Yes Milord: फैक्ट चेक यूनिट को HC ने असंवैधानिक बताया, बंगाल से केस ट्रांसफर करने SC ने CBI को खूब सुनाया, कोर्ट में इस हफ्ते क्या हुआ

By अभिनय आकाश | Sep 21, 2024

हाई कोर्ट तिरुपति लड्डू मुद्दे पर वाईएसआर कांग्रेस नेता की याचिका पर 25 सितंबर को सुनवाई करेगा। 'इमरजेंसी' रिलीज को लेकर कोर्ट ने पूछा कि क्‍या केंद्र की बीजेपी अपने ही सांसद की फिल्‍म के ख‍िलाफ है? केंद्र की फैक्ट चेक यूनिट को बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिया झटका। बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक। इस सप्ताह यानी 16  सितंबर से 21 सितंबर 2024 तक क्या कुछ हुआ? कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट और टिप्पणियों का विकली राउंड अप आपके सामने लेकर आए हैं। कुल मिलाकर कहें तो आपको इस सप्ताह होने वाले भारत के विभिन्न न्यायालयों की मुख्य खबरों के बारे में बताएंगे। 

बुलडोजर ऐक्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को रोक लगा दी। अदालत ने कड़ा रुख जताते हुए कहा, बुलडोजर जस्टिस का महिमामंडन नहीं होना चाहिए। अगर अवैध ध्वस्तीकरण का एक भी मामला है, तो यह संविधान के मूल्यों के खिलाफ है। अगली सुनवाई की तारीख 1 अक्टूबर तक कोर्ट की इजाजत के बिना कोई भी तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की बेंच ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सड़कों और फुटपाथों पर बने अवैध ढांचों पर लागू नहीं होगा। सभी पक्षों को सुनने का बाद जल्द गाइडलाईन जारी की जाएगी।

फिल्म 'इमरजेंसी' पर बॉम्बे हाई कोर्ट का सवाल

बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि रचनात्मक और अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता और सेसर बोर्ड कानून-व्यवस्था खराब होने की आशंका के कारण किसी फिल्म को सर्टिफिकेट देने से इनकार नहीं कर सकता। जस्टिस बीपी कुलाबावाला और जस्टिस फिरदौश पूनिवाला की खंडपीठ ने कंगना रनौत की फिल्म 'इमरजेंसी' को सर्टिफिकेट जारी करने के सिलसिले में फैसला नहीं लेने पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के प्रति नाराजगी जताई और 25 सितंबर तक इस पर फैसला लेने का आदेश दिया।

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फैक्ट चेकिंग यूनिट को बॉम्बे हाई कोर्ट ने बताया असंवैधानिक

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन नियम 2023 को खारिज कर दिया। इन संशोधनों के जरिए केंद्र सरकार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने कामकाज के बारे में 'फर्जी और भ्रामक' सूचनाओं की पहचान करने और उन्हें खारिज करने के लिए फैक्ट चेक यूनिट स्थापित करने की अनुमति दी गई थी। इस मुद्दे पर अपनी राय सुनाते हुए सिंगल-जज जस्टिस अतुल चंदुरकर ने कहा कि संशोधन संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 19 का उल्लंघन करते हैं। जनवरी 2024 में जस्टिस गौतम पटेल और डॉ नीला गोखले की खंडपीठ द्वारा विभाजित फैसला सुनाए जाने के बाद यह मामला टाई-ब्रेकर जज के पास आया था। 

तिरुपति लड्डू मुद्दे पर HC 25 सितंबर को करेगा सुनवाई

तिरुपति मंदिर के लड्डुओं में पशुओं की चर्बी होने से उपजे विवाद को लेकर युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के वरिष्ठ नेता वाई.वी. सुब्बा रेड्डी की याचिका पर आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट 25 सितंबर को सुनवाई करने को सहमत हो गया। सुब्बा रेड्डी ने पूर्ववर्ती वाईएसआर कांग्रेस सरकार के शासन के दौरान तिरुपति लड्डू बनाने में पशुओं की चर्बी के कथित इस्तेमाल से संबंधित मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए शुक्रवार को एक ‘लंच मोशन’ याचिका दायर करने की अदालत से अनुमति मांगी। ‘लंच मोशन’ याचिका का उपयोग उन मामलों के लिए किया जाता है जिनमें तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है। इस तरह की याचिका पर उसकी बारी आने से पहले सुनवाई की जाती है। 

बंगाल से केस ट्रांसफर करने की मांग पर सीबीआई को फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने  2021 की हिंसा के बाद के मामलों को पश्चिम बंगाल से बाहर स्थानांतरित करने का अनुरोध करने वाली केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका में अदालतों पर शर्मनाक आरोप लगाने के लिए केंद्रीय एजेंसी को फटकार लगाई। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने कहा कि सीबीआई पश्चिम बंगाल में पूरी न्यायपालिका पर आरोप नहीं लगा सकती। पीठ ने सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस. वी. राजू से कहा, ‘‘राजू जी, इसमें किस तरह के आधार बताए गए हैं। 

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