Yes Milord: जुमे की नमाज़ से ठीक पहले मुसलमानों को कैसे लगा करारा झटका, क्या है भोजशाला का इतिहास

By अभिनय आकाश | May 16, 2026

मध्य प्रदेश के धार में भोजशाला का विवाद लंबे समय से चल रहा था। यहां पर बार-बार यह कहा जा रहा था कि यह कमाल मौला की मस्जिद है। हिंदू पक्ष बार-बार कह रहा था कि यह मंदिर है। लेकिन अब इस बीच यह जो लंबे समय से विवाद चल रहा था, इसको लेकर हाईकोर्ट ने एक फैसला लिया और उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि भोजशाला मंदिर है। यह कोई मस्जिद नहीं है। आपको बता दें 2003 से यहां पर एक अनुमति दी गई थी कि यहां पर आकर के नमाज पढ़ी जा सकती लेकिन अब पूरी तरीके से यहां पर हिंदुओं को इस बात की इजाजत दे दी गई है कि यहां पर पूरी तरीके से पूजा पाठ कर सकते हैं और इसे मां सरस्वती का मंदिर माना है। लंबे समय से हिंदू पक्ष इस बात को लेकर लड़ रहा था। एएसआई ने लंबा सर्वेक्षण किया। 98 दिनों तक यहां पर सर्वेक्षण किया गया और उसके बाद यह फैसला आया है। 2003 का एएसआई का वो आदेश भी कोर्ट ने रद्द कर दिया है जिसमें मंगलवार को हिंदुओं को पूजा और शुक्रवार को मुसलमानों को नमाज की इजाजत दी गई थी। अब नमाज पर रोक लग गई है। हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार मिल गया है। एएसई को जगह की देखभाल और संरक्षण की पूरी जिम्मेदारी रहेगी। मुस्लिम समुदाय के लिए कोर्ट ने यह कहा है कि अगर वह धार जिले में मस्जिद बनाने के लिए जमीन मांगे तो राज्य सरकार इस पर विचार करें। हिंदू पक्ष की ओर से अदालत में एक और अहम मांग की गई थी। क्या वो यह कि राजा भोज की आराध्या मानी जाने वाली वाग देवी सरस्वती की प्राचीन प्रतिमा को लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूजियम से वापस भारत लाने का आदेश दिया जाए। कोर्ट ने इस पर कहा है कि याचिकाकर्ता सरकार को ज्ञापन दे सकते हैं और सरकार इस विषय पर विचार सकती है।

 2. एएसआई रिपोर्ट अहमः रिपोर्ट में 94 मूर्तियां, 150 संस्कृत-प्राकृत शिलालेख और मंदिर शैली के स्तंभों का जिक्र है। मुस्लिम पक्ष ने रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताया था, जबकि एएसआई ने कहा, विशेषज्ञों की मदद से सर्वे हुआ, मुस्लिम भी शामिल थे।

 3. प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्टः मुस्लिम पक्ष ने 1991 के प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा, संरक्षित स्मारक इस कानून से बाहर हैं। भोजशाला 1904 से संरक्षित स्मारक है।

4. जैन पक्ष का दावाः जैन पक्ष ने परिसर को जैन मंदिर, गुरुकुल बताया था। कोर्ट ने कहा, रिकॉर्ड और पुरातात्विक सामग्री इसे जैन मंदिर घोषित करने के लिए पर्याप्त नहीं।

हिंदू पक्ष ने दी थी कई दलील

सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से भोजशाला को मंदिर बताते हुए कई ऐतिहासिक सबूत पेश किए गए। याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि यहा लंबे समय से वसंत पंचमी सहित अन्य अवसरों पर पूजा-अर्चना की परंपरा रही है।

मुस्लिम पक्ष ने उठाए थे सवाल

कोर्ट में ASI की सर्वे रिपोर्ट को मुस्लिम समुदाय ने पक्षपातपूर्ण बताया। उनका कहना था कि यह रिपोर्ट हिंदू पक्ष के दावो को मजबूत करने के मकदस से तैयार की गई है। ASI ने अदालत में कहा कि सर्वे पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से किया गया है।

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क्या है भोजशाला का इतिहास

भोजशाला का इतिहास 11वी शताब्दी से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि यहां मां सरस्वती का मंदिर और विद्या केंद्र था। दावा है कि 12वीं-13वीं शताब्दी में मंदिर को ध्वस्त कर वहां मकबरा और मस्जिद का निर्माण किया गया। 18 मार्च 1904 से संरक्षित स्मारक के रूप में दर्ज है। यह परिसर 1958 के प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल अधिनियम के तहत भी संरक्षित है। लंबे समय से यह विवाद बना हुआ था कि इस धर्म इस इस स्थल का धार्मिक स्वरूप क्या है? हिंदू पक्ष इसे देवी वाग देवी सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र बताता रहा है। जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता रहा है। कहा जाता है कि यहां पर 1000 से 1055 ईसवी तक राजा भोज ने शासन किया। राजा भोज सरस्वती देवी के बड़े भक्त कहे की ऐसा मान्यता है। उन्होंने यहां 1034 ईस्वी में एक महाविद्यालय की स्थापना की जिस जिसे बाद में भोजशाला के नाम से जाना जाने लगा। इसे हिंदू सरस्वती मंदिर भी मानते थे। कुछ इतिहासकार यह भी कहते हैं कि 1305 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने गौशाला को ध्वस्त कराया था। बाद में दिलावर खान गौरी ने 1401 ईस्वी में भोशाला के एक हिस्से में मस्जिद बनवा दी और उसके बाद 1514 ईस्वी में महमूद शाह खिलजी ने बाकी बचे भाग पर भी मस्जिद बनवा दी। कोर्ट के आदेश पर एएसआई ने यहां पर 98 दिनों तक सर्वे भी करवाया था। परिसर से चांदी, तांबे, एलुमिनियम और स्टील के कुल 31 सिक्के पाए गए थे। ये सिक्के 10वीं 11वीं शदी के इंडो सेशियन काल 13वीं 14वीं सदी के दिल्ली सल्तनत और 15वीं 16वीं शतादी के मालवा सुल्तान और मुगल काल के समय के हैं। कुछ खिड़कियों और खंभों पर देवी देवताओं या पशुओं की आकृतियां उकेरी हुई पाई गई। जांच के दौरान कुल 94 मूर्तियां, मूर्ति कला के टुकड़े और वास्तु शिल्प देखे गए। खंभों की कुछ बीमों पर चार सशस्त्र देवताओं की मूर्तियां उकेरी गई थी। इनमें गणेश, ब्रह्मा, नर्सिंग आदि उनकी तस्वीरें शामिल हैं। 

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