By अनन्या मिश्रा | Oct 30, 2026
आज ही के दिन यानी की 30 अक्टूबर को भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक होमी जहांगीर भाभा का जन्म हुआ था। वह महान वैज्ञानिक, संगीत प्रेमी और चित्रकार थे। विज्ञान में होमी जे भाभा के योगदान की वजह से उनको 'भारत का आइंस्टीन' भी कहा जाता है। वह देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के करीबी माने जाते थे। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर होमी जे भाभा के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
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पॉल डिराक और नील्स बोहर से प्रेरित होकर होमी जे भाभा ने कॉस्मिक किरणों पर शोध शुरू किया। साल 1922 में उन्होंने पीएचडी और साल 1939 में डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि प्राप्त की थी। सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान वह भारत आ गए और फिर बेंगलुरु स्थिति इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में काम किया। कॉस्मिक किरणों पर होमी जे भाभा के शोध ने उनको अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का काम किया था।
मुंबई में साल 1945 में होमी जे भाभा ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की स्थापना की थी। सर दोराबजी टाटा के सहयोग से यह संस्थान शुरू हुआ, जिसका उद्देश्य भारत में उच्चस्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना था।
साल 1954 में होमी जे भाभा को परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद ट्रॉम्बे में उन्होंने एटॉमिक एनर्जी एस्टेब्लिशमेंट की स्थापना की, जिसको भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के नाम से जाना जाता है। होमी जे भाभा का तीन चरणीय परमाणु कार्यक्रम यूरेनियम, प्लूटोनियम और थोरियम पर आधारित था। भारत में थोरियम के बड़े भंडार को देखते हुए होमी जे भाभा ने इसके इस्तेमाल पर खास जोर दिया था।
वहीं साल 1955 में होमी जे भाभा ने जिनेवा में पहले अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा सम्मेलन की अध्यक्षता की थी। साल 1956 में उनके नेतृत्व में एशिया का पहला परमाणु अनुसंधान रिएक्टर 'अप्सरा' शुरू किया गया था।
वहीं स्विट्जरलैंड जाते समय 24 जनवरी 1966 को एयर इंडिया की फ्लाइट 101 मॉन्ट ब्लांक पर्वत से टकरा गई। इस दुर्घटना में 56 साल के होमी जे भाभा का निधन हो गया था।