By अंकित सिंह | Oct 16, 2021
सिंघू बॉर्डर पर गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के आरोप में सिख पंथ के सदस्यों द्वारा पीट-पीटकर जान से मारे गए दलित खेतिहर मजदूर लखबीर सिंह के परिवार ने इस मामले को लेकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। परिवार ने दावा किया कि लखबीर सिंह ईश्वर से डरने वाले व्यक्ति थे जो कभी भी पवित्र ग्रंथ की बेअदबी करने के बारे में भी नहीं सोच सकते थे। लखबीर की पत्नी जसप्रीत कौर और 12, 11 तथा 8 साल की 3 बेटियां अमृतसर से करीब 50 किलोमीटर दूर गांव सीमा कला में एक छोटे से कच्चे मकान में रहती हैं। उनके बेटे कि 2 साल पहले ही मौत हो गई है। लखबीर का परिवार बेहद ही गरीब है। बताया जा रहा कि जब लखबीर जीवित थे तब परिवार मुश्किल से दिन में दो वक्त के भोजन का प्रबंध कर पाता था और अपनी आजीविका के लिए गांव के खेतों में या तरनतारन जिले की अनाज मंडी में काम करता था। लखबीर की बहन राज कौर कहती हैं, अब उनके परिवार की देखभाल के लिए कौन आगे आएगा और उनके बच्चों के भविष्य का क्या होगा..कौन उनकी मदद करेगा?
लखबीर की भाभी सिमरनजीत कौर और सास सविंदर कौर सहित उनके परिवार के सदस्यों ने मीडिया को बताया कि लखबीर और उनकी बहन राज कौर को एक सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी हरनाम सिंह ने गोद लिया था, जो बिना किसी समस्या के साथ रह रहे थे। हालांकि हरनाम सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहे। परिवार ने दावा किया कि लखबीर का किसी भी राजनीतिक संगठन से कोई संबंध नहीं था और वह कभी भी किसी राजनीतिक व्यक्ति के समर्थन में किसी राजनीतिक रैली में नहीं गए। उनकी बहन राज कौर ने कहा, “मेरे भाई के पास घर से निकलने वक्त केवल 50 रुपये थे और इतने पैसे सिंघू सीमा तक पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं थे, लेकिन हो सकता है कि वह किसी ट्रैक्टर ट्रॉली या ट्रक से लिफ्ट लेकर वहां पहुंचा हो। कौर ने दावा किया, इसके अलावा, घटना से पहले मेरा भाई तीन दिनों से उन लोगों के साथ रह रहा था, जो लोग उसकी हत्या में संलिप्त हैं। यह पूछे जाने पर कि लखबीर सिंघू बॉर्डर क्यों गए थे, तो राज कौर ने कहा, हो सकता है कि किसी ने उसे (श्रम के लिए) अधिक पैसे की पेशकश की हो।