By कमलेश पांडे | Mar 30, 2026
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वर्ष 2021 में बैंक लॉकर सुविधा के लिए विभिन्न संशोधित दिशानिर्देश जारी किए, जो विगत 1 जनवरी 2022 से लागू हैं। इनके तहत बैंक लॉकर से सामान गायब होने पर बैंक की जिम्मेदारी तय की गई है। साथ ही ग्राहक की लापरवाही के बारे में भी नियमसम्मत जानकारी उपलब्ध कराई गई है ताकि किसी भी प्रकार का नीतिगत विरोधाभास नहीं बचे। यही वजह है कि बैंक लॉकर के धंधे में तेजी आई है।
जहां तक मुआवजे की प्रक्रिया की बात है तो बैंक की लापरवाही, चोरी, आग, डकैती, लूट या कर्मचारी धोखाधड़ी से नुकसान होने पर बैंक सालाना किराए के 100 गुना मुआवजा देगा। उदाहरणस्वरूप, यदि सालाना किराया 4000 रुपये है, तो अधिकतम 4 लाख रुपये मिल सकते हैं।वहीं, प्राकृतिक आपदा या ग्राहक की एकमात्र लापरवाही के मामले में बैंक जिम्मेदार नहीं होता है।
उल्लेखनीय है कि आरबीआई ने बैंक लॉकर नियमों को 2021 से कई चरणों में अपडेट किया है, जिसमें 2025 में बायोमेट्रिक एक्सेस, सीसीटीवी और क्लेम निपटान पर नए निर्देश शामिल हैं। ये 31 दिसंबर 2025 तक पूरी तरह लागू हों चुके हैं। सुरक्षा उपाय के तहत, बैंकों को लॉकर रूम में बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट/आइरिस) सत्यापन, 24x7 सीसीटीवी (180 दिन फुटेज) और एक्सेस पर एसएमएस/ईमेल अलर्ट अनिवार्य करना होगा। वहीं ड्यूल-की सिस्टम बरकरार रहेगा।
जहां तक मुआवजा और दायित्व की बात है तो बैंक की गलती से नुकसान पर सालाना किराए का 100 गुना मुआवजा मिलेगा। जबकि नकदी, हथियार या खतरनाक वस्तुएं रखना प्रतिबंधित है; और 3 साल निष्क्रियता पर बैंक लॉकर खोल सकते हैं। वहीं, क्लेम निपटान हेतु मृत ग्राहक के लॉकर/खाते क्लेम पर सभी दस्तावेज मिलने के 15 दिनों में निपटारा अनिवार्य है, जबकि देरी पर मुआवजा मिलेगा। ये नियम 31 मार्च 2026 तक पूर्ण रूप से लागू हो चुके हैं। इसके तहत स्टैंडर्ड एग्रीमेंट और नॉमिनेशन अपडेट जरूरी है।
बैंक लॉकर से नुकसान होने पर आरबीआई (RBI) गाइडलाइंस के अनुसार, बैंक सालाना किराए के 100 गुना तक मुआवजा देगा, यदि नुकसान बैंक की लापरवाही, चोरी, आग, डकैती या कर्मचारी धोखाधड़ी से हुआ हो तो। वहीं मुआवजे की गणना के लिए निम्न उदाहरण दिए गए हैं, जिसके मुताबिक, यदि आपका लॉकर किराया ₹3,000 सालाना है, तो अधिकतम ₹3,00,000 (3,000 x 100) मिल सकता है, भले ही सामान की कीमत इससे ज्यादा हो।यह सीमा किराए पर आधारित है, क्योंकि बैंक लॉकर सामग्री का मूल्यांकन नहीं करता। सवाल है कि आखिर कब यह मुआवजा नहीं मिलेगा, तो जवाब होगा कि प्राकृतिक आपदा या ग्राहक की एकमात्र गलती (जैसे गलत PIN) पर बैंक जिम्मेदार नहीं होगा। वहीं दावा साबित करने के लिए एफआईआर, सीसीटीवी सबूत जरूरी हैं; जबकि अतिरिक्त बीमा कराना उचित होता है।
अब सवाल है कि यदि कुछ गड़बड़ हुआ है तो दावा कैसे करें? तो यह जान लीजिए कि नुकसान की सूचना बैंक को तुरंत दें और पुलिस में प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराएं। जिसके बाद बैंक को सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, एक्सेस लॉग और जांच पूरी होने तक रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा। तब मौजूदा लॉकर धारकों के लिए 1 जनवरी 2023 तक एग्रीमेंट अपडेट करना अनिवार्य था और अब नए नियमों के मुताबिक ही बैंक और ग्राहक में एग्रीमेंट बन रहे हैं।
आरबीआई (RBI) लॉकर नियमों में "एक्ट ऑफ गॉड" प्राकृतिक आपदाओं को संदर्भित करता है। एक्ट ऑफ गॉड की परिभाषा के तहत प्राकृतिक आपदा जैसी घटनाएं, जो मानवीय नियंत्रण से बाहर होती हैं, जैसे भूकंप, बाढ़, तूफान, बिजली गिरना या सुनामी। इनमें बैंक की कोई लापरवाही नहीं मानी जाती। लिहाजा मुआवजे पर इसका प्रभाव पड़ता है। चूंकि ऐसी आपदाओं से लॉकर में सामान नष्ट या गायब होने पर बैंक कोई मुआवजा नहीं देगा। इसलिए ऐसी आफत से बचने के लिए बैंक को लॉकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होते हैं, जैसे सीसीटीवी और मजबूत ताले। वहीं, चोरी या बैंक कर्मचारी की गलती में 100 गुना किराए तक मुआवजा मिल सकता है। वहीं इस क्षति से बचने के लिए आप लॉकर वस्तु बीमा करवा सकते हैं, ताकि आपके क्षति की भरपाई संभव हो सके।
हालांकि, आरबीआई (RBI) लॉकर नियमों में एक्ट ऑफ गॉड के अलावा भी कुछ स्थितियां हैं जहां बैंक मुआवजा नहीं देगा। जैसे, ग्राहक की लापरवाही यानी कि अगर ग्राहक लॉकर की कुंजी खो देता है, गलत व्यक्ति को पहुंच देता है या लॉकर का अनधिकृत उपयोग करता है, तो बैंक जिम्मेदार नहीं माना जाएगा। वहीं लॉकर समझौते में हस्ताक्षर न करने या नियमों का पालन न करने पर भी मुआवजा नहीं मिलेगा। वहीं, अन्य अपवाद स्वरूप बैंक द्वारा लॉकर बीमा न कराने पर भी, नुकसान की कुल राशि का भुगतान नहीं होगा- केवल वार्षिक किराए के 100 गुना तक सीमित रहता है। जबकि युद्ध, दंगा या आतंकवादी हमले जैसी घटनाओं में भी बैंक की दायित्व सीमा लागू हो सकती है, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं के समान छूट मिलती है। इसलिए हमेशा लिखित समझौता जांचें।
आपको यह पता होना चाहिए कि विभिन्न बैंकों में लॉकर किराया आकार, स्थान (मेट्रो/शहरी/ग्रामीण) और बैंक नीति पर निर्भर करता है, जो सालाना जीएसटी (GST) सहित लिया जाता है। ये शुल्क 2026 में अपडेटेड हैं और बदल सकते हैं। यदि प्रमुख बैंकों के किराए की तुलना करनी है तो सटीक जानकारी के लिए बैंक शाखा से संपर्क करें। यह भी जान लें कि लॉकर किराया अग्रिम लिया जाता है, और 3 साल का एक सावधि जमा (FD) भी जरूरी हो सकता है।
चूंकि बैंकों में लॉकर लेने के लिए एफडी (FD) की आवश्यकता कई बार लगाई जाती है, लेकिन यह आरबीआई (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, वैकल्पिक है। एफडी (FD) की मुख्य वजहें इस प्रकार हैं- कई बैंक लॉकर किराए की वसूली सुनिश्चित करने के लिए 3 साल के किराए के बराबर एफडी (FD) मांगते हैं, जिसका ब्याज किराए में समायोजित होता है। इससे किराया बकाया रहने पर बैंक सुरक्षित रहता है। हालांकि, आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि बैंक लॉकर आवंटन के लिए एफडी (FD) या बीमा अनिवार्य नहीं कर सकते; केवल किराया और शुल्क ही पर्याप्त हैं। ऐसे में यदि बैंक जबरदस्ती करें, तो शिकायत दर्ज कराएं। कुछ बैंक इसे स्वेच्छा नीति के रूप में रखते हैं ताकि लॉकर उपलब्धता प्रबंधित रहे।
- कमलेश पांडेय
वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार