Chai Par Sameeksha: Nitish कैसे बने लाड़ले? कैसी CM हैं Rekha? हिंदी का विरोध क्यों कर रहे स्टालिन?

By अंकित सिंह | Mar 03, 2025

प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने दिल्ली की राजनीति, बिहार पर भाजपा का फोकस और हिंदी को लेकर तमिलनाडु में विवाद पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे ने सबसे पहले कहा कि जिस तरीके से दिल्ली में मुख्यमंत्री पद संभालने के साथ रेखा गुप्ता ने काम कर करना शुरू किया है, उससे साफ तौर पर जाहिर होता है कि वह एक मजबूत मुख्यमंत्री साबित होने वाली हैं। साथ ही साथ उन्होंने मजबूती से विधानसभा हो या उसके बाहर, अपना पक्ष रखा है। इससे साफ तौर पर पता चलता है कि आखिर रेखा गुप्ता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने क्यों विश्वास किया। रेखा गुप्ता के भाषणों में दिल्ली के लिए स्पष्ट विजन दिखाई देता है।

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बिहार को लेकर नीरज कुमार दुबे ने कहा कि बिहार को लेकर जो कुछ भी फैसला होगा, वह भाजपा आलाकमान ही करेगा। बिहार के भाजपा नेता नीतीश कुमार को लेकर क्या कहते हैं, उससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। भले ही भाजपा को सात मंत्री पद मिल गए हो लेकिन इससे जदयू को कमजोर नहीं रखा जा सकता है और जदयू तो आधा की साझेदार है। केंद्र में वह आपके साथ है, बिहार में आप उनके साथ है। ऐसे में भाजपा को नीतीश को हल्के में नहीं लेना चाहिए। प्रदेश के नेता कई बार सुर्खियों में रहने के लिए इस तरीके का बयान दे देते हैं। लेकिन चुनावी साल में इस तरीके के बयान आते रहेंगे। हालांकि, नीतीश कुमार आज भी भाजपा के लिए अहम सहयोगी बने हुए हैं, तभी प्रधानमंत्री उन्हें लाडले कह रहे हैं। बीजेपी के सामने नीतीश आज भी मजबूत है और जब सीट बंटवारा होगा तो इसमें यह देखने को भी मिलेगा।

तमिलनाडु को लेकर नीरज कुमार दुबे ने कहा कि वहां की अपनी राजनीति है, तमिलनाडु में अगले साल चुनाव होने हैं। एमके स्टालिन के पास अब बताने के लिए बहुत ज्यादा नहीं है इसलिए वह भावनात्मक मुद्दे उठा रहे हैं। तमिलनाडु के लोग हिंदी से प्यार करते हैं। हम लोग भी जो उत्तर भारत में रहते हैं। वह तमिल भाषा को पसंद करते हैं, ऐसे में जिस तरीके से स्टालिन का बयान सामने आ रहा है। वह भारत में ही मतभेद को बढ़ा सकता है। इसके अलावा परिसीमन को लेकर जो एमके स्टालिन कह रहे हैं। वह सही नहीं है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ही किसी चीज को किया जाएगा और इसको लेकर बहुत ज्यादा हो हल्ला करने की जरूरत नहीं है।

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