Holika Dahan 2026 Puja Guide: नारियल से लेकर गुलाल तक, यहां देखें पूजन सामग्री की A to Z लिस्ट

By दिव्यांशी भदौरिया | Mar 02, 2026

आज यानी 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा। होलिका दहन का पर्व सिर्फ पारंपरिक अग्नि प्रज्वलन नहीं है, बल्कि यह आस्था, परंपरा और सकारात्मक ऊर्जा का उत्सव है। इस दिन विधि-विधान से पूजन करने का विशेष महत्व माना जाता है। अगर इस दिन सही सामग्री और श्रद्धा के साथ किया गया होलिका पूजन घर-परिवार में सुख, समृद्धि और शांति लेकर आता है। होलिका पूजन से पहले कुछ जरुरी सामग्री होना बेहद जरुरी होता है। आइए जानते होलिका दहन के लिए जरुरी पूजन सामग्री।

नारियल 

होलिका पूजन में सबसे जरुरी नारियल होता है। यह पूर्णता और शुभ कार्य की शुरुआत नारियल चढ़ाकर की जाती है। होलिका दहन में भी नारियल अर्पित करना मंगलकारी माना जाता है।

गुलाल 

गुलाल होली के पर्व का प्रमुख रंग है। जो खुशियों, प्रेम और उमंग का प्रतीक है। होलिका पूजन में गुलाल चढ़ाकर हम रंगों के इस पर्व का स्वागत करते हैं। 

रोली

रोली का प्रयोग तिलक लगाने के लिए किया जाता है। इसे मंगल और शुभता का प्रतीक माना जाता है। पूजन के समय रोली से तिलक लगाकर सकारात्मक ऊर्जा का आह्वान किया जाता है।

धूप 

धूप को वातावरण की शुद्धि और नकारात्मक शक्तियों को समाप्त करने के उद्देश्य से प्रज्वलित किया जाता है। इसकी मधुर सुगंध चारों ओर सकारात्मकता फैलाकर माहौल को पवित्र, सुखद और शांतिमय बना देती है।

फूल

फूल भक्ति और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। देवी-देवताओं को फूल अर्पित कर श्रद्धा व्यक्त की जाती है। होलिका दहन में भी पुष्प को अर्पित किया जाता है।

गोबर के कंडे

गौ-गोबर के उपलों से तैयार की गई माला, जिसे कुछ स्थानों पर ‘गुलरिया’ के नाम से जाना जाता है, अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इसे परिवार की सुख-समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक समझा जाता है। मान्यता है कि इसे होलिका अग्नि में समर्पित करने से घर-परिवार से अशुभ प्रभाव और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

अनाज

अनाज समृद्धि और अन्न वृद्धि का प्रतीक होता है। नई फसल के आगमन की खुशी में होलिका दहन पर अनाज अर्पित किया जाता है, ताकि वर्ष भर घर में अन्न-धन की कमी न रहे।

मूंग की साबुत दाल

मूंग की साबुत दाल भी शुभता और पवित्रता के लिए जानी जाती है। इसे चढ़ाने से सकारात्मकता और सौभाग्य की कामना की जाती है। 

कलावा और सुपारी

कलावा या रक्षा सूत्र पूजन के दौरान हाथ में बांधा जाता है। यह सुरक्षा और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। सुपारी को हर शुभ कार्य में आवश्यक मानी जाती है। इसे स्थिरता और संकल्प का प्रतीक माना जाता है।

जल

कलश से भरा जल जीवन, शांति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। जल के बिना कोई भी पूजन पूर्ण नहीं माना जाता है।

घी

घी का उपयोग अग्नि को तेज और पवित्र बनाए रखने के लिए किया जाता है। होलिका दहन के समय अग्नि में घी समर्पित करना श्रद्धा, शुद्धता और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है।

दीपक

मिट्टी का दीपक प्रकाश और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। इसे जलाकर अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश दिया जाता है। 

सरसों के दाने

सरसों के दाने नकरात्मक शक्तियों को दूर करने के लिए होलिका में डाले जाते हैं। दरअसल, यह बुरी नजर और बाधाओं से रक्षा का संकेत देती है।

गन्ना

कुछ क्षेत्रों में गन्ना भी अर्पित किए जाते है, जो मिठास और खुशहाली का प्रतीक है। 

मलपुआ

आखिर में मलपुआ, गुजिया तथा अन्य पारंपरिक व्यंजन प्रसाद स्वरूप अर्पित किए जाते हैं। ये मिठाइयां पर्व की खुशियों, उल्लास और मधुरता का प्रतीक मानी जाती हैं।

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