Jan Gan Man: Defence Ministry के स्पष्टीकरण के बावजूद Rajnath Singh पर हमलावर क्यों है Congress? अंदर की बात जानकर चौंक जाएंगे!

By नीरज कुमार दुबे | Jun 30, 2026

इस साल संसद के बजट सत्र में जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब के कथित अंशों का सहारा लेकर मोदी सरकार और भारतीय सेना की कार्यशैली पर सवाल उठाने की कोशिश की थी, तभी यह साफ हो गया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर भी कांग्रेस राजनीति का अवसर तलाश रही है। उस समय लोकसभा अध्यक्ष ने साफ तौर पर कहा था कि अप्रकाशित सामग्री को सदन में उद्धृत नहीं किया जा सकता, लेकिन कांग्रेस ने नियमों की अनदेखी करते हुए विवाद खड़ा करने की कोशिश जारी रखी। अब जबकि संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने वाला है, तब कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस देकर एक बार फिर वही रणनीति अपनाई है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार बहाना ऑपरेशन सिंदूर को बनाया गया है।

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हम आपको बता दें कि रक्षा मंत्रालय ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा है कि राजनाथ सिंह के बयान को जानबूझकर तोड़ मरोड़कर पेश किया गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार उस समय मीडिया और सोशल मीडिया पर यह दुष्प्रचार फैलाया जा रहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के पायलट मारे गए थे और रॉफेल विमान गिरा दिए गए थे। यह पूरी तरह झूठा और दुर्भावनापूर्ण प्रचार था, जिसका उद्देश्य भारत की सैन्य सफलता को कमतर दिखाना और जनता का मनोबल गिराना था। रक्षा मंत्री ने संसद में उसी दुष्प्रचार का जवाब देते हुए कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर में हमारे सैनिकों को वह क्षति नहीं हुई, जिसका झूठा प्रचार किया जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय ने यह भी साफ कर दिया कि छह जवानों के बलिदान को कभी छिपाया नहीं गया। इन वीर जवानों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दर्ज किए गए हैं और उनके परिवारों को सभी सरकारी सुविधाएं तथा सम्मान दिए गए हैं। ऐसे में कांग्रेस का यह आरोप कि सरकार ने शहादत छिपाई, तथ्यहीन और राजनीति से प्रेरित प्रतीत होता है। सवाल यह है कि यदि सरकार कुछ छिपाना चाहती तो क्या राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और सरकारी अभिलेखों में इन नामों को दर्ज करती?

दरअसल कांग्रेस का यह रवैया नया नहीं है। यही वह पार्टी है जिसने रॉफेल सौदे पर लगातार झूठे आरोप लगाए और देश की रक्षा तैयारियों को संदेह के घेरे में खड़ा करने की कोशिश की। यही वह पार्टी है जिसके नेता सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के सबूत मांगते रहे। अब ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी वही राजनीति दोहराई जा रही है। कभी कहा जाता है कि रॉफेल विमान गिर गया, कभी सेना की कार्रवाई पर सवाल उठाए जाते हैं और कभी रक्षा मंत्री के बयान को संदर्भ से काटकर प्रस्तुत किया जाता है। यह सब महज संयोग नहीं बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक अभियान नजर आता है।

देखा जाये तो ऑपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद विरोधी कार्रवाई का महत्वपूर्ण अध्याय था। पहलगाम आतंकी हमले के बाद सात मई 2025 को शुरू हुए इस अभियान में भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ढांचों को निशाना बनाया। इस कार्रवाई में सौ से अधिक आतंकवादी और पाकिस्तानी सैनिक मारे गए तथा पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद को संरक्षण देने वालों को अब सीधे जवाब का सामना करना पड़ेगा। लेकिन कांग्रेस ने इस सैन्य सफलता को राष्ट्रीय उपलब्धि की तरह देखने की बजाय उसमें भी राजनीतिक अवसर तलाशना ज्यादा जरूरी समझा।

राजनाथ सिंह के इस्तीफे की माँग कर रही कांग्रेस को यह भी पता होना चाहिए कि रक्षा मंत्री के रूप में राजनाथ सिंह का कार्यकाल भारत की सैन्य ताकत, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक क्षमता को नई ऊंचाई देने वाला रहा है। उनके नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को अभूतपूर्व गति मिली है। रक्षा उत्पादन वर्ष 2013-14 के लगभग 44 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि रक्षा निर्यात भी कई गुना बढ़कर 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। राजनाथ सिंह ने केवल हथियार खरीद की नीति तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि भारत को रक्षा निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में लगातार काम किया। तेजस, प्रचंड, आकाश और अत्याधुनिक स्वदेशी प्रणालियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन्होंने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार देकर अनुसंधान परियोजनाओं को तेज करने का काम किया। उनके कार्यकाल में तीनों सेनाओं के बीच समन्वय, थिएटर कमांड की दिशा में प्रगति, आधुनिक युद्ध तकनीकों को अपनाने, ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित युद्ध क्षमता को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। रॉफेल जैसे अत्याधुनिक युद्धक विमानों की क्षमता विस्तार के साथ-साथ स्वदेशी निर्माण पर भी बल दिया गया, जिससे भारत की सामरिक स्थिति पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुई है।

साथ ही कांग्रेस के शासनकाल और मौजूदा दौर के बीच सबसे बड़ा अंतर रक्षा क्षेत्र में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का दिखाई देता है। कांग्रेस सरकार के समय तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी के कार्यकाल में बार बार यह खबरें सामने आती थीं कि भारतीय सेना के पास सीमित दिनों का ही असला बचा है और कई प्रकार के गोला बारूद की भारी कमी है। वर्ष 2012 में सेना के गोला बारूद भंडार को लेकर गंभीर सवाल उठे थे और बाद में सरकार को संसद में यह स्वीकार करना पड़ा था कि कुछ श्रेणियों में अस्थायी कमी थी, जिसे आपात खरीद के जरिए पूरा किया गया। इतना ही नहीं, वर्ष 2014 में एके एंटनी ने खुद सार्वजनिक रूप से माना था कि रक्षा मंत्रालय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है और धन की कमी के कारण रॉफेल जैसे महत्वपूर्ण सौदों को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। उस दौर में भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए लगभग सत्तर प्रतिशत तक विदेशी आयात पर निर्भर था। इसके उलट राजनाथ सिंह के कार्यकाल में भारत ने रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव देखा है। आज भारत केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं बल्कि रक्षा उपकरणों का तेजी से उभरता निर्यातक बन चुका है। स्वदेशी रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है और मिसाइल, हेलिकाप्टर, तोप, रडार, ड्रोन तथा युद्धक प्रणालियों का निर्यात अनेक देशों को किया जा रहा है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में जो बदलाव आए हैं, उन्होंने भारत को रणनीतिक रूप से कहीं अधिक मजबूत और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है।

देखा जाये तो विडंबना यह भी है कि एक ओर भारतीय सेना तेजी से आधुनिक युद्ध की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष का एक वर्ग लगातार सेना और सरकार की नीयत पर सवाल उठाकर भ्रम पैदा करने में लगा है। सेना भविष्य के तकनीक आधारित युद्ध की तैयारी कर रही है, लेकिन कांग्रेस की राजनीति अब भी पुराने आरोपों और अविश्वास की मानसिकता में फंसी दिखाई देती है। इसमें कोई दो राय नहीं कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना का मनोबल किसी भी लोकतंत्र में दलगत राजनीति से ऊपर होना चाहिए। आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन झूठे आरोप, अधूरी जानकारी और संदर्भ से काटे गए बयान राष्ट्रीय हित को नुकसान पहुंचाते हैं। संसद में अप्रकाशित किताबों के सहारे विवाद पैदा करने से लेकर ऑपरेशन सिंदूर पर भ्रम फैलाने तक कांग्रेस का आचरण यही दर्शाता है कि वह रक्षा मामलों को भी राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटती।

बहरहाल, देश की जनता यह देख रही है कि एक तरफ भारतीय सेनाएं सीमाओं पर नई चुनौतियों से मुकाबला कर रही हैं, आधुनिक तकनीकों को अपना रही हैं और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई कर रही हैं, जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस बार बार उन्हीं संस्थाओं पर संदेह का वातावरण खड़ा करने की कोशिश करती है जिन पर देश को सबसे अधिक भरोसा है। लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, लेकिन जब विपक्ष तथ्यों की बजाय भ्रम और राजनीति को प्राथमिकता देने लगे तो उसकी विश्वसनीयता खुद कमजोर होने लगती है।

-नीरज कुमार दुबे

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