Chai Par Sameeksha: Parliament Session कितना सार्थक रहा? Priyanka Vadra के रुख ने क्या संकेत दिया?

By अंकित सिंह | Dec 22, 2025

प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने संसद सत्र को लेकर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे जी। नीरज कुमार दुबे से हमने पहला सवाल जी राम जी विधेयक पर ही पूछा। इसके जवाब में नीरज कुमार दुबे ने कहा कि कहा कि मनरेगा की जगह जी राम जी विधेयक को लाना आज के समय की जरूरत है और दूसरी वजह हर सरकार अपने हिसाब से काम करती है। अपने हिसाब से किसी भी कानून का नामकरण करती है। इस सरकार के बाद अगर कोई दूसरी सरकार आती है तो उसके पास भी किसी योजना के नाम बदलने का अधिकार होता है।

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दुबे ने कहा कि मनरेगा में जो तकनीकी खामियां थी, उसे दूर करने की कोशिश की गई है। साथ ही साथ 100 दिन की जगह अब 125 दिन रोजगार गारंटी मिल रही है। इसे भी सरकार अपनी कामयाबी बता रही है। विपक्ष की सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि कांग्रेस सरकार द्वारा इस योजना को लाया गया था। इसे कांग्रेस का सबसे बड़ा क्रांतिकारी कदम बताया गया था। लेकिन आज इस योजना को मोदी सरकार बदल रही है। ऐसे में विपक्ष में रहने की वजह से कांग्रेस को इसका विरोध करना बनता है और कांग्रेस वही कर रही है। इसे सिर्फ और सिर्फ सियासत के चश्मे से ही देखा जाना चाहिए। बाकी जरूरत के हिसाब से सरकारें योजनाओं को लेकर आती हैं या उनमें सुधार करती है।

संसद के कामकाज को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि इस बार संसद के दोनों सदनों में अच्छा काम काज हुआ। यह हर देशवासी के लिए संतोष की बात है और हर देशवासी यह उम्मीद करेगा कि आगे भी ऐसा ही कामकाज संसद के दोनों सदनों में हो। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ छात्रों में हमने देखा कि विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने सामने होता था। लेकिन इस बार शुरुआत के एक-दो दिन छोड़ दिया जाए तो सामान्य कामकाज दोनों ही सदनों में देखने को मिला। उन्होंने कहा कि कई बड़े कामकाज इस सत्र में हुए हैं। चुनाव सुधार और वंदे मातरम पर चर्चा भी हुई है। इस सत्र में प्रियंका गांधी ने जबरदस्त तरीके से खुद को प्रेजेंट किया है। उनके भाषण की भी चर्चा हो रही है। उनके व्यवहार की भी चर्चा हो रही है। साथ ही साथ जो स्पीकर ओम बिरला की ओर से संसद के आखिर में टी पार्टी बुलाई जाती है, उसमें प्रियंका गांधी के शामिल होने पर एक अलग ही माहौल अपने लोकतंत्र का दिखाई दे रहा है और यह लोकतंत्र के लिए बहुत अच्छी बात है। 

नीरज दुबे ने कहा कि जिस दिन प्रधानमंत्री ने यह बात कही कि ड्रामा नहीं डिलीवरी चाहिए, उसके बाद से ऐसा लग रहा था कि इस सत्र में भी विपक्ष हंगामा करेगा। एक-दो दिन साफ तौर पर यही देखने को मिला। लेकिन उसके बाद दोनों पक्षों की ओर से चाहे वह सत्ता पक्ष हो या विपक्ष हो, आपसी बातचीत के बाद सामान्य रूप से कामकाज करने की कोशिश की गई और इसमें सरकार काफी हद तक कामयाबी हुई है। तीखी नोकझोंक संसद में वाद-विवाद के क्रम में चलता रहता है। इससे कोई नुकसान नहीं है। स्वस्थ लोकतंत्र में यह परंपरा बहुत पुरानी रही है।

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