पंजाब में प्रवासी मजदूरों के खिलाफ घृणा अभियान जोरों पर

By राकेश सैन | Sep 18, 2025

पंजाब में दूसरे राज्यों से आए मजदूरों का उड़ाया जाने वाला उपहास अब उनके विरोध यहां तक कि उन्हें पंजाब से बाहर करने की मांग तक पहुंच गया है। इन मजदूरों से खैनी-गुटका खाने से लेकर हर छोटे-मोटे अपराधों से इनका नाम जोड़ कर और बाहरी राज्यों से आए अपराधी किस्म के लोगों द्वारा किए गए घिनौने कृत्यों की आड़ में प्रदेश में घृणा अभियान चलाया जा रहा है।

पंजाब में इन दिनों सोशल मीडिया पर बाहरी राज्यों से आए इन मजदूरों के खिलाफ घृणा अभियान चलाया जा रहा है, जिनमें मेहनती मजदूरों की छवि को अपराधिक बना कर पेश किया जा रहा है। इन मजदूरों के खिलाफ विषवमन करने वालों में कनाडा, अमेरिका, इटली, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया में बैठे अलगाववादी लोग सबसे आगे हैं। इसी के चलते पंजाब में प्रवासी मजदूरों के साथ हो रहे दुव्र्यवहार की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। उत्तर प्रदेश और बिहार से आए प्रवासी मजदूरों को गाँवों में काम करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी ने विधानसभा चुनाव प्रचार अभिचान में उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले प्रवासी मजदूरों को अपमानजनक अर्थ में ‘भैया’ कहा था। दुखद बात यह है कि उस समय मंच पर मौजूद पार्टी की नेता प्रियंका गांधी ने चन्नी के इस शर्मनाक ब्यान पर तालियां बजाई थीं। ऐसा ही एक मामला आया है मोहाली से, जहाँ एक गाँव से प्रवासी मजदूरों को भगाया गया। मोहाली जिले के जंडपुर गाँव में प्रवासी मजदूरों को घर किराए पर लेने की अनुमति नहीं है। गाँव में उनके लिए 11 तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिनमें रात 9 बजे के बाद बाहर जाने पर प्रतिबंध, धूम्रपान और तम्बाकू चबाने पर पाबंदी, और उनके कपड़ों को लेकर सख्त नियम शामिल हैं। गाँव के गुरुद्वारा कमेटी ने यह फैसला लिया कि प्रवासी मजदूर अब गाँवों में नहीं रह सकते। इसी साल अगस्त में मुंडो संगतियां गाँव से प्रवासी मजदूरों को निकालने का सिलसिला शुरू हुआ। जब मजदूरों को काम से निकाल कर गाँव से बाहर कर दिया गया, तो यह मामला पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय तक पहुँचा। वैभव वत्स नामक एक व्यक्ति ने प्रवासी मजदूरों को अवैध रूप से निकालने के खिलाफ याचिका दायर की, जिससे यह मामला कानूनी चर्चा में आया।

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दूसरी तरफ, प्रवासी मजदूरों का दर्द है कि वे अपनी मेहनत से पैसे कमाते हैं, लेकिन उन्हें यहां सम्मान नहीं मिलता। मजदूरों को भैया कहकर अपमानित किया जाता है और उनके सांवले रंग के कारण उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ता है। लुधियाना, जालन्धर, अमृतसर जैसे उद्योगिक नगरों में अपराधी तत्व आटो चालकों, रेहड़ी-फड़ी वालों, फेरी वालों को अकेला देख कर लूट लेते हैं। वेतन वाले दिन यह श्रमिक इन अपराधी तत्वों का विशेष लक्ष्य होते हैं और फैक्ट्री से घर जाते समय इनको रास्ते में लूट लिया जाता है। पुलिस प्रशासन इनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं देता और कई बार तो प्राथमिकी भी दर्ज नहीं की जाती। बहुत सी श्रमिक बस्तियां सडक़, बिजली, पानी, सीवरेज जैसे मौलिक सुविधाओं से वंचित हैं और इन श्रमिकों को नारकीय जीवन जीना पड़ रहा है। राजनीतिक दल बहला फुसला कर इनसे वोटें तो हासिल कर लेते हैं परंतु असंगठित होने के  कारण इनकी मांगों पर गौर तक नहीं किया जाता। समय की मांग है कि आपराधिक कृत्यों पर सख्त कार्रवाई करते हुए श्रमिक वर्ग के खिलाफ अभियान चलाने वाली शक्तियों के खिलाफ सख्ती से पेश आया जाए और पंजाब में निवास कर रहे बाहरी राज्यों के श्रमिकों को पूरी सुरक्षा व नागरिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं।

प्रदेश में चले इस अभियान को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि प्रदेश पिछले कई दशकों से अलगाववाद की आग में जल रहा है। बिखराव की इस आंच में अलाव डालने का काम देश-विदेश में बैठी समाज विरोधी शक्तियां कर रही हैं। सोशल मीडिया पर चल रहे इस अभियान के एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम हैण्डलरों के थ्रेड ही चेक कर लिए जाएं तो सारी स्थिति स्पष्ट हो जाती है कि इसके पीछे कौन हैं। 

- राकेश सैन

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