सुहागिनों के साथ ही कुंवारी कन्याओं के लिए भी बहुत महत्व वाला पर्व है हरियाली तीज

By शुभा दुबे | Jul 31, 2022

हरियाली तीज का पर्व श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इसे श्रावणी तीज भी कहा जाता है। स्त्रियों के इस प्रमुख त्योहार की धूम उत्तर भारत में खासतौर पर दिखाई देती है। इस पर्व के आने से पहले ही घर−घर में झूले पड़ जाते हैं। नारियों के समूह गीत गाते हुए झूला झूलते दिखाई देते हैं। अब तो शहरों में जगह-जगह तीज मेले भी लगते हैं। विशेष रूप से कोरोना का प्रभाव कम होने के बाद इस बार के तीज मेलों के प्रति महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। बाजारों में खरीदारी की रौनक है तो मेहंदी लगाने वाले भी व्यस्त नजर आ रहे हैं। हलवाइयों ने भी तरह-तरह के पकवान बनाये हैं ताकि तीज का मजा और बढ़ जाये।

इसे भी पढ़ें: प्रकृति से जुड़ाव और उल्लास का पर्व है श्रावणी तीज

यह त्योहार भारतीय परम्परा में पति पत्नी के प्रेम को और प्रगाढ़ बनाने तथा आपस में श्रद्धा और विश्वास पैदा करने का त्योहार है। इस दिन कुआंरी कन्याएं व्रत रखकर अपने लिए शिव जैसे वर की कामना करती हैं। विवाहित महिलाएं अपने सुहाग को भगवान शिव तथा पार्वती से अक्षुण्ण बनाए रखने की कामना करती हैं। इस तीज पर निम्न बातों को त्यागने का विधान है− पति से छल कपट, झूठ बोलना एवं दुर्व्यवहार तथा परनिन्दा। कहते हैं कि इस दिन गौरी विरहाग्नि में तपकर शिव से मिली थीं। इस दिन राजस्थान में राजपूत लाल रंग के कपड़े पहनते हैं। माता पार्वती की सवारी निकाली जाती है। राजा सूरजमल के शासन काल में इस दिन कुछ पठान कुछ स्त्रियों का अपहरण करके ले गये थे, जिन्हें राजा सूरजमल ने छुड़वाकर अपना बलिदान दिया था। उसी दिन से यहां मल्लयुद्ध का रिवाज शुरू हो गया।

इस पर्व को बुन्देलखंड में हरियाली तीज के नाम से व्रतोत्सव के रूप में मनाते हैं तो पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे कजली तीज के रूप में मनाने की परम्परा है। राजस्थान के लोगों के लिए त्यौहार जीवन का सार है खासकर राजधानी जयपुर में इसकी अलग ही छटा देखने को मिलती है। यदि इस दिन वर्षा हो, तो इस पर्व का आनंद और बढ़ जाता है। राजस्थान सहित उत्तर भारत में नवविवाहिता युवतियों को सावन में ससुराल से मायके बुला लेने की परम्परा है। सभी विवाहिताएँ इस दिन विशेष रूप से श्रृंगार करती हैं। सायंकाल सज संवरकर सरोवर के किनारे उत्सव मनाती हैं और कजली गीत गाते हुए झूला झूलती हैं।

इसे भी पढ़ें: इस दिन रखा जाएगा हरियाली तीज व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

बताया जाता है कि जयपुर के राजाओं के समय में पार्वती जी की प्रतिमा, जिसे 'तीज माता' कहते हैं, को एक जुलूस उत्सव में दो दिन तक ले जाया जाता था। उत्सव से पहले प्रतिमा का पुनः रंगरोगन किया जाता है और नए परिधान तथा आभूषण पहनाए जाते हैं इसके बाद प्रतिमा को जुलूस में शामिल होने के लिए लाया जाता है। हजारों लोग इस दौरान माता के दर्शनों के लिए उमड़ पड़ते हैं। शुभ मुहूर्त में जुलूस निकाला जाता है। सुसज्जित हाथी और बैलगाड़ियां इस जुलूस की शोभा को बढ़ा देते हैं।

-शुभा दुबे

प्रमुख खबरें

Pakistan के Balochistan में दोहरा Attack, विद्रोही समूहों ने नसीराबाद में हमलों की जिम्मेदारी ली

Balochistan में फिर जबरन गुमशुदगी, Human Rights संस्था PAANK ने Pakistan पर उठाए गंभीर सवाल

Keralam में Priyanka Gandhi का LDF सरकार पर बड़ा हमला, बोलीं- युवा Jobs के लिए पलायन को मजबूर

पूर्व राजनयिक KP Fabian ने US को दिखाया आईना, बोले- यह अहंकार और बेहद दुर्भाग्यपूर्ण