America vs China में कैसे फंसा नेपाल, अब मोदी ही कभी हिंदू राष्ट्र रहे मुल्क की आग बुझाएंगे?

By अभिनय आकाश | Sep 09, 2025

अक्टूबर 2019 की बात है महीने की 27 तारीख को दीवाली थी। लेकिन नेपाल की राजधानी काठमांडू में करीब एक पखवाड़े पहले ही दिवाली का माहौल बन गया था। रंग रोगन का काम चल रहा था, गड्ढे भरे जा रहे थे। कुल मिलाकर बोलचाल की भाषा में कहें तो एकदम चकाचक बनाने की तैयारी हो रही थी। यह सारी तैयारी पड़ोसी देश से आ रहे खास मेहमान के लिए थी। खास मेहमान थे शी जिनपिंग, चीन के राष्ट्रपति। उनसे पहले 1996 में आए थे जियांग जेमिन दोनों राष्ट्रपतियों के नेपाल आने के बीच 23 साल का फासला रहा। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह थी नेपाल और भारत की दोस्ती। कुछ सालों में यह समीकरण बदलने लगा और दोनों देशों के बीच रिश्तों में ठंडापन आ गया। नेपाल की गर्मजोशी उसकी उत्तर की दिशा यानी चीन के तरफ शिफ्ट होती जा रही है। केपी ओली को हमेशा से ही चीन के लिए झुकाव रखने वाला पीएम माना जाता है। पीएम पद संभालते ही ओली ने कहा कि जहां वह चीन साथ संबंधों को और गहरा करना चाहते हैं तो वहीं भारत के साथ समझौतों में अधिक फायदा लेंगे। केपी शर्मा ओली के कार्यकाल में चीन के प्रति झुकाव बढ़ा है। पिछले कुछ वर्षों में नेपाल ने भारत की आपत्तियों के बावजूद चीन के साथ कई तरह के समझौते किये हैं। नेपाल ने चीन की कंपनियों को अपने यहां एनर्जी खोज की अनुमति दी है। नेपाल अब इंटरनेट सेवाओं के लिए भी भारत पर निर्भर नहीं रहा, बल्कि चीन की मदद मिलने लगी है। चीन की वन बेल्ट-वन रोड (ओबोर) परियोजना में भी नेपाल शामिल है और इसके लिए दोनो के बीच समझौते भी हुए हैं।

इसे भी पढ़ें: Nepal Gen Z protest: मौजूदा स्थिति पर भारत चिंतित, बताया- हालात पर हमारी करीब से नजर

बयानबहादुर बन नेपाल भारत को ही दिखाने लगा आंखें 

ओली ने 2021 में कहा था कि योग भारत से नहीं, नेपाल से शुरू हुआ था। योग शुरू हुआ तब भारत का अस्तित्व नहीं था।' कोविड में तो संसद में ही कह दिया, 'भारत से आया वायरस चीन और इटली के वायरस से खतरनाक है।' हर बयान भारत-नेपाल रिश्तों में तनाव की नई परत जोड़ता गया। जुलाई, 2024 में चौथी बार पीएम बने तो पहले भारत दौरे की परंपरा तोड़कर बीजिंग जाना चुना। चीनी कंपनी को ठेका देकर नेपाल के विवादित नक्शे वाले नोट छापे। हाल में एससीओ समिट में राष्ट्रपति जिनपिंग के समक्ष लिपुलेख पर आपत्ति भी जताई। यह वही इलाका है, जिसे भारत-चीन ने ट्रेड रूट के तौर पर खोलने का समझौता किया था। राष्ट्रवाद की आड़ में उनकी राजनीति भारत-विरोध और चीन-परस्ती पर ही चलती है। हालांकि, नेपाल में ही आरोप लगते रहे हैं कि अपनी विफलताएं छिपाने के लिए वे भारत के साथ विवाद छेड़ते हैं।

नेपाल में चीन की दिलचस्पी की वजह

दिल से दिल मिलने का कोई कारण होगा। बिना कारण कोई बात नहीं होती। चीन भारत के पड़ोस में अपना नेटवर्क मजबूत करने के प्रयास में है। श्रीलंका और मालदीव के बाद नेपाल को भी अपने पक्ष में करना चाहता है। चीन चीन का पुराना फार्मूला है इन्वेस्टमेंट, श्रीलंका हो या मालदेव पाकिस्तान हो या नेपाल, इन देशों में खूब इनवेस्ट करता है और तरक्की के सपने बेचता है और फिर इसी कर्ज की राह अपने सामरिक हित साधता है। नेपाल स्वयं में एक छोटा राष्ट्र है जो एक तरफ भारत तथा दूसरी तरफ चीन से घिरा हुआ है. चूंकि भारत एवं चीन मौलिक रूप से एक दूसरे के परस्पर विरोधी साबित हुए हैं, इसके चलते आधुनिक समय में नेपाल के अंदर किसी भी प्रकार की अस्थिरता उत्पन्न होने की प्रबल संभावना बनी होती है। समय के साथ, चीन की गतिविधियां नेपाल के अंदर बढ़ती ही जा रही है, इससे पहले की नेपाल चीन के 'कब्जे' में पूरी तरह से आ जाये, यह नितांत आवश्यक है कि भारत-नेपाल संबंध में जमी बर्फ पिघले और दोनों के रिश्ते बेहतर हो।

भारत पर कितना निर्भर है नेपाल

भारत से पेट्रोलियम उत्पाद, चावल दवाइयों का आयात

विदेशी निवेश में भारत की 30% से ज्यादा हिस्सेदारी

भारत की बैंकिंग, बीमा, शिक्षा, पर्यटन से जुड़ी 150 कंपनियां नेपाल में

भारत में 20 से 25 लाख नेपाली नागरिक

प्रमुख खबरें

महंगाई का डबल झटका: April Inflation Rate साल के शिखर पर, RBI ने भी दी बड़ी Warning

WPL 2025 की Star Shabnim Ismail की वापसी, T20 World Cup में South Africa के लिए फिर गरजेंगी

क्रिकेट में Rahul Dravid की नई पारी, European T20 League की Dublin फ्रेंचाइजी के बने मालिक

El Clásico का हाई ड्रामा, Barcelona स्टार Gavi और Vinicius के बीच हाथापाई की नौबत