एक हादसा, एक आंदोलन और ताकतवर राष्ट्रपति को माननी पड़ी हार, सर्बिया में कॉकरोचों ने कैसे उखाड़ फेंकी सत्ता!

By अभिनय आकाश | Oct 26, 2026

जिन्हें कमजोर समझा गया। जिन्होंने सत्ता को चुनौती देने की कीमत चुकाई। जिनकी आवाज को दबाने की कोशिशें होती रहीं। उन्हीं छात्रों ने ऐसा पलटवार किया कि सर्बिया की राजनीति में भूचाल आ गया। 2 साल तक सड़कों पर संघर्ष, लाखों लोगों का गुस्सा और आखिरकार 14 साल से राजनीति पर दबदबा बनाए बैठे अलेक्जेंडर वुसिक के खेमे को चुनाव में हार स्वीकार करनी पड़ी। सवाल है आखिर यह हुआ कैसे? जिन छात्रों के पास ना सत्ता थी ना सरकार की ताकत उन्होंने इतने मजबूत राजनीतिक किले में सेंध कैसे लगा दी और अगर इन्हें सर्बिया के कॉकरोचों की जीत कहा जाए तो इस प्रतीक के पीछे छिपा संदेश आखिर है क्या? क्या सत्ता को चुनौती देने वाले इन छात्रों ने साबित कर दिया कि जिन्हें कुचलने की कोशिश की जाती है वे ही एक दिन पूरी व्यवस्था को हिला सकते हैं। सर्बिया में छात्रों के आंदोलन ने इतिहास रच दिया है।

इसे भी पढ़ें: सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने मतदाता सूची को आधार से अनिवार्य रूप से जोड़ने की मांग उठाई


अलेक्जेंडर वुसिक 2014 से प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के रूप में सर्बिया की राजनीति में जो है बने रहे। उनकी पार्टी के समर्थक आर्थिक विकास, सड़क और रेल परियोजनाओं जैसे कामों को उनकी उपलब्धियां बताते रहे। लेकिन विरोधियों का आरोप था कि सत्ता पर जरूरत से ज्यादा नियंत्रण, भ्रष्टाचार के सवाल और संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़ी चिंताओं ने लोकतंत्र को कमजोर किया। वुसिक ने इन आरोपों को नकारा। ऐसे माहौल में छात्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी। क्या वे सड़क पर जुटी भीड़ को वोट में तब्दील कर पाएंगे? क्या लोग स्थापित राजनीतिक मशीनरी को छोड़कर नए उम्मीदवारों पर भरोसा करेंगे? चुनाव के शुरुआती अनुमानों ने इन सवालों का जवाब सत्ता के लिए बेहद असहज बना दिया। मतदान में करीब 70% भागीदारी की शुरुआती अनुमान ने इस चुनाव को और अहम बना दिया। वुसिक ने खुद कहा कि उनकी पार्टी चुनाव हार गई है और छात्र समर्थित सूची जीत गई है। इसके बाद बेलग्रेड समेत कई जगहों पर समर्थक सड़कों पर उतर आए। जश्न मनाया गया, नारे लगे, लेकिन इस जीत को सिर्फ छात्रों की जीत कहकर छोड़ देना भी अधूरा होगा। यह उन लोगों की नाराजगी का संकेत है जो जवाबदेही चाहते हैं। 

प्रमुख खबरें

Apple यूजर्स सावधान! iPhone में पुराना सॉफ्टवेयर बना सकता है हैकिंग की वजह

Maharashtra में 33% वोटरों के नाम हटने की याचिका पर सुनवाई, Supreme Court ने ECI से पूछा सवाल

OnePlus N6 Lite लॉन्च! ₹16,999 में 7000mAh बैटरी, 3 दिन तक चलेगा फोन?

युवा सरकारी नौकरी के बजाय Entrepreneurship और स्किल पर दें ध्यान: आनंदीबेन पटेल