By प्रिया मिश्रा | Aug 07, 2021
आजकल वजन घटाने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग एक बहुत प्रचलित डाइट विकल्प बन गया है। इस डाइट प्लान में नियमित रूप से उपवास और खाने की अवधि शामिल है। इस डाइट में व्यक्ति को 10, 12, 14 या 16 घंटे के लिए फास्टिंग करने की जरूरत होती है। इंटरमिटेंट फास्टिंग से वजन जल्दी घटता है लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं। खासतौर पर महिलाओं का शरीर ज़्यादा संवेदनशील होने के कारण उन्हें इससे कई परेशानियाँ हो सकती हैं। इससे आपका मेटाबॉलिज़्म कमजोर हो सकता है और आपके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर हो सकता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग का लाभ पाने के लिए जरुरी है कि आप फास्टिंग का समय कम रखें और इंटरमिटेंट फास्टिंग को भी लंबे समय तक ना चलाएं। आइए जानते हैं कि इंटरमिटेंट फास्टिंग से महिलाओं को क्या परेशानियाँ हो सकती हैं-
कुछ लोगों को रात के समय ज़्यादा भूख लगती है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो इंटरमिटेंट फास्टिंग करना मुश्किल हो सकता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग में उपवास के दौरान खाना खाने की मनाही होती है। ऐसे में, शुरुआत में आपको खाने के पैटर्न के अनुसार ढलने में थोड़ी मुश्किल हो सकती है। इसके साथ ही भूख के कारण आपकी नींद खराब हो सकती है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग में एक तय समय अवधि के लिए उपवास रखना होता है। भले ही इस डाइट में आप प्रोटीन, कार्ब्स और फैट का सेवन कर सकते हों लेकिन आपको एक सीमित कैलोरी मात्रा में खाना होता है। फास्टिंग के समय भूख और क्रेविंग के कारण व्यक्ति का स्वाभाव चिड़चिड़ा हो सकता है। इसमें पोर्शन कंट्रोल और हेल्दी ईटिंग पर ध्यान देना होता है जिसके कारण आपको कुछ खास फूड्स की क्रेविंग भी हो सकती है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग में लंबे समय तक भूखा रहने और पर्याप्त पोषण की कमी के कारण धीरे-धीरे हमारे शरीर का मेटाबॉलिज़्म कमजोर होने लगता है। डायबिटीज़ के मरीजों और गर्भवती महिलाओं को इंटरमिटेंट फास्टिंग करने से अधिक नुकसान हो सकता है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग में कॉफी और चाय पीने की अनुमति होती है। ऐसे में लोग फास्टिंग के दौरान भूख को शांत करने के लिए चाय और कॉफी का सेवन करते हैं। इससे धीरे-धीरे कैफीन पर बहुत अधिक निर्भरता बढ़ जाती है जिससे स्वास्थ्य को नुकसान होता है।
- प्रिया मिश्रा