज के समय में भी क्लासिक फिल्में मानी जाती है।

फिल्म जगत में शायद ही कोई जो गुरु दत्त के नाम से वाकिफ ना हो। मगर कम ही लोगों को मालूम है कि उनका असल नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था। उनका कर्नाटक में जन्म हुआ था। मूल तौर पर वो ब्रह्माण परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता हैडमास्टर और बैंकर थे जबकि उनकी माता शिक्षिका और लेखिका थी। गुरु दत्त का बचपन कोलकाता में बिता, ऐसे में वो बंगाली सभ्यता से काफी परिचित थे। बांग्ला भाषा पर भी उनकी दमदार पकड़ थी।

वहीदा रहमान को दे बैठे थे दिल

गुरु दत्त ने अपने करियर के दौरान सिर्फ आठ फिल्मों का निर्देशन किया था। उनकी द्वारा निर्देशित की गई फिल्में आज भी आइकॉनिक मानी जाती है। जानकारी के मुताबिक गुरु दत्त की शादी गीता दत्त से हुई थी। मगर शादी के चार वर्षों के बाद ही वो वहीदा रहमान को दिल दे बैठे थे। ये पता चलने के बाद गीता दत्त ने बच्चों के साथ घर छोड़ दिया था और गुरु दत्त बिलकुल अकेले हो गए थे। इस अकेलेपन को दूर करने के लिए उन्होंने शराब का सहारा लिया था। तनाव के दौरान उन्होंने दो बार पहले भी आत्महत्या की कोशिश की थी।

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मात्र 39 वर्ष में कहा दुनिया को अलविदा

गुरु दत्त अपने जीवन के अंतिम समय में काफी अकेले पड़ गए थे। उन्होंने अपना अकेलापन दूर करने के लिए शराब की लत को अपनाया। हालांकि इस लत के कारण वर्ष 1964 में 10 अक्टूबर को उनका निधन हो गया था। मुंबई के पेड्डर रोड स्थित उनके घर में उनकी लाश मिली थी। कहा जाता है कि रात में उन्होंने काफी शराब पी थी और नींद की गोलियों का सेवन किया था, जिस कारण उनकी मौत हुई थी। हालांकि आजतक उनकी मौत के कारण को लेकर कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है।

खास विजन के लिए किए जाते हैं याद

फिल्म जानकारों का कहना है कि गुरु दत्त हमेशा समय से आगे सोचते थे। उस समय में उन्होंने जिस तरह की फिल्मों का निर्देशन किया और जिस क्रिएटिविटी के साथ वो आगे बढ़े ऐसा करना सिर्फ उनके लिए ही संभव था। 

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