कैसे गुपचुप तरीके से ईरान के साथ युद्ध में शामिल हो गया UAE? तेल रिफाइनरी को बनाया था निशाना

By अभिनय आकाश | May 12, 2026

संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान पर सैन्य हमले किए हैं, जिससे खाड़ी राजशाही ईरान के उस युद्ध में एक सक्रिय लड़ाकू के रूप में उभर रही है जिसमें ईरान का सबसे बड़ा निशाना वही देश रहा है। उसकी सेना पश्चिमी देशों में निर्मित लड़ाकू विमानों और निगरानी नेटवर्क से सुसज्जित है। और ये हमले संकेत देते हैं कि देश अब अपनी आर्थिक शक्ति और मध्य पूर्व में बढ़ते प्रभाव की रक्षा के लिए इनका उपयोग करने को अधिक इच्छुक है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में दावा किया है कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अप्रैल की शुरुआत में ईरान पर गुप्त रूप से सीधे हमले किए। रिपोर्ट के अनुसार, यूएई ने ईरानी क्षेत्र में हमले करके मध्य पूर्व के चल रहे संघर्ष में प्रवेश किया। रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात ने फारस की खाड़ी में लावन द्वीप पर स्थित ईरान की रिफाइनरी को निशाना बनाया। 2020 तक यह ईरान की 10वीं सबसे बड़ी रिफाइनरी थी और प्रतिदिन लगभग 60,000 बैरल कच्चे तेल का प्रसंस्करण कर रही थी।

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यूएई ने ईरान पर हमला किया: अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं

अब तक, यूएई की ओर से इन कथित हमलों के संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यूएई के विदेश मंत्रालय ने पहले ही कहा था कि देश शत्रुतापूर्ण कृत्यों का सैन्य जवाब देगा। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने क्षेत्रीय गतिविधियों में यूएई की भागीदारी का स्वागत किया, यह देखते हुए कि उस समय तक युद्धविराम लागू नहीं हुआ था।

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ईरान के साथ युद्धविराम नाजुक स्थिति में है: ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम ‘‘बेहद कमजोर और नाजुक’’ स्थिति में है। ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध पर उसके शांति प्रस्ताव को एक दिन पहले ‘‘पूरी तरह से अस्वीकार्य’’ बताते हुए खारिज कर दिया था। शांति प्रस्ताव को अस्वीकार करने के बाद ईरान के साथ युद्धविराम पर एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने ‘ओवल ऑफिस’ (राष्ट्रपति के कार्यालय) में पत्रकारों से कहा, ‘‘यह अपनी सबसे कमजोर स्थिति में है... उन्होंने जो बकवास हमें भेजा, उसे पढ़ने के बाद... तो यह गंभीर नाजुक स्थिति में है।’’ ट्रंप ने कहा, ‘‘उन्हें लगता है कि मैं इससे थक जाऊंगा, या ऊब जाऊंगा, या मुझ पर कुछ दबाव आ जाएगा, लेकिन कोई दबाव नहीं है, बिल्कुल भी दबाव नहीं है। हमें पूरी जीत मिलेगी।’’ ट्रंप को रविवार को ईरान का प्रस्ताव मिला, जिससे उम्मीद जगी थी कि इससे ईरान के साथ 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध को समाप्त करने में कोई सफलता मिल सकती है। इस युद्ध ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को अवरुद्ध कर दिया है, जिससे कई देशों में ईंधन की कमी हो गई है। उन्होंने रविवार को अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, ‘‘मैंने अभी ईरान के तथाकथित ‘प्रतिनिधियों’ की प्रतिक्रिया पढ़ी है। मुझे यह पसंद नहीं आया, यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।’’ अमेरिका और इजराइल के बीच 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के बाद आठ अप्रैल से हमले रोक दिए गए हैं, जब युद्धरत पक्षों ने युद्धविराम पर सहमति जताई थी। अमेरिका और ईरान स्थायी रूप से शत्रुता समाप्त करने के लिए एक समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। अमेरिका इस बात पर जोर दे रहा है कि ईरान अपने ऊपर लगे प्रतिबंधों को हटाने और अरबों डॉलर की जब्त ईरानी संपत्ति को जारी करने के बदले में अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को समाप्त करने के संबंध में स्पष्ट और ठोस वादा करे। इन वार्ताओं में ईरान और अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी हटाने का भी प्रावधान भी शामिल है, जो वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति के पांचवें हिस्से के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है।

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