250 साल पहले कैसे आजाद हुआ अमेरिका, बिखरी हुई कंगाल कॉलोनी के दुनिया की सबसे बड़ी ताकत को हराने की कहानी

By अभिनय आकाश | Jul 03, 2026

जब भी हम बात करते हैं कि दुनिया में सबसे ताकतवर देश कौन सा है। तो बिना किसी किंतु-परंतु के एक ही नाम अमेरिका का याद आता है। अब आपमें से कुछ लोग ये भी बोल सकते हैं कि रूस और चीन भी तो ताकतवर देश हैं। लेकिन ये देश कंपटीशन की उस लाइन में हैं, जिसे अमेरिका बहुत पहले पार कर चुका है। दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी अमेरिका की है। इसकी जीडीपी 20 ट्रिलियन से भी ज्यादा है। दुनिया की सबसे बड़ी आर्मी अमेरिका के पास है। दुनिया की सबसे बड़ी बड़ी कंपनियां फिर चाहे एप्पल हो या फिर माइक्रोसॉफ्ट सभी अमेरिकी की है। इन सभी चीजों की लिस्ट इतनी लंबी है कि आपको यकीन हो जाएगा की अमेरिका ही इस दुनिया का सबसे पावरफुल देश है। अमेरिकन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस की शुरुआत कैसे हुई? इस बगावत का हिंदुस्तान से क्या कनेक्शन था? अमेरिका का संविधान कैसे बना? कैसे तय हुआ कि 13 कॉलोनी मिलकर एक नया देश बनाएंगी? अमेरिका की  आजादी को 4 जुलाई 2026 को 250 साल पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर एमआरआई का दो एपिसोड्स की सीरिज लेकर आ रहे हैं। जिसमें आपको मालूम चलेगा कि अमेरिकी क्रांति और वहां की आजादी का जो आईडिया है उसकी पूरी यात्रा कैसे हुई। उनमें क्या-क्या पड़ाव थे। 

अमेरिका की खोज से लेकर 13 ब्रिटिश कॉलोनियों की स्थापना का इतिहास

1453 में कतन दुनिया पर तुर्कों ने कब्जा कर लिया था जिससे यूरोप से ईस्टर्न कंट्रीज के ट्रेड रूट्स बंद हो गए थे जिसके बाद यूरोप के सेलर्स ने नए सी रूट्स ढूंढने शुरू कर दिए जिससे कि ईस्टर्न कंट्रीज के साथ यूरोप का ट्रेड किया जा सके भारत के लिए नए सी रूट की खोज में निकलस स्पीन का नाविक कोलंबस भटककर अटलांटिक ओशन को पार करता हुआ 1492 में एक बिल्कुल नई दुनिया में पहुंच गया। कोलंबस ने इस नए कॉन्टिनेंट को भारत समझकर यहां के नेटिव लोगों को रेड इंडियन कहा। इसके बाद 1499 में इटालियन ट्रेवलर अमर्जी यो वेस्पो की इस कॉन्टिनेंट पर पहुंचा जिसके नाम पर ही यहां का नाम अमेरिका पड़ा। यह कॉन्टिनेंट मिनरल रिसोर्सेस से भरा पड़ा था और यहां की जमीन भी बेहद ही फर्टाइल थी, जिसके कारण यूरोप के देश में इसे अपनी कॉलोनी बनाने को लेकर होड़ मची हुई थी। सबसे पहले स्पेन के लोगों ने अमेरिका के नेटिव लोगों को गुलाम बनाकर फार्मिंग करनी चाही। लेकिन वहां के लोकल्स ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसलिए अफ्रीका के लोगों को अमेरिका लाया गया और उन्हें गुलाम बनाकर उनसे खेती करवाई गई। इस तरह स्पेन ने अमरिका के कुछ जगहों पर अपनी कॉलोनी बना ली। फिर आया साल 1588 का जब स्पेन की नेवी और इंग्लैंड की नेवी के बीच भयानक युद्ध होता है और इंग्लैंड की नेवी को जीत मिलती है तो अब इंग्लैंड को अमेरिका में अपनी कॉलोनी बनाने का मौका मिल गया। नॉर्थ अमेरिका में इंग्लैंड ने अपनी पहली कॉलोनी जेम्स फस्ट के समय में 1600 साथ में बनाई जिसका नाम जेम्स टाउन रखा गया। फिर चार्ल्स फर्स्ट के समय कॉलोनी बनाने के काम तेजी में आया। 1630 में प्यूटन लोगों का एक ग्रुप नॉर्थ अमेरिका के बोस्टन में जाकर बस जाता है जिसके बाद धीरे-धीरे यूरोपियन भारी संख्या में अमेरिका में जाकर बस गए। 1607 से 1722 ईसवी आते-आते अमेरिका में ब्रिटिशर्स ने अपनी 13 कॉलोनी बना दी। कॉलोनी उस समय प्रॉपर्टी कमाने का एक बड़ा माध्यम था और यही कारण था कि यूरोपियन लगातार अमेरिका में जाकर बसने लगे। इसके साथ ही यूरोप में रिलीजन को लेकर हार्ड पॉलिसी थी। जिसके कारण भी यूरोपियन अमेरिका में आकर बसने लगे।

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इंग्लैंड की ज़रूरतें और अमेरिका का महत्व

इंग्लैंड में इंडस्ट्रियल इजेशन की शुरुआत हो चुकी थी इसलिए वहां पर रॉ मटेरियल की बहुत जरूरत थी ऐसे में अमेरिका रॉ मटेरियल उपलब्ध कराने के लिए सबसे सही जगह थी जहां रिसोर्स की कमी नहीं थी। इसके साथ ही इंग्लैंड को अपने तैयार प्रोडक्ट को बेचने के लिए एक बड़ी मार्केट की भी जरूरत थी और ऐसे में अमेरिका में मजदूरों और किसानों की भी जरूरत थी उस समय इंग्लैंड में एक पॉलिसी के चलते वहां के कई किसान लैंडलेस हो गए क्रिमिनल्स और भिखारियों की संख्या इंग्लैंड में बढ़ती चली गई थी फाइनेंशियल प्रॉब्लम से परेशान ऐसे ही लोगों को ब्रिटिश कंपनी अपने खर्च पर अमेरिका ले जाती थी और उनसे मजदूरी करवाती थी इस तरह अमेरिक कॉलोनी में ब्रिटेन जर्मनी फ्रांस अफ्रीका के साथ-साथ वहां के नेटिव लोगों का ग्रुप बसा हुआ था इस तरह यहां पर एक मिक्स्ड कल्चर सोसाइटी का जन्म हुआ सभी के डिफरेंट कल्चर होने के बाद भी कॉमन प्रॉब्लम होने के चलते यहां के लोगों में काफी यूनिटी थी यही कारण है कि यहां के लोगों में डेमोक्रेटिक आइडिया का भी डेवलपमेंट होने लगा इसी बीच अमेरिका में कॉलोनी को लेकर इंग्लैंड और अन्य देश के बीच कई लड़ाइयां भी हुई 1649 से 1658 तक इंग्लैंड और हॉलैंड के बीच तीन वॉर हुए इस वॉर में हॉलैंड को हार मिली जिसके चलते इंग्लैंड को न्यू एमस्टरडम मिला जिसका नाम बाद में न्यूयॉर्क रखा गया इसके बाद इंग्लैंड और फ्रांस के बीच कॉलोनी को लेकर टसल शुरू हुआ जिसमें 1713 में फ्रांस युद्ध हार गया जी हां दोस्तों जिसके चलते एग्रीमेंट के अकॉर्डिंग फ्रांस को स्टॉ केसिया नॉर्थ अमेरिका में हडसन की खाड़ी और न्यू फाउंडलैंड जैसी कॉलोनी से अपना कब्जा छोड़ना पड़ा लेकिन इसके बाद इंग्लैंड और फ्रांस के बीच कुछ कॉलोनी को लेकर लगातार टसल जारी रहा जिसके बाद अमेरिका की हिस्ट्री का सबसे फेमस वॉर शुरू हुआ जिसे ये सेवन इयर्स वॉर के नाम से जाना जाता है यह 1756 से 1763 तक लगातार जारी रहा इस वॉर में फ्रांस की हार हुई जिसके बाद पैरिस एग्रीमेंट के अकॉर्डिंग सेंट लॉरेंस नदी के ईस्ट का मिसिसिप्पी का पूरा एरिया इंग्लैंड को देना पड़ा तो इस तरह अमेरिका में ब्रिटेन की 13 कॉलोनियां बन चुकी थी।

तीन पार्ट में बंटी अमेरिकी कॉलोनी 

अमेरिक कॉलोनी को तीन पार्ट में डिवाइड किया जा सकता है नॉर्थ पार्ट में मैसाचुसेट्स न्यू हैम शयर और रोड्स आइलैंड यह पहाड़ी और बर्फी एरिया थे जो खेती के लायक नहीं थे। इंग्लैंड को यहां से मछली और लकड़ी प्राप्त होती थी मिड पार्ट में न्यूयॉर्क न्यू जर्सी मैरीलैंड जैसी कॉलोनी थी जहां से शराब और चीनी जैसी इंडस्ट्री चलती थी। साउथ पार्ट में नॉर्थ कोलिन साउथ कोलिन जॉर्जिया वर्जीनिया थे यहां का क्लाइमेट गर्म है इसलिए यहां मेनली ग्रीन शुगर केन तंबाकू कपास और बागानी फसलों का प्रोडक्शन होता था। इंग्लैंड इन कॉलोनी को सिर्फ अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा था दोस्तों जी हां इन कॉलोनी से कच्चा माल लेकर इंग्लैंड अपने यहां पर इंडस्ट्रीज में भेजता और फिर वहां प्रोडक्शन कर यहां अधिक दामों में बेच देता था जिसके कारण यहां के लोगों में गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा था यहां पर असल रूल अटलांटिक महासागर के पार से ब्रिटिश राज और अंग्रेजी पार्लियामेंट के द्वारा होता था हालांकि हर कॉलोनी में गवर्नर को एडवाइस देने के लिए एक इलेक्टेड असेंबली होती थी लेकिन फिर भी कॉलोनी के लिए कानून बनाने का अधिकार ब्रिटिश पार्लियामेंट को ही था कॉलोनी में एडमिनिस्ट्रेशन के हाई पोजीशंस पर इंग्लैंड से अधिकारी भेजे जाते थे इंग्लैंड की सरकारों का यह भरोसा था कि कॉलोनी के लोग हायर एडमिनिस्ट्रेशन पोजीशन के लिए क्वालिफाइड नहीं है।

अमेरिकी फ्रीडम मूवमेंट और 19 अप्रैल 1775 का कनेक्शन

अमेरिका के फ्रीडम मूवमेंट की शुरुआत 19 अप्रैल 1775 को लेक्सिंगटन के वॉर से हुआ बोस्टन के नजदीक लेक्सिंगटन में मैसाचुसेट्स ने बस्टन के गवर्नर द्वारा भेजी गई सेना पर आक्रमण कर दिया इसमें हार-जीत का निर्णय नहीं हो सका इसके बाद कॉलोनी ने फिलाडेल्फिया में 1776 में फिर से दूसरी कॉन्टिनेंटल कांग्रेस बुलाई जिसमें स्टेट्स को मिलाकर यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका नाम दिया गया इसके बाद 4 जुलाई 1776 को सभी राज्यों के रिप्रेजेंटेटिव ने मिलकर अपने आप को ब्रिटेन से आजाद घोषित कर लिया आजादी घोषणा के साथ ही कॉन्फ्रेंस ने मिलकर वाशिंगटन को अपना सेनापति नियुक्त किया और सभी ने मिलकर लड़ने के संकल्प लिया ब्रिटेन ने इस रिवोल्यूशन को कुचलने के लिए 45000 सैनिक भेजे थे दोस्तों 1776 के आखिरी छ महीनों में ब्रिटेन की फौज ने न्यूयॉर्क से कैनेडा तक विद्रोहियों की धज्जियां उड़ा दी जनरल विलियम हाव की लीडरशिप में वाशिंगटन की फौज को न्यूयॉर्क से लावेयर नदी तक खदेड़ दिया गया लेकिन फिर इसी के बाद अमेरिकन की जीत का सिलसिला शुरू होता है वाशिंगटन ने साल खत्म होते होते एक बड़ी जीत हासिल कर ली नए साल में ब्रिटिश हमला फिर से शुरू हुआ तब तक अमेरिकियों को अंग्रेजों के दुश्मन फ्रांस से हथियार और पैसा मिलना शुरू हो गया था।  फरवरी 1778 में फ्रांस ने अमेरिक आजादी को मान्यता दे दी और यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका की आर्मी से ट्रीटी कर ली। 

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