हिजाब विवाद: वर्दी के उल्लंघन पर जुर्माने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं, मुस्लिम छात्रों का तर्क

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 11, 2022

बेंगलुरु। शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाले छात्र-याचिकाकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय को बताया कि कर्नाटक शिक्षा अधिनियम-1983 में वर्दी के उल्लंघन के लिए दंड का कोई प्रावधान नहीं है। कुंडापुरा की छात्राओं की ओर से कर्नाटक उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ के समक्ष पेश हुए अधिवक्ता संजय हेगड़े ने कहा कि कर्नाटक शिक्षा अधिनियम-1983 में निर्धारित दंड खंड काफी हद तक कॉलेज प्रबंधन तक ही सीमित है। उन्होंने कहा कि अधिनियम में नकल करने, कदाचार और लूटपाट के लिए जुर्माना लगाने का प्रावधान है।

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हेगड़े के अनुसार, याचिकाकर्ता छात्राएं लंबे समय से अपनी वर्दी के साथ-साथ अपने सिर पर नियमित स्कार्फ(हिजाब) भी पहनती आई हैं, लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने जोर देकर कहा है कि उन्हें कक्षाओं में आने के लिए इसे हटा देना चाहिए। हेगड़े ने तर्क दिया कि दिसंबर के बाद से याचिकाकर्ताओं को भेदभाव का सामना करना पड़ा है और उन्हें कक्षा से बाहर खड़ा कर दिया गया था। छात्राओं ने कहा कि हिजाब उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है। इसके जवाब में राज्य के महाधिवक्ता प्रभुलिंग नवदगी ने बताया कि जब लड़कियां हिजाब पहनकर कॉलेजों में आने लगीं, तो कुछ अन्य छात्र भगवा शॉल पहनकर आने लगे, जिससे अराजकता फैल गई। नतीजतन, राज्य ने शुक्रवार तक स्कूलों और कॉलेजों में तीन दिनों के लिए अवकाश घोषित कर दिया। महाधिवक्ता नवदगी ने यह भी कहा कि शिक्षण संस्थानों ने राज्य सरकार के निर्देश के आधार पर स्कूल की वर्दी तय की है।

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