By अंकित सिंह | Aug 12, 2026
आज (12 अगस्त) से हिमाचल प्रदेश में बिकने वाले पेट्रोल और डीज़ल के हर लीटर पर 60 पैसे ज़्यादा लगेंगे। इसकी वजह महंगाई या कच्चे तेल की कीमतें नहीं हैं। यह विधवा और अनाथ सेस (Widow and Orphan Cess) नाम का एक नया सेस है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस हफ़्ते एक नोटिफ़िकेशन जारी किया। यह राज्य के 'वैल्यू एडेड टैक्स' (VAT) कानून के एक सेक्शन के तहत, राज्य के टैक्स और आबकारी विभाग की तरफ़ से आया है। यह सेस फ़्यूल की पहली बिक्री पर लागू होता है – यानी उस समय जब कोई तेल कंपनी किसी डीलर को फ़्यूल बेचती है।
यह बिल ध्वनि मत से पास हुआ, जबकि विपक्ष ने विधानसभा से वॉकआउट किया। सरकार का तर्क था कि इन कल्याणकारी योजनाओं के लिए फंडिंग का एक स्थायी स्रोत ज़रूरी है। सालाना बजट आवंटन पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय, राज्य एक ऐसा समर्पित रेवेन्यू स्रोत चाहता था जिससे इन कार्यक्रमों के लिए लगातार फंडिंग हो सके। सरकार का कहना है कि इस सेस का मकसद आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों की विधवाओं और अनाथों की मदद करने वाली कल्याणकारी योजनाओं के लिए रेवेन्यू का एक खास और स्थिर ज़रिया बनाना है।
राज्य में बिकने वाले हर लीटर पेट्रोल और डीज़ल पर 60 पैसे का चार्ज लगता है। इसका मतलब है कि इसका खर्च उन्हीं लोगों को उठाना पड़ता है जिनकी मदद के लिए यह योजना बनाई गई है, जिसमें विधवाएं और अनाथ बच्चों की देखभाल करने वाले परिवार शामिल हैं। इसके अलावा, यह सेस उन ग्राहकों को भी देना होगा जो ईंधन पर निर्भर हैं, जैसे टैक्सी ऑपरेटर और किसान, जिन पर ईंधन की कीमतों में बदलाव का पहले से ही असर पड़ता है।