29 करोड़ मुस्लिमों के बीच शिव धाम, दीवारों पर रामायण की कहानी, इंडोनेशिया के 1170 साल पुराने परमब्रह्म मंदिर का जानें इतिहास

By अभिनय आकाश | Jul 08, 2026

दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश। लेकिन वहां पर मौजूद है भगवान शिव का ऐसा भव्य मंदिर जिसे देखकर दुनिया दंग रह जाती है। यह सिर्फ पत्थरों से बनी इमारत नहीं है बल्कि हजार साल पुरानी उस सांस्कृतिक यात्रा की गवाही है जिसने भारत और इंडोनेशिया को आज भी एक अदृश्य धागे में बांधे रखा है। इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर स्थित ब्रह्मानन शिव मंदिर इन दिनों काफी चर्चाओं में है। वजह है कि भारत का इस विश्व धरोहर मंदिर के संरक्षण और जीर्णोद्धार में सहयोग का फैसला करीब 10वीं शताब्दी में बना ब्रह्मानंद मंदिर दक्षिण पूर्व एशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर माना जाता है। इसकी ऊंचाई शिखर शैली भारतीय मंदिर वास्तुकला की याद दिलाती है। समय, भूकंप और प्राकृतिक आपदाओं ने इस धरोहर को कई बार नुकसान भी पहुंचाया है। लेकिन हर बार इसे फिर सवारने की कोशिश की हुई है। यह मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर है और दक्षिण पूर्व एशिया की सबसे भव्य हिंदू वास्तुकला का नमूना माना जाता है। भारत और इंडोनेशिया के बीच 2025 में हुए समझौते के तहत अब इस मंदिर के जीर्णोद्धार में भारत एएसआई की विशेषज्ञता देगा। तमाम सारी बातों के बीच मूल पत्थरों को जोड़कर पुनर्निर्माण की इस तकनीक को इस्तेमाल होगा। ब्रह्मानंद मंदिर का जीर्णोद्धार दोनों देशों के बीच 2000 साल पुरानी दोस्ती को और ज्यादा मजबूत करेगा। 

कंबोडिया के अंकोर वार्ड से की जाती तुलना

आपको बता दें कि मूल रूप से यहां पर 240 से ज्यादा मंदिर थे। समय के साथ भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोटों ने इसे कई बार नुकसान पहुंचाया लेकिन जो बचा है वह आज भी भव्यता के साथ खड़ा हुआ है। इसकी तुलना इसकी तुलना अक्सर कंबोडिया के अंकोर वार्ड से की जाती है। लेकिन ब्रह्मानंद पूरी तरह से हिंदू आस्था से जुड़ा हुआ है। कंबोडिया का मंदिर भी वो बड़ा विशाल है। बड़ा चर्चाओं में है। कहा जाता है कि हजारों की संख्या में जो वहां पर शिव के मूर्तियां हैं, शिवलिंग हैं, वो रावण ने बनाई थी। उसकी चर्चा फिर कभी लेकिन फिलहाल यह इंडोनेशिया के मंदिर हैं। एक नहीं 10,000 मंदिर यहां पर हैं।  इन 10,000 मंदिरों का भारतीय संस्कृति से गहरा नाता है। इंडोनेशिया नौसेना का आधिकारिक आदर्श वाक्य ज्वेल जयामहे संस्कृत में वहीं राष्ट्रीय नारा है भिन्नका तंगुल ईका जापानी ग्रंथ काकाबिन समसेतु में किया गया है जिसमें संस्कृत के कई शब्द हैं इंडोनेशिया के  नोट पर भगवान गणेश की तस्वीर भी छपी हुई है जहां पर गणेश का ज्ञान और शिक्षा का प्रतीक माना माना जाता है। जकार्ता के बीचों-बीच 85 फीट ऊंची अर्जुन और श्री कृष्ण के रथ की प्रतिमा भी लगी हुई है जो शहर के सबसे प्रसिद्ध स्मारकों में से एक है। दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश होने के बावजूद इंडोनेशिया में आज भी रामायण का मंचन होता है। इसे देखने के लिए हर साल यहां पर लाखों पर्यटक पहुंचते हैं। इंडोनेशिया की राष्ट्रीय एयरलाइन गरुड़ इंडोनेशिया का नाम भी गरुड़ के नाम पर रखा गया है। जिसका उल्लेख भारतीय शास्त्रों में, भारतीय वेदों में और भारतीय ग्रंथों में है।  

इसे भी पढ़ें: कुटाई नहीं सीधे चीन की दवाई, इंडोनेशिया में मोदी का तहलका

ब्रह्मानंद मंदिर खास क्यों है? 

अगर कोई आपसे पूछे कि दक्षिण पूर्व एशिया का सबसे विशाल हिंदू मंदिर कौन सा है? तो जवाब होगा ब्रह्मानंद मंदिर। लेकिन इसकी पहचान सिर्फ इसके आकार से नहीं बल्कि उस अद्भुत कला और इतिहास से है जिसने इसे विश्व धरोहर बना दिया है। करीब 1100 साल पहले जावा की धरती पर ऐसा मंदिर परिसर बनाया गया जिसने भारतीय स्थापत्य कला को स्थानीय परंपराओं के साथ जोड़ा और एक नई पहचान दी। मंदिर का सबसे ऊंचा शिखर भगवान शिव को अर्पित है। समर्पित है और इसकी ऊंचाई लगभग 47 मीटर मानी जाती है। दूर से देखने पर लगता है कि मानो पत्थर का कोई पर्वत आसमान को छू रहा हो। जो तस्वीर आप अपनी टीवी स्क्रीन पर देख रहे हैं, वही है ब्रह्मानंद परिसर और मंदिर। ब्रह्मानंद परिसर में कुल सैकड़ों छोटे-छोटे बहुत सारे मंदिर हैं। इनके प्रमुख तीन मंदिर हैं। भगवान शिव का मंदिर, भगवान विष्णु का मंदिर, भगवान ब्रह्मा का मंदिर यह समर्पित मंदिर हैं। इनके सामने नंदी भी हैं, गरुड़ भी हैं और हंस के मंदिर भी बने हुए हैं। मंदिर की दीवारों पर रामायण और कृष्ण कथा की नक्काशी भारतीय संस्कृति के गहरे रिश्ते और प्रभाव को दिखाती है। 

सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश में 10,000 हिंदू मंदिर

पूरे इंडोनेशिया में 10,000 हिंदू देवी देवताओं के मंदिर हैं। दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी का देश और उस देश में 10,000 हिंदू मंदिर मानते हैं ना भारतीय संस्कृति को। अब जरा इसकी तमाम जो खासियत हैं उनका जिक्र मैं कर लेता हूं। असल में ब्रह्मानंद मंदिर उसकी जो परिसर है त्रिमूर्ति की पूजा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मुख्य और सबसे बड़ा मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसके दाई ओर भगवान विष्णु और बाई ओर ब्रह्मा जिसका मैं जिक्र कर चुका हूं। मुख्य मंदिरों के सामने देवी देवताओं के वाहन भी बने हुए हैं। जिसमें शिव के वाहन नंदी बैल का मंदिर सबसे प्रमुख है। मंदिर की जो लंबी गैलरियों की दीवारों पर रामायण और भागवत पुराण की कथाएं लिखी हुई हैं। नक्काशी के तौर पर उकेरी गई हैं जो देखने वालों को प्राचीन काल में ली जाती हैं। और यह मंदिर सिर्फ पूजा स्थल नहीं है बल्कि हिंदू पुराणों का जीवंत संग्रहालय भी बना हुआ है।

जावा का प्राचीन हिंदू चमत्कार

प्रम्बानन मंदिर कॉम्प्लेक्स इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर कॉम्प्लेक्स है और कंबोडिया के अंकोरवाट के बाद दक्षिण-पूर्व एशिया का दूसरा सबसे बड़ा कॉम्प्लेक्स है। योग्याकार्ता के पास जावा द्वीप पर स्थित, यह विशाल कॉम्प्लेक्स मूल रूप से लगभग 40 हेक्टेयर में फैले करीब 240 मंदिरों से बना था। आज, यह इंडोनेशिया के सबसे खास सांस्कृतिक स्थलों में से एक है और इस क्षेत्र की समृद्ध हिंदू विरासत की एक बड़ी निशानी है।

इसे भी पढ़ें: चाबहार में पटरी बिछाकर भारत रचेगा इतिहास! अमेरिका-चीन-पाकिस्तान को झटका

मताराम साम्राज्य में शुरुआत

प्रम्बानन को 9वीं सदी ईस्वी में हिंदू मताराम साम्राज्य के दौरान बनाया गया था। माना जाता है कि इसका निर्माण राजा राकाई पिकाटन ने शुरू किया था और उनके उत्तराधिकारी लोकापाला ने इसे पूरा किया था। इतिहासकारों का मानना ​​है कि इस मंदिर का निर्माण साम्राज्य द्वारा शैव हिंदू धर्म को अपनाने के प्रतीक के तौर पर और प्रतिद्वंद्वी शैलेंद्र राजवंश द्वारा बनाए गए पहले के बौद्ध बोरोबुदुर मंदिर के जवाब में किया गया था।

वास्तुकला का बेहतरीन नमूना

इस कॉम्प्लेक्स का मुख्य हिस्सा तीन ऊँचे मंदिरों से बना है, जो हिंदू त्रिमूर्ति भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा—को समर्पित हैं। लगभग 47 मीटर ऊँचा शिव मंदिर यहाँ की सबसे बड़ी और प्रमुख इमारत है। ज्वालामुखी के पत्थरों से बने इन मंदिरों में ऊँचे शिखर, बारीकी से की गई नक्काशी, सजावटी प्रवेश-द्वार और एक जैसा लेआउट है, जो क्लासिकल हिंदू वास्तुकला की बेहतरीन परंपराओं को दिखाते हैं।

हिंदू सभ्यता का प्रतीक

प्रम्बानन भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर हिंदू वास्तुकला के सबसे बेहतरीन बचे हुए उदाहरणों में से एक है। इसकी दीवारों पर रामायण और अन्य हिंदू महाकाव्यों के दृश्यों की बारीक नक्काशी की गई है। ये नक्काशी उस गहरे सांस्कृतिक और धार्मिक प्रभाव को दर्शाती है जो कभी व्यापार, ज्ञान और समुद्री संपर्कों के ज़रिए दक्षिण-पूर्व एशिया पर भारत का था।

खंडहर से जीणोर्धार तक

10वीं सदी में इस मंदिर परिसर को छोड़ दिया गया था, शायद माउंट मेरापी में ज्वालामुखी फटने और जावा में राजनीतिक सत्ता बदलने की वजह से। सदियों तक आए ज़बरदस्त भूकंपों ने कई ढांचों को खंडहर में बदल दिया। 19वीं सदी में डच औपनिवेशिक प्रशासन के तहत बहाली की कोशिशें शुरू हुईं, जबकि 1913 और 1953 के बीच बड़े पैमाने पर पुरातत्व संबंधी पुनर्निर्माण से कई मुख्य मंदिरों को उनकी पुरानी शान वापस मिली।

यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा

इसकी असाधारण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अहमियत को देखते हुए, यूनेस्को ने 1991 में प्रम्बानन को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया। आज, यह इंडोनेशिया के सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले स्मारकों में से एक है और पास के बोरोबुदुर मंदिर के साथ मिलकर, देश के हिंदू और बौद्ध अतीत की एक अनोखी झलक पेश करता है।

साझा विरासत को संरक्षित करने में भारत की भूमिका

भारत के सहयोग से चलाया जा रहा यह संरक्षण और बहाली प्रोजेक्ट, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में साझा सभ्यतागत विरासत को बचाने की नई दिल्ली की कोशिशों में एक और अहम पड़ाव है। यह पहल भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और सांस्कृतिक कूटनीति के अनुरूप है; यह एशिया के सबसे महत्वपूर्ण हिंदू स्मारकों में से एक की सुरक्षा करते हुए इंडोनेशिया के साथ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करती है।

प्रमुख खबरें

NATO Summit में Donald Trump की मांग पर भड़का डेनमार्क, कहा- Greenland बिकाऊ नहीं है

ट्रूडो के जाते ही बदले ओटावा के सुर, कनाडा ने माना- निज्जर की हत्या में भारत सरकार का कोई लिंक नहीं

गुंडों को सिर्फ़ Underwear में सड़कों पर घुमाओ, KDMC मारपीट पर Sanjay Raut की CM से मांग

MP: बगलामुखी मंदिर के दान में घोटाला? Private खातों की जांच के लिए High-Level Probe के आदेश