By अभिनय आकाश | Mar 07, 2026
किसी भी जगह नमाज पढ़ना धार्मिक अधिकार नहीं माना जा सकता जब सुरक्षा का जोखिम होता है तो सुरक्षा सबसे पहले आती है। चाहे धर्म कोई भी हो सुरक्षा के मामले में हम जरा भी समझौता नहीं करेंगे। इस एयरपोर्ट से हर धर्म के लोग यात्रा करते हैं। इसलिए सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। आप नमाज की जगह तय नहीं कर सकते। 5 मार्च को ये टिप्पणी की है बॉम्बे हाईकोर्ट ने। मुंबई एयरपोर्ट पर रमजान के दौरान नमाज पढ़ने के लिए जगह देने वाली मांग की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि सुरक्षा धर्म से ऊपर है। जस्टिस बीपी कुलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पुनिवाला की बेंच ने कहा कि रमजान इस्लाम का अभिन्न अंग है, लेकिन इसके अनुयायी रमजान में किसी भी स्थान पर ख़ास तौर से एयरपोर्ट के पास नमाज अदा करने के धार्मिक अधिकार का दावा नहीं कर सकते हैं, क्योंकि वहां पर सुरक्षा चिंताएं बहुत होती है। इस मामले में लापरवाही नहीं बरती जा सकती। बेंच ने याचिकाकर्ताओ से कहा कि आप नमाज अदा करने का स्थान तय नहीं कर सकते। आज आप एयरपोर्ट परिसर में जगह की मांग कर रहे हैं, कल आप ओवल मैदान की जगह मांगेंगे। किसी भी स्थान पर नमाज अदा करना कोई धार्मिक अधिकार नहीं है। हालांकि बेंच ने याचिकाकर्ताओं को एयरपोर्ट अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपने की अनुमति दी है। ताकि भविष्य में इस पर विचार हो सके।
पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एयरपोर्ट अधिकारियों को निर्देश दिया था कि क्या याचिकाकर्ताओं को कोई अन्य स्थान आवंटित किया जा सकता है। अधिकारियों ने इस संबंध में बेंच के सामने एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया था कि कुछ स्थान देखे गए थे, लेकिन भीड़भाड़, सुरक्षा चिंताओं और डिवेलपमेंट प्रोजेक्ट के चलते नमाज अदा करने के लिए कोई स्थान उपयुक्त नहीं पाया गया है। इस पर बेंच ने कहा कि धर्म सुरक्षा से बड़ा नहीं है। सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता है। धर्म हो न हो, सुरक्षा सर्वोपरि है।