यूरोप की कट्टरपंथी लहर ने ब्रिटेन में दस्तक देते हुए कैसे राजनीति में मचा दिया भूचाल, PM स्टार्मर की चली जाएगी कुर्सी?

By अभिनय आकाश | May 18, 2026

ब्रिटेन की राजनीति में इस समय बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को लेकर इस्तीफे की अटकलें और तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लेबर पार्टी के अंदर बढ़ते दबाव और खराब राजनीतिक माहौल के कारण स्टार्मर अपनी कुर्सी छोड़ सकते हैं। बताया जा रहा है कि वह सम्मानजनक तरीके से पद छोड़ने की रणनीति बना रहे हैं। इस बीच लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व स्वास्थ्य सचिव वैस स्ट्रिंग के बयान ने ब्रिटिश राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। वैस ने खुलकर कहा है कि ब्रेग्जिट यानी यूरोपियन संघ से अलग होना ब्रिटेन की बहुत बड़ी गलती थी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ब्रिटेन को दोबारा यूरोपियन संघ के करीब जाना होगा। उनके मुताबिक ब्रिटेन का भविष्य यूरोप से जुड़ा हुआ है और एक दिन ऐसा भी आ सकता है जब ब्रिटेन फिर से यूरोपियन संघ में शामिल हो जाए। स्ट्रिंग के इस बयान के बाद लेबर पार्टी के अंदर सत्ता संघर्ष की चर्चा तेज होगी। माना जा रहा है कि अगर स्टारमर इस्तीफा देते हैं तो वैस खुद पार्टी नेतृत्व की दौड़ में उतर सकते हैं। वहीं स्टार्मर की मुश्किलें हाल ही में सामने आई। जेफरी एपस्टिन विवाद के बाद और बढ़ गई। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि लेबर पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं के एब्सस्टीन से संबंध की जानकारी पहले से ही मौजूद थी। हालांकि इस मामले में कोई आधिकारिक आरोप साबित नहीं हुआ है। लेकिन विपक्ष लगातार सरकार और पार्टी पर सवाल उठा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लेबर पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन होता है और यूरोप समर्थक नेता मजबूत होते हैं तो ब्रिटेन और यूरोपियन संघ के रिश्तों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 12 मई को कैबिनेट मीटिंग के दौरान स्टार्मर रिजाइन करने से मना कर दिया है। इसके बाद स्टार्मर सरकार के एक जूनियर मंत्री ने इस्तीफा दे दिया। कुछ सहयोगी भी पहले ही सरकार छोड़ चुके हैं। अब 80 से ज्यादा लेबर सांसद खुलकर यह मांग कर चुके हैं कि कीर स्टार्मर अपने इस्तीफे की तारीख तय करें ताकि पार्टी व्यवस्थित तरीके से अपना नया नेता चुन सके। ऐसे में पहला बड़ा सवाल तो यही है कि 2 साल पहले ही इतनी बड़ी बहुमत के साथ जीतकर 10 डाउनिंग स्ट्रीट पहुंचे स्टारमर पर अब कुर्सी छिनने का खतरा क्यों मंडरा रहा है?

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9 साल के भीतर स्टार्मर ने पूरा किया पीएम का सफर

14 साल बाद 2024 में लेबर पार्टी को इंग्लैंड के चुनाव में ऐतिहासिक जीत दिलाई थी। कीर ने सांसद बनने के मात्र 9 साल के भीतर प्रधानमंत्री पद तक का सफर पूरा किया। ब्रिटेन के 50 साल के इतिहास में पहले व्यक्ति थे जो 60 की उम्र के बाद पीएम बने। स्टार्मर खुद को नास्तिक कहते हैं, लेकिन पत्नी की यहूदी मान्यताओं का पूरा सम्मान करते हैं।  ब्रिटेन को 'क्लीन एनर्जी सुपरपावर' बनाने का लक्ष्य रखा है। 'ग्रेट ब्रिटिश एनर्जी' कंपनी बनाएंगे। कीर कहते हैं फुटबॉल के मैदान पर वे न 'सर' होते हैं न ही नेता। वे आम इंसान बन जाते हैं। यूनिवर्सिटी लाइफ में दक्षिण फ्रांस के फ्रेंच रिवेरा इलाके में आइसक्रीम बेचकर पैसा कमाने का सोचा। पुलिस ने आइसक्रीम जब्त की कर ली। पब्लिक प्रॉसिक्यूशन के डायरेक्टर पद के दौरान वे नियमों और डिटेल को लेकर इतने सख्त थे कि साथियों ने उन्हें मि. रूल्स नाम दे दिया था।

जेफरी एपस्टीन की बातचीत का मामला क्या है?

स्टार्मर की घटती पॉपुलैरिटी ये जो है इसकी वजह सिर्फ लोकल इलेक्शंस नहीं है। पिछले कई महीनों से स्टार्मर की स्थिति कमजोर होती जा रही है। वे खराब अर्थव्यवस्था, अवैध प्रवास को लेकर जनता की नाराजगी झेल रहे हैं। अमेरिका में ब्रिटेन के राजदूत रहे पीटर मैडलसन की नियुक्ति भी विवाद बन गई थी। पिछले सितंबर ब्रिटिश मीडिया ने मेंडिलसन और जेफरी एपस्टीन की बातचीत के कई ईमेल्स शेयर किए थे। जिसके बाद उन्हें पद से हटाना पड़ा था। इसके बाद मेंडलसन पर आरोप लगे कि उन्होंने 2006 2007 के वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान एपस्टीन के साथ वित्तीय बाजारों से जुड़ी सेंसिटिव जानकारी साझा की थी। कीर स्टारमर पर आरोप लगा कि उन्होंने वार्निंग्स को नजरअंदाज किया और एपस्टीन से मेंडलसन के रिश्तों की जानकारी होने के बावजूद उन्हें राजदूत बना दिया। बवाल के बाद स्टार्मर ने सार्वजनिक तौर पर माफी भी मांगी थी। उन्होंने कहा कि उन्हें यह नहीं पता था कि मेंडलसन और एपस्टीन इतने करीब थे। इन सब घटनाओं की वजह से स्टार्मर की लोकप्रियता पश्चिमी देशों के नेताओं में सबसे नीचे मानी जा रही है।

यूरोप में कट्टरपंथी बढ़त

इमिग्रेशन ने कट्टरपंथी पार्टियों को यूरोप में मुख्यधारा में ला दिया है। जर्मनी में एएफडी 2021 की 83 सीटों से 2025 में 152 पर पहुंची। फ्रांस में नेशनल रैली 2022 की 89 सीटों से 2024 में 142 सीटों तक पहुंची। इटली में जॉर्जिया मेलोनी की ब्रदर्स ऑफ इटली 2018 की 32 सीटों से 2022 में 119 सीटों तक पहुंची और सत्ता में आ गई।

स्थायी निवास खत्म और 'ब्रिटिश वर्कर फर्स्ट'

निगेल फराज की रिफॉर्म यूके राजनीति का मुख्य मुद्दा इमिग्रेशन है। पार्टी गैर-कानूनी माइग्रेंट्स को सीधे डिपोर्ट करने बात करती है। यूरोपियन कन्वेंशन ऑन ह्यूमन राइट्स छोड़ने और ह्यूमन राइट्स एक्ट खत्म करने का वादा है। फराज ब्रिटेन में स्थायी निवास अधिकार खत्म कर 5 साल का रिन्यूएबल वीजा चाहते हैं; ऊंची सैलरी और वेलफेयर बैन भी शर्त होगी। 

ब्रिटेन में 18.6 लाख भारतीय

आंकड़े के मुताबिक ब्रिटेन में 18.64 लाख भारतीय हैं इसलिए रिफॉर्म यूके इमिग्रेशन सख्ती का असर छात्रों, वर्कर्स और परिवारों तक जाएगा। स्किल्ड वर्कर वीसा की फीस 1.84 से 2.12 लाख रुपए है। हेल्थ सरचार्ज 1.18 लाख रु. सालाना है। यानी 5 साल में हेल्थ सरचार्ज ही करीब 5.90 लाख रु. होगा। कुल मिलाकर हर रिन्यूअल पर प्रति व्यक्ति 8.02 लाख रु. खर्च हो सकता है। 

ये 4 लेबर नेता स्टार्मर को दे रहे चुनौती

वेस स्ट्रीटिंगः 43 वर्षीय पूर्व स्वास्थ्य मंत्री कैबिनेट छोड़कर सीधे नेतृत्व चुनौती देने वाले पहले बड़े लेबर नेता। आरोप- स्टारमर में 'विजन और दिशा' नहीं। स्थानीय चुनावों की हार को वे जनता की चेतावनी बता रहे हैं। ईयू से जुड़ने की वकालात।

एंडी बर्नहमः ग्रेटर मैनचेस्टर मेयर और पूर्व हेल्थ मंत्री। उपचुनाव जीतकर संसद लौटना चाहते हैं। जीतने पर नेतृत्व चुनौती दे सकते हैं। मुद्दा लेबर कामकाजी वर्ग से कट गई। महंग जरूरी सेवाएं और स्टारमर मॉडल की कमजोरी बता रहे हैं।

जोश साइमंसः मेकरफील्ड से सांसद 32 साल के साइमंस अपनी सीट एंडी बर्नहम के लिए छोड़ने को तैयार। वे बर्नहम की संसद वापसी का रास्ता बना रहे हैं। दावा- स्टारमर नेतृत्व में लेबर स्थानीय चुनावों में कमजोर हुई और नया चेहरा चाहिए।

लिसा नंदीः भारतीय मूल की लिसा नेंडी मौजूदा सरकार में संस्कृति मंत्री हैं। मौजूदा हालात में उनका समर्थन भी स्टारमर विरोधी बर्नहम खेमे को है। लिसा 2020 में लेबर पार्टी के नेतृत्व पद के लिए चुनाव में अंतिम 3 उम्मीदवारों में से एक थीं।

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