Famous Temple: Assam का Hayagriva Temple, जहां कछुए चढ़ाने से पूरी होती है मन्नत, जानिए अनोखी परंपरा

By अनन्या मिश्रा | Feb 25, 2026

भारत के असम राज्य के कामरूप जिले के हाजों में भगवान विष्णु को समर्पित एक मंदिर है। इस मंदिर का नाम श्री हयग्रीव माधव मंदिर है। जोकि भगवान श्रीहरि विष्णु के 'हयग्रीव' अवतार यानी की घोड़े के सिर वाले अवतार की पूजा होती है। यह मंदिर न सिर्फ अपनी वास्तुकला बल्कि अनोखी परंपरा के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है। यह मंदिर मणिकूट पर्वत पर बना है। श्री हयग्रीव माधव मंदिर हिंदू और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए कई सदियों से आस्था का बड़ा केंद्र रहा है। इस मंदिर की खास बात यह है कि श्रद्धालु भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए कछुए का चढ़ावा करते हैं।


मंदिर का पौराणिक महत्व

इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक यहां पर भगवान विष्णु के 'हयग्रीव' अवतार की पूजा की जाती है। माना जाता है कि जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु ने इस स्थान पर मधु-कैटभ दोनों राक्षसों का वध किया था।

इसे भी पढ़ें: Shiv Khori Mandir: Vaishno Devi के पास महादेव का चमत्कार, इस Divine Cave में होता है भोलेनाथ का प्राकृतिक अभिषेक


वर्तमान मंदिर का निर्माण 1583 में कोच राजा रघुदेव नारायण द्वारा कराया गया था। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि यह 100 साल से भी ज्यादा प्राचीन काल के ध्वस्त मंदिर का पुनर्निर्मित हैं। श्री हयग्रीव माधव मंदिर पत्थरों का बना है और मंदिर की दीवारों पर हाथियों और अन्य पौराणिक आकृतियों की सुंदर नक्काशी की गई है।


कछुए अर्पित करने की परंपरा

इस मंदिर की विशेषता यहां का 'माधव पुखुरी' है। इस तालाब में सैकड़ों की संख्या में दुर्लभ प्रजाति के कछुए रहते हैं। परंपरा है कि भक्त अपनी इच्छा पूरी होने पर या भगवान को श्रद्धा अर्पित करने के लिए कछुओं को भोजन कराते हैं या फिर तालाब में कछुए छोड़ते हैं। कछुओं को भगवान का एक रूप माना जाता है। वहीं स्थानीय लोग इन कछुओं की सुरक्षा का खास ध्यान रखते हैं और इनको कभी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।


बौद्ध धर्म से जुड़ाव

इस मंदिर की एक और खासियत यह है कि यहां सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि भारी संख्या में बौद्ध अनुयायी भी आते हैं। तिब्बती बौद्धों का मानना है कि यह वह जगह है, जहां भगवान बुद्ध ने निर्वाण की प्राप्ति की थी। जिस कारण बौद्ध समुदाय के लोग इस मंदिर को बेहद पवित्र मानते हैं और वह इसको 'महामुनी' का मंदिर कहते हैं।


श्री हयग्रीव माधव मंदिर की संस्कृति, धर्म और वन्यजीव संरक्षण का एक अनूठा उदाहरण है। यहां की शांति और सदियों पुरानी परंपराएं इसको भारत के अन्य मंदिरों से अलग बनाती हैं। ऐसे में अगर आप असम आते हैं, तो हाजो के इस चमत्कारी मंदिर के दर्शन करना एक यादगार अनुभव हो सकता है।

All the updates here:

प्रमुख खबरें

Arijit Singh का संन्यास के बाद पहला संदेश, अधूरे गाने अभी आते रहेंगे, फैंस के लिए लिखा इमोशनल नोट

Donald Trump का बड़ा दावा, अगर मैं नहीं रोकता, तो भारत-पाक युद्ध में मारे जाते 3.5 करोड़ लोग

Karnataka: नफरत फैलाने वाले भाषण का आरोप! Basanagouda Patil Yatnal के खिलाफ FIR, शिवाजी जयंती पर दी थी विवादित टिप्पणी

हेक्सागन गठबंधन के अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक मायने समझिए