By अभिनय आकाश | Jul 09, 2025
मद्रास हाई कोर्ट ने चेन्नई निगम आयुक्त जे कुमारगुरुबरन को रॉयपुरम में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहने के लिए कड़ी फटकार लगाई, भले ही उसके पहले के निर्देश न दिए गए हों। अदालत ने अधिकारी की खिंचाई करते हुए पूछा कि क्या वह सोचते हैं कि एक आईएएस अधिकारी होने के नाते वह अदालत से ऊपर हैं। हाई कोर्ट की एक पीठ ने कुमारगुरुबरन पर उनकी निष्क्रियता के लिए एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया और आदेश दिया कि यह राशि उनके वेतन से काटकर अड्यार कैंसर अस्पताल को सौंप दी जाए। यह आदेश चेन्नई के वकील रुक्मंगथन द्वारा दायर अदालत की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण (सीएमडीए) के पूर्व सदस्य सचिव अंशुल मिश्रा को भी अदालत ने अपने वेतन से दो वृद्ध याचिकाकर्ताओं, आर ललिताभाई और केएस विश्वनाथन को 25,000 रुपये का मुआवज़ा देने का निर्देश दिया। दो भाई-बहनों ने एक मामले में अवमानना याचिका दायर की थी, जिसमें चेन्नई में नेसापक्कम रोड से सटी उनकी 17 सेंट ज़मीन 1983 में तमिलनाडु हाउसिंग बोर्ड के आवासों के निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई थी। जब कई वर्षों तक ज़मीन का उपयोग नहीं किया गया, तो याचिकाकर्ताओं ने 2003 में ज़मीन वापस लेने के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की।