By रेनू तिवारी | Jun 04, 2026
सोने के आभूषणों की तरह अब जल्द ही देश में चांदी के गहने, बर्तन और कलाकृतियां (Artefacts) खरीदना भी पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद होने जा रहा है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग को चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य (Mandatory) बनाने के लिए एक मजबूत नियामक ढांचे और बुनियादी तैयारियों पर काम कर रहा है। इस बात की जानकारी बीआईएस के महानिदेशक संजय गर्ग ने उद्योग निकाय फिक्की (FICCI) के एक कार्यक्रम के दौरान दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि चांदी के बाजार का स्वरूप सोने से काफी अलग और व्यापक है, इसलिए इसे लागू करने से पहले हर बारीकी का अध्ययन किया जा रहा है।
गर्ग ने बताया कि सोने के विपरीत, चांदी के आभूषण और वस्तुएं छोटी व बड़ी दोनों तरह की दुकानों में बिकती हैं। इसमें चांदी के ‘फर्नीचर’ जैसी श्रेणियां भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ हम इसे लागू करने की प्रक्रिया का अध्ययन कर रहे हैं।’’ गर्ग ने बताया कि बीआईएस में हॉलमार्किंग का पूरा संचालन केवल पांच लोगों द्वारा किया जाता है जबकि बाकी कार्यबल निजी या ‘आउटसोर्स’ होता है। उन्होंने कहा, ‘‘ निजी भागीदारी के साथ हॉलमार्किंग केंद्रों का संचालन करना और विश्वास कायम करना एक बेहद बड़ी चुनौती है।’’ चांदी की स्वैच्छिक हॉलमार्किंग में प्रगति के बावजूद बीआईएस सावधानी बरत रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘ हम जानबूझकर थोड़ा धीमे चल रहे हैं ताकि कोई गलती न हो। अनिवार्य करने से पहले हम व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करना चाहते हैं।’’ गर्ग ने कहा, ‘‘ हम चांदी की हॉलमार्किंग को चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य करेंगे।’’ आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में हॉलमार्क किए गए चांदी के आभूषणों की संख्या बढ़कर 59 लाख हो गई जो 2024-25 में 32 लाख थी। बीआईएस द्वारा वर्तमान में मान्यता प्राप्त लगभग 230 परख एवं हॉलमार्किंग केंद्र (एएचसी) चांदी के आभूषणों की जांच के लिए कार्यरत हैं।