3 करोड़ 34 लाख लोग बाहर निकले, बंगाल में एक फैसले ने कैसे सब बदल दिया?

By अभिनय आकाश | Apr 25, 2026

92.88% मतदान पश्चिम बंगाल में हुआ है। भारत के इतिहास में किसी राज्य में किसी एक फेज में या ओवरऑल इतना मतदान कभी हुआ ही नहीं। इसी साल 2026 में पुडुचेरी में 91% से ज्यादा मतदान हुआ। लेकिन उसका भी रिकॉर्ड पश्चिम बंगाल वालों ने तोड़ दिया। पिछले बार के चुनाव पर नजर डालेंगे तो उसके बाद सवाल उठ रहे हैं क्या वाकई में बड़ा बदलाव होने जा रहा है? पहला फेज बंगाल में रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग। ईसी ने पहले दौर के लिए वोटिंग आंकड़े जारी किए। 152 सीटों पर 3 करोड़ 60 लाख वोटर थे। 3 करोड़ 3400 वोट पड़े। पहले फेज में 92.88% वोटिंग हुई। रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग के क्या संकेत? 1991 में 76.89% वोट पड़े थे। 96 में 82 94% वोट पड़े थे। 6.14% वोट का इजाफा हुआ था। नतीजा लेफ्ट सरकार बरकरार थी। 2006 में 81.97% वोट पड़े थे। 2011 में 86.06% वोट पड़े थे। 4.09% वोट का इजाफा हुआ। नतीजा सत्ता परिवर्तन और टीएमसी जीती। 2021 में 81.56% वोट पड़े थे। 2026 में 92.88% वोट पड़े हैं। 11.32% वोट का इजाफा हुआ है। 4 मई को नतीजे पर सबकी नजर रहेगी। तो यह पूरे आंकड़े पश्चिम बंगाल के पिछले कुछ चुनावों के हैं। जब 6% वोट इधर से उधर हुआ तो लेफ्ट टाटा बाय-बाय ममता बनर्जी 2011 में सत्ता में। अब 11.32% का अंतर आ चुका है। हालांकि दूसरे चरण का मतदान बाकी है। 

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इस इस उदाहरण से समझ सकते हैं कि जब मतदाता सूची छोटी हो गई मान लिया कि 100 आदमी हैं 100 आदमी में से आपको 52 आदमी वोट दे रहा है तो आप क्या बोलेगा 52% वोट हुआ। अब वह 100 आदमी का लिस्ट छोटा करके आप 60 कर दीजिए और दे रहा है 52 वोट तो वोटिंग परसेंटेज क्या हो जाएगा? 90% के आसपास हो जाएगा। वही हुआ वोटर लिस्ट छोटा हो गया है। दूसरा कारण यह है कि परसेंटेज जो फालतू था जो इस बार ठप्पा वोट नहीं पड़ा है। सबसे ज्यादा एसआईआर में नाम कटे हैं वह बशीरहाट  है। अब दूसरे फज़ में देखना होगा क्या कुछ होता है।

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