Jakhu Temple: Shimla के Jakhu Temple में आज भी मौजूद हैं Hanuman के पदचिन्ह, संजीवनी से जुड़ा है गहरा रहस्य

By अनन्या मिश्रा | Mar 26, 2026

देवभूमि हिमाचल की सुंदरता और कई चमत्कारी मंदिरों के कारण यह देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहां पर कई देवी-देवताओं के मंदिर स्थित हैं। जो किसी मान्यता की वजह से आस्था के केंद्र बने हुए हैं। इन्हीं मंदिरों में शिमला का जाखू मंदिर भी शामिल है। यह मंदिर शिमला की सबसे ऊंची चोटी, जिसकी ऊंचाई 2,438 मीटर है पर स्थित है। इस मंदिर में बजरंगबली हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है। इस मंदिर को विश्व की सबसे बड़ी मूर्ति के लिए जाना जाता है।

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इस स्थान पर किया था विश्राम

पौराणिक मान्यता के मुताबिक जब युद्ध के दौरान लक्ष्मण जी मेघनाथ की शक्ति बाण से मूर्छित हो गए थे। तो उनको बचाने के लिए हनुमान जी हिमालय से संजीवनी बूटी लेने के लिए गए थे। इस दौरान हनुमान जी की नजर जाखू पहाड़ी पर पड़ी। यहां पर यक्ष ऋषि तपस्या कर रहे थे। तब संजीवनी बूटी की जानकारी लेने और विश्राम के लिए हनुमानजी जाखू पहाड़ी पर उतरे थे। हनुमान जी के पैर रखने से यह पहाड़ी धंस गई थी। इस कारण आज भी ऊपर से जाखू पहाड़ी चपटी दिखती है।

जब हनुमान जी वापस जाने लगे, तो लौटते समय उन्होंने यक्ष ऋषि से दर्शन देने का वचन दिया। लेकिन कालनेमि राक्षस से युद्ध के कारण ऋषि को दर्शन नहीं दिए। ऋषि के व्याकुल होने पर हनुमान जी ने दर्शन दिए। जिसके बाद जाखू पहाड़ी पर हनुमान जी की एक स्वयंभू मूर्ति प्रकट हुई और ऋषि ने हनुमान जी का मंदिर बनवाया। बताया जाता है कि जाखू मंदिर में आज भी हनुमान जी के पैरों के निशान सुरक्षित है। मंदिर में भक्त पहाड़ी जी के पदचिन्हों की पूजा-अर्चना करते हैं और उनकी कृपा पाते हैं।

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