By अभिनय आकाश | Jul 03, 2026
जब भी दुनिया के दो सबसे पक्के दोस्तों की बात होती है तो भारत और जापान का नाम सबसे ऊपर आता है। यह सिर्फ दो देशों का व्यापारिक समझौता नहीं है बल्कि यह दिल का रिश्ता है जहां एक तरफ जापान ने भारत को आधुनिक तकनीक, रफ्तार और आर्थिक मजबूती दी। वहीं भारत ने जापान को मानसिक शांति, सांस्कृतिक, बौद्ध धर्म और जीने का एक नया नजरिया दिया है। आज हम और आप जिस मेट्रो में सफर करते हैं, उसकी शुरुआत में जापान का बहुत बड़ा हाथ है। दिल्ली मेट्रो से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे मेट्रो प्रोजेक्ट्स और मुंबई, अहमदाबाद, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में जापान ने ना सिर्फ भारीभरकम आर्थिक मदद यानी लोन और निवेश दी है। बल्कि अपनी सबसे बेस्ट शिनकसेस तकनीक भी भारत को साझा की है। लेकिन बात यहीं नहीं रुकती। आज के डिजिटल युग में जापान भारत को भविष्य की सबसे बड़ी ताकतें दे रहा है। जैसे सेमीकंडक्टर और कंप्यूटर माइक्रो चिप्स।
जापान की बहुसंख्यक आबादी बौद्ध धर्म को मानने वाली है। छठी शताब्दी में भारत से चीन और कोरिया होते हुए बौद्ध धर्म जापान पहुंचा। आज जापान की संस्कृति, वहां के लोगों का अनुशासन और शांत स्वभाव इसी बौद्ध दर्शन की देन है। जापान के कई देवी देवता सीधे तौर पर हमारे हिंदू देवी देवताओं से प्रेरित रहे हैं। उदाहरण के तौर पर देखें तो मां सरस्वती को वहां पे बेंजाइतेन और कुबेर जी को विषमुतेन कहा जाता है। अब आते हैं योग और अध्यात्म पर। आज के तनाव भरे माहौल में जापान के लोग मानसिक शांति के लिए भारतीय योग और अध्यात्म को तेजी से अपना रहे हैं। टोक्यो जैसे बड़े शहरों में तो योग स्टूडियोज की तो जैसे बाढ़ ही आ गई है। साथ ही भारत ने जापान को बड़े स्तर पर लौ अयस्क दी है। जब दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान पूरी तरह से तबाह बर्बाद हो गया था, और उसे दोबारा खड़ा होने के लिए कच्चे माल की जरूरत थी, तब भारत ने जापान को भारी मात्रा में हाई क्वालिटी का लोहा दिया था। इसी लोहे से जापान ने अपनी मजबूत इमारतें, कारें और ट्रेनें बनाई। देखा जाए तो दोस्ती के इस रिश्ते को लेकर दोनों देशों के बीच कमाल का संतुलन है। भारत के पास युवा आबादी है तो एक बहुत बड़ा बाजार भी है। जबकि जापान के पास अनुभव, तकनीक और पैसा है। साथियों, जब भारत की ताकत और जापान की तकनीक मिलती है तो दुनिया की बड़ी से बड़ी चुनौतियां भी छोटी लगने लगती है।
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