EU में भारतीय हथियारों की एंट्री का ऐतिहासिक मौका, हिल जाएगा अमेरिका!

By अभिनय आकाश | Jan 27, 2026

गणतंत्र दिवस परेड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व के सामने भारत के स्वदेशी हथियारों, मिसाइल सिस्टम, तोपखाने और रक्षा तकनीक का प्रदर्शन किया तो यह सिर्फ एक परेड नहीं थी। यह एक रणनीतिक संदेश था। यह संदेश था कि भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं है। भारत अब हथियार बनाने वाला, तकनीक विकसित करने वाला और भरोसेमंद रक्षा साजदार बन चुका है। इसी बैकग्राउंड में एक बहुत बड़ी खबर सामने आई। यूरोपी संघ अपनी रक्षा नीति को रिसेट कर रहा है और इस रिसेट का सबसे बड़ा फायदा भारत को मिल सकता है। दरअसल भारत और यूरोपी संघ इस समय दो बड़े समझौतों की तैयारी में है। पहला भारत यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता दूसरा सुरक्षा और रक्षा रणनीति साझेदारी। इस एफटीए को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है और रक्षा समझौता इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है।

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 दरअसल कोई भी देश सिर्फ दोस्ती के लिए अपनी रणनीति नहीं बदलता। इसके पीछे राष्ट्रीय हित होते हैं। जैसे कि यूरोप को अब यह एहसास हो चुका है कि वह अमेरिका पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो चुका है। नाटो सदस्य होने का मतलब पूरी सुरक्षा नहीं है। अमेरिका कभी भी पीछे हट जाता है। हथियार, चिप्स और गोला बारूद की सप्लाई चेन कमजोर है। यूक्रेन युद्ध और अमेरिकी राजनीति की अनिश्चितता ने यूरोप को सोचने पर मजबूर कर दिया। यूरोप ने देखा कि अमेरिका अपने फैसले अचानक बदल सकता है। सहयोगियों को अकेला छोड़ सकता है। चीन और रूस का बढ़ता सामरिक गठजोड़ यूरोप के लिए खतरे की घंटी है।

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