Prajatantra: हिमाचल में संकट में कैसे आई कांग्रेस, क्या भारी पड़ गई वीरभद्र फैमिली की नाराजगी?

By अंकित सिंह | Feb 28, 2024

हिमाचल प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के हार क्या हुई, राज्य में पार्टी की सरकार पर खतरे की घंटी दिखाई दे रही है। मात्र 14 महीने पहले उत्तर भारत के इस पहाड़ी राज्य में सरकार बनाने में कामयाब रही कांग्रेस को अब यहां सरकार बचाने के लिए तगड़ी मशक्कत करनी पड़ रही हैं। खबर यह है कि निलंबन और सियासी खींचतान के बीच हिमाचल विधानसभा में बजट पास हो गया है। सदन की कार्यवाही अनिश्चितकालीन स्थगित हो गई है। बीजेपी के 15 विधायकों को सस्पेंड किया गया था। इसके बाद अब सुक्कू सरकार को बड़ी राहत मिल गई है। सरकार से कुछ महीनों के लिए खतरा टलता दिखाई दे रहा है। हालांकि बड़ा सवाल यही है कि आखिर राज्य की कांग्रेस सरकार में इतनी बड़ी फुट कैसे आ गई, आखिर कांग्रेस अपने विधायकों को साथ क्यों नहीं रख सकी?

विक्रमादित्य के तेवर

भले ही वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह सुक्कू कैबिनेट में मंत्री बन गए। बावजूद इसके पार्टी लाइन से अलग उन्होंने ऐसे कई बयान दिए जो राज्य सरकार के मुश्किलें खड़ी करती रही। इसके अलावा अयोध्या में राम मंदिर उद्घाटन के दौरान भी उन्होंने पार्टी लाइन से अलग बयान दिया। उन्होंने खुद को कट्टर हिंदू भी बताया था। वह प्राण प्रतिष्ठा में भी शामिल हुए थे। विक्रमादित्य सिंह ने यह सब तब किया जब कांग्रेस ने कहा था कि वह प्राण प्रतिष्ठा में शामिल नहीं होगी। सुक्कू कैबिनेट से विक्रमादित्य सिंह ने इस्तीफा भी दे दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि उनके दिवंगत पिता के लिए इस सरकार ने सम्मान नहीं दिखाया।

रणनीतिक चूक

राज्यसभा चुनाव की बात करें तो यहां कांग्रेस को इस वजह से भी हार मिली क्योंकि पार्टी ने बाहरी उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी को राज्यसभा के चुनावी मैदान में उतारा था। जबकि भाजपा ने वीरभद्र सिंह के रणनीतिकार रहे हर्ष महाजन को पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के बावजूद भी अपना उम्मीदवार बनाया। हर्ष महाजन कुछ दिनों पहले ही भाजपा में शामिल हुए थे। उन्हें कांग्रेस विधायकों का करीबी भी माना जाता रहा है। इसके अलावा कांग्रेस ने आनंद शर्मा को टिकट न देकर बड़ी गलती की। आनंद शर्मा पार्टी के कद्दावर नेता रहे हैं और वह हिमाचल प्रदेश से ही आते हैं। आनंद शर्मा राज्यसभा जाना चाहते थे। लेकिन आलाकमान ने उन्हें टिकट नहीं दिया। 

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बगावत के मिल रहे थे संकेत

हालांकि ऐसा नहीं है कि कांग्रेस के भीतर यह बगावत अचानक ही हो गई। पार्टी के जिन 6 विधायकों ने बगावत किया, वह पहले से भी संकेत देते रहे हैं। इन सभी को वीरभद्र सिंह के कैंप का माना जाता है। यानी कि यह सभी विक्रमादित्य सिंह के करीबी हैं। हालांकि, दिलचस्प बात यह भी है कि इन विधायकों को मनाने के लिए कांग्रेस और सुक्कू सरकार की ओर से कोई कोशिश नहीं की गई। इनसे कोई संवाद नहीं हुआ। सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह विधायक लगातार संकेत भी दे रहे थे। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह जो पहले से ही नाराज चल रही थीं, उन्होंने भी इन विधायकों को मनाने की कुछ खास कोशिश नहीं की। वहीं, मुख्यमंत्री और सरकार में सर्वेसर्वा रहने के बावजूद सुक्कू ने तीन निर्दलीय विधायकों को भी भरोसे में नहीं लिया। 

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