By रेनू तिवारी | Sep 01, 2026
नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त को आई विनाशकारी प्रलयंकारी बाढ़ और हिमस्खलन के बाद स्थिति दिन-ब-दिन बेहद भयावह होती जा रही है। नुवाकोट जिले के बेट्रावती गांव में मलबे में दबे एक ही तीन मंजिला मकान से 23 शव मिलने के बाद इस कुदरती तबाही के खौफनाक मंजर ने सभी को दहला दिया है। बचाव दल समय के खिलाफ दौड़ रहे हैं, क्योंकि नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 939 तक पहुंच गई है और 4,000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।
इस खोज ने यह आशंका पैदा कर दी है कि पीड़ित शायद गोसाईकुंडा की ओर यात्रा कर रहे तीर्थयात्री हो सकते हैं, जो एक लोकप्रिय धार्मिक स्थल है। उनकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।
नेपाल में एक घर में दबे हुए 23 शव मिले
खोज अभियान में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि बचाव कर्मियों ने घर के अंदर एक कमरे से 21 शव और बाहर से दो और शव बरामद किए। यह इमारत 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में आई भीषण बाढ़ की चपेट में आ गई थी।
जांचकर्ताओं का मानना है कि बाढ़ का पानी बढ़ने पर पीड़ित शायद नीचे की तबाही से बचने की उम्मीद में ऊपरी मंजिलों की ओर भागे होंगे। इसके बजाय, घर ही मौत का जाल बन गया।
नुवाकोट के पुलिस अधीक्षक बिपिन रेग्मी ने कहा, "एक कमरे में 21 शव और बाहर 2 शव मिले। एक शव विदेशी नागरिक का लग रहा है। शवों के साथ बैग भी मिले। हो सकता है कि वे गोसाईकुंडा जा रहे यात्री हों।"
शव छत के ठीक नीचे एक कमरे में मिले, जिससे संकेत मिलता है कि अंदर मौजूद लोग बचने की हताश कोशिश में ऊपर की ओर चढ़े होंगे। सबसे परेशान करने वाली खोजों में एक महिला का शव था जो एक छोटी बच्ची को कसकर पकड़े हुए थी। पुलिस को संदेह है कि वे दोनों मां-बेटी हो सकती हैं।
रेग्मी ने कहा कि सबूतों से पता चलता है कि बढ़ते पानी से बचने की कोशिश में कई लोग एक साथ जमा हो गए थे, लेकिन बाढ़ और मलबे ने इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। मिले 23 शवों में से आठ को त्रिशूली अस्पताल ले जाया गया है, जबकि बाकी शवों को कुछ समय के लिए छत पर रखा गया है और बाद में उन्हें ले जाया जाएगा।
करीब 4,000 लोग अभी भी लापता हैं
यह त्रासदी नुवाकोट में मलबे में दबे घर तक ही सीमित नहीं है। रसुवा जिले के उत्तरगया गांव में करीब 350 छात्रों के लापता होने की खबर है और वहां तलाशी अभियान जारी है।
मुश्किल हालात के कारण त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर बचाव कार्य लगातार छठे दिन भी रुका रहा। इस प्रोजेक्ट पर करीब 40-42 इंजीनियर काम कर रहे थे और अधिकारी उनके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। त्रिशूली 3B हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर भी 118 कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पाया है, जिससे बाढ़ से होने वाले जान-माल के नुकसान को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भारतीय बचाव दल तलाशी अभियान में शामिल
भारतीय बचाव विशेषज्ञों ने नेपाल में अपना अभियान तेज़ कर दिया है और वे खराब मौसम और मुश्किल इलाकों के बावजूद नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
खबर है कि रसुवा जिले के चिलिमे और लांगटांग में सुरंगों के अंदर फंसे कर्मचारियों को बचाने की कोशिशों में भारतीय टीम को शुरुआती सफलता मिली है। दोनों जगहों पर तलाशी और बचाव अभियान जारी हैं, क्योंकि टीमें जीवित बचे लोगों का पता लगाने और लापता लोगों की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही हैं।
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